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वृन्दावन नाव हादसा: य

यमुना में हादसा या सिस्टम की विफलता ?

वृन्दावन में यमुना नदी में हुआ नाव हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई, संचालकों की लापरवाही और जनता की अनदेखी का परिणाम है। यह घटना सामूहिक जिम्मेदारी और सुरक्षा के प्रति जागरूकता की जरूरत को उजागर करती है।

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टीआई पंवार का बड़ा कदम: ₹51,000 दान से समाज को दी प्रेरणा

टीआई मदन सिंह पंवार ने समाज सेवा की मिसाल पेश की

महिदपुर रोड में टीआई मदन सिंह पंवार ने श्मशान समिति को ₹51,000 की दान राशि देकर समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उनके इस कदम से न केवल विकास कार्यों को बल मिलेगा, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।

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मुझसे मुझ तक…

प्रेम मेरे लिए कभी प्रश्न नहीं रहा।
मैंने देखा है तृणों को ओस की बूँदों को थामते हुए,
नन्हें जीवों को अपनी माँ की खोज में भटकते हुए,
धरती को तपिश में बादलों के लिए तड़पते हुए,
और पतझड़ को बसंत की याद में बिलखते हुए।
मेरे लिए तो यही है प्रेम की सबसे संजीदा कहानी जहाँ पीड़ा भी करुणा में ढल जाती है,
और आँसू भी कविता बनकर बह निकलते हैं।

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पहचान लिखो…

एक उम्र-दराज़ औरत अपने वजूद की दास्तान खुद नहीं. उस नज़र से लिखवाना चाहती है जो उसे सच में समझती है। दुनिया ने उसे अपने पैमानों से तौला, पर वह बस इतना चाहती है कि कोई उसे “इंसान” की तरह लिखे।

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मायके के दरवाज़े पर खड़ी एक भावुक बेटी, माँ की तस्वीर को देखते हुए बीते दिनों को याद करती हुई।

पराया मायका

माँ के रहते मायका सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि प्यार, अपनापन और प्रतीक्षा का दूसरा नाम होता है। लेकिन माँ के जाने के बाद वही घर क्यों पराया-सा लगने लगता है? ‘पराया मायका’ एक ऐसी भावुक लघुकथा है, जो हर बेटी के दिल में छिपे उस खालीपन को शब्द देती है, जिसे केवल माँ की अनुपस्थिति ही पैदा कर सकती है।

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दादर से पंढरपुर जाने वाली आषाढ़ी वारी 2026 विशेष ट्रेन में यात्रा करते श्रद्धालु

आषाढ़ी वारी 2026 : पंढरपुर के लिए दादर से 2 विशेष ट्रेनें

आषाढ़ी वारी 2026 के लिए मध्य रेल ने श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात दी है. दादर-पंढरपुर-दादर के बीच 24 और 26 जुलाई को दो विशेष ट्रेनें चलेंगी. जानें समय, स्टॉपेज, आरक्षण और टिकट बुकिंग की पूरी जानकारी.

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एक दिवाली बचपन वाली…

वो दिवाली, जिसमें दीपक छोटे थे, पर हमारी खुशियाँ बहुत बड़ी। जिसमें घर की सफाई भी खेल थी, और कबाड़ में से गुम चीज़ मिल जाना किसी खजाने से कम नहीं। जिसमें पटाखों की आवाज़ें नहीं… हमारी हँसी की गूँज ज़्यादा थी।जिसमें मिठाईयों की खुशबू थी, और त्योहारों में सजे संस्कार। वो दिवाली… जो परंपरा के साथ हमारी मासूमियत को भी रोशन कर देती थी।

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एक साल के बच्चे ने खेल-खेल में कोबरा को काटा

बिहार के बेतिया में एक साल के मासूम ने खेल-खेल में कोबरा को काट डाला। सांप की मौत हो गई, लेकिन बच्चा सुरक्षित है और इलाज के बाद खतरे से बाहर बताया जा रहा है।

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मुंबई में साहित्य की स्मृति का उत्सव

मुंबई की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘गुलदान’ द्वारा आयोजित हस्तीमल ‘हस्ती’ स्मृति सम्मान समारोह में हिंदी–उर्दू साहित्य, संगीत और नृत्य का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में देशभर के कवि–शायरों की उपस्थिति रही, वहीं वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। यह आयोजन साहित्यिक स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त प्रयास बना।

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जीवन के गीत गाते चलो

जीवन में अंधेरा, आंधियां और कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन विश्वास और साहस के साथ चलना ही जीवन का सार है। दुखों से आँखें मिलाकर आगे बढ़ते हुए, दीप जलाते और खुशियाँ मनाते हुए हम अपने जीवन के गीत गाते रहें। यही प्रयास हमें भीतर और बाहर दोनों जगह उजाला देने का सामर्थ्य देता है।

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