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महात्मा गांधी आगमन की शताब्दी पर राष्ट्रीय समारोह

भागलपुर में गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित गांधी स्मृति यात्रा सम्मान समारोह का दृश्य

भागलपुर में नई पीढ़ी को सौंपेंगे स्मारिका

हेमलता म्हस्के, प्रसिद्ध लेखिका, पुणे की रिपोर्ट

महात्मा गांधी के भागलपुर आगमन की शताब्दी पूर्ण होने के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर बहुआयामी समारोह आयोजित किए जाएंगे। समारोह में गांधी के विचारों और मूल्यों पर केंद्रित विचार-विमर्श, नाटक, फिल्म और संगीत के विविध कार्यक्रम आयोजित कर यह संदेश दिया जाएगा कि महात्मा गांधी मजबूरी का नहीं, बल्कि मजबूती का नाम हैं। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता ने यह घोषणा झारखंड से लौटे गांधी स्मृति यात्रा के यात्रियों के अभिनंदन हेतु गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित नागरिक सभा की अध्यक्षता करते हुए की। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण स्मारिका प्रकाशित की जाएगी, जिसकी हजारों प्रतियां नई पीढ़ी को सौंपी जाएंगी, ताकि वे अंग प्रदेश में महात्मा गांधी के आगमन के उद्देश्य और उसके प्रभाव से अवगत हो सकें।

यह यात्रा गांधीजी के बलिदान दिवस पर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग से झारखंड के लिए रवाना हुई थी। यात्रियों में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मनोज कुमार, वरिष्ठ गांधीवादी समाजकर्मी डॉ. मनोज मीता तथा वरिष्ठ गांधीवादी पत्रकार प्रसून लतांत शामिल थे। यात्रा के दौरान गांधी शांति प्रतिष्ठान, गांधी विचार विभाग, बैजानी, शोभनपुर, मधुपुर, धनबाद, झरिया, हजारीबाग, रामगढ़ और रांची सहित अनेक स्थानों पर महात्मा गांधी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही एक दर्जन से अधिक सभाओं में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, डीन, प्राचार्यों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संस्थाओं की महिलाओं, युवाओं और बच्चों से संवाद किया गया।

यात्रा के वरिष्ठ सदस्य प्रो. मनोज कुमार ने बिहार और झारखंड में अपनी पूर्व यात्राओं और वर्तमान गांधी स्मृति यात्रा के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधी वाङ्मय के सौ खंड प्रकाशित होने के बावजूद लोकमानस में गांधी से जुड़ी अनेक प्रेरक स्मृतियां दबी रह गई हैं, जिन्हें जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। डॉ. मनोज मीता ने यात्रा के दौरान एक होमगार्ड कर्मी द्वारा दिखाई गई ईमानदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि आम लोगों में गांधी के मूल्य आज भी जीवंत हैं, आवश्यकता उन्हें प्रोत्साहित करने और अनुकूल वातावरण निर्मित करने की है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने भागलपुर के गांधीमय इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में गांधीवादी कार्यकर्ताओं की संख्या यहां सर्वाधिक है। उन्होंने प्रशासन और नागरिकों से शताब्दी समारोह को राष्ट्रीय स्वरूप देने की पहल करने का आह्वान किया।

पूर्व कुलपति डॉ. फारूक अली ने यात्रियों का अभिनंदन करते हुए लाजपत पार्क को विभूतियों का स्मृति पार्क बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। वरिष्ठ समाजकर्मी उदय ने कहा कि गांधी की स्मृतियों के आधार पर वर्तमान चुनौतियों से मुकाबला करने की रणनीति तैयार की जानी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पर्यावरणकर्मी सुनील मंदार ने किया तथा वक्ताओं के विचारों पर सारगर्भित टिप्पणियां प्रस्तुत कीं। धन्यवाद ज्ञापन प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाजकर्मी एनुल हुदा ने किया।

सभा में हबीब मुर्शिद खा, डॉ. योगेंद्र, मोहम्मद शाहबाज, वासुदेव भाई, रेनू सिंह, प्यारी देवी, उदय, गोकुल शाह, जयंत जलद और मोहम्मद जिनी हमीदी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे, जिन्होंने गांधी स्मृति यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि गांधी के विचार आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं और उनकी शताब्दी के अवसर पर व्यापक राष्ट्रीय आयोजन समय की मांग है।

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