gulmohar
रात के शांत वातावरण में अकेली स्त्री, चाँदनी और स्मृतियों में डूबी भावनात्मक अनुभूति का दृश्य।

स्मृति और… तुम!

स्मृति और… तुम!’ प्रेम और अनुपस्थिति के सूक्ष्म भावों को गहरी संवेदना के साथ अभिव्यक्त करती कविता है। स्मृतियों की नमी, इंतज़ार की सीलन और भीगे सन्नाटे के बीच यह रचना बताती है कि प्रेम को अंत तक ढोने के लिए शब्द नहीं, स्मृति चाहिए।

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नानी के गाँव में चूल्हे पर रोटी बनाती दादी और नीम की छाँव में खेलते बच्चे

याद आता है पुराना जमाना

यह कविता बचपन की उन सरल और सच्ची यादों को जीवंत करती है, जब नानी का गाँव, चूल्हे की रोटी, नीम की छाँव, पाठशाला के संस्कार और बिजली जाने पर चिमनी की रोशनी जीवन का हिस्सा थे। “याद आता है पुराना जमाना” सिर्फ स्मृतियों का वर्णन नहीं, बल्कि उस सादगी, अपनापन और संस्कारों की दुनिया की भावनात्मक पुनर्स्मृति है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कहीं पीछे छूट गई है।

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