छोटा बच्चा अपनी गुल्लक देकर जरूरतमंद की मदद करता हुआ, प्रेरणादायक हिंदी कहानी

उम्मीद

यह सुनते ही रोहित तुरंत घर के अंदर गया और अपना गुल्लक लेकर आया।उसने वह गुल्लक राहुल के पिता को देते हुए कहा,‘आप इन पैसों से राहुल का इलाज करवा दीजिए।’
यह वही पैसे थे, जिन्हें वह अपनी साइकिल खरीदने के लिए जमा कर रहा था.लेकिन उस दिन उसकी छोटी-सी सोच ने किसी के घर में बड़ी उम्मीद जगा दी।”

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गुरु की शरण सौभाग्य का द्वार – पं. राजरक्षितविजयजी

श्री संभवनाथ जिनालय, पुणे में आयोजित गुरु पूर्णिमा प्रवचन में पं. राजरक्षितविजयजी ने कहा – “संपत्ति भाग्य से मिलती है, लेकिन सद्गुरु सौभाग्य से मिलते हैं।” उन्होंने गुरु की सेवा को भगवान की सेवा से भी श्रेष्ठ बताया और जीवन में सद्गुरु के मार्गदर्शन की अनिवार्यता पर बल दिया।

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खामोशी का बोलता सफर

बीस साल बाद एक ट्रेन के कंपार्टमेंट में हुई ये आकस्मिक मुलाकात जहाँ न शब्द थे, न शिकायते सिर्फ वही पुरानी खुशबू, वही मोहब्बत और दो लोगों के बीच पसरी खामोशी, जो बोलती तो थी… मगर सिर्फ दिलों में

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कालरात्रि माँ

“गर्दभ वाहन पर विराजित, खड्ग-खप्परधारी कालरात्रि माँ, शत्रु का दमन करने वाली और भक्तों को समृद्धि देने वाली माता। सप्तम दिन पूजा करने से दूर होती हैं बाधाएँ, और अर्पित रक्त पुष्प व शहद से होती है शुभ फलप्राप्ति।”

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दयानंद महाविद्यालय में हिंदी उत्सव

19 सितंबर 2025 को दयानंद कला महाविद्यालय, लातूर में हिंदी दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हिंदी विभाग ने “नवचेतना” हिंदी साहित्य मंडल की स्थापना की, जो विद्यार्थियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देगा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और महर्षि दयानंद सरस्वती की प्रतिमा वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि श्री बजरंग पारिख ने हिंदी भाषा की महत्ता और वर्तमान समाज में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानाचार्य डॉ. शिवाजी गायकवाड़ ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और आत्मा की अभिव्यक्ति है। छात्रों ने भावनात्मक और प्रेरणात्मक कविताएँ प्रस्तुत कीं और हिंदी के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प लिया।

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समुद्र पर पड़ती सूर्य किरणों का सुंदर दृश्य

जल रागिनी

“जल रागिनी” एक सुंदर प्रकृति कविता हिंदी में लिखी गई रचना है, जिसमें सूर्य किरणें और सागर के अद्भुत संगम को संगीतात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह जल रागिनी कविता प्रकृति के उस जीवंत क्षण को दर्शाती है, जब सूर्य की किरणें समुद्र की सतह पर थिरकती हुई जीवन, ऊर्जा और सौंदर्य का संदेश देती हैं। इस प्रकृति कविता में सागर और प्रकाश के मिलन को मानो एक दिव्य नृत्य के रूप में चित्रित किया गया है, जो पाठक को शांति, आनंद और आंतरिक अनुभूति से भर देता है।

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वृद्धाश्रम के कमरे में खिड़की के पास बैठी एक वृद्ध माँ, आँखों में आँसू और हाथों में परिवार की पुरानी तस्वीर, बाहर दीपावली की रोशनी और भीतर गहरा अकेलापन।

टूट जाती हूँ जब…

वृद्धाश्रम में रह रही एक माँ के मन की पीड़ा, बच्चों के प्रति अटूट प्रेम और उपेक्षा के दर्द को अभिव्यक्त करती यह मार्मिक कविता पाठकों को रिश्तों, संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं पर गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करती है।

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अर्तम काव्य संग्रह की पुस्तक के साथ शिव और कमल का प्रतीकात्मक चित्र

‘अर्तम’ काव्य संग्रह समीक्षा: दिव्या सक्सेना की संवेदनशील कविताएं

मकालीन हिंदी कविता के बदलते परिदृश्य में दिव्या सक्सेना का काव्य संग्रह ‘अर्तम’ एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में सामने आता है। यह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवन, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना की गहरी पड़ताल है।

आज के दौर में जहां कविता अक्सर सपाट बयानी और अतुकांत शैली तक सीमित होती जा रही है, वहीं ‘अर्तम’ अपनी प्रतीकात्मकता, भाव-गहनता और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण अलग पहचान बनाता है। इस संग्रह में शिवत्व, आत्मबोध, स्त्री-चेतना और जीवन संघर्ष जैसे विषयों को सहज लेकिन प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

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भागलपुर में गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित गांधी स्मृति यात्रा सम्मान समारोह का दृश्य

महात्मा गांधी आगमन की शताब्दी पर राष्ट्रीय समारोह

भागलपुर में महात्मा गांधी के आगमन की शताब्दी पर राष्ट्रीय स्तर पर बहुआयामी समारोह आयोजित किए जाएंगे। गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता ने घोषणा करते हुए बताया कि कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को गांधी के विचारों और मूल्यों से जोड़ा जाएगा। झारखंड तक निकली गांधी स्मृति यात्रा में प्रो. मनोज कुमार, डॉ. मनोज मीता और प्रसून लतांत सहित कई गांधीवादी कार्यकर्ता शामिल रहे।

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मकाँ

एक जर्जर मकाँ खंडहर की तरह ढहता दिखाई देता है। कभी उसी छत के नीचे बच्चों की चहचहाहट गूँजती थी, माँ और बाबा की बातें घर को जीवंत बना देती थीं। आज वातावरण उदासी और रंजो-ग़म से भरा है, मानो साँसें भी उखड़-सी गई हों। दिल बार-बार उसी पुराने आशियाने को ढूँढता है, जहाँ अपनापन और जीवन की गर्माहट हुआ करती थी।

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