
सुरेश परिहार संपादक, पुणे
सुबह की हल्की धूप, मंदिरों की घंटियां और बाजारों में चमकता सोना… आज का दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि उम्मीद, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। अक्षय तृतीया वह पावन दिन जिसे “अबूझ मुहूर्त” कहा जाता है। यानी आज आपको किसी पंडित से मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं, क्योंकि आज का हर पल शुभ है। “अक्षय” का अर्थ है जो कभी खत्म न हो। मान्यता है कि आज किए गए अच्छे काम, दान या निवेश का फल कभी कम नहीं होता, बल्कि समय के साथ बढ़ता ही जाता है। यही वजह है कि लोग इस दिन नया बिजनेस शुरू करते हैं, घर या वाहन खरीदते हैं और खासकर सोना जरूर खरीदते हैं, क्योंकि इसे स्थायी संपत्ति और माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
अगर आप विधि-विधान से पूजा करना चाहते हैं, तो आज का सबसे उत्तम समय सुबह 10:49 बजे से 12:20 बजे तक है, वहीं खरीदारी का शुभ समय 19 अप्रैल सुबह 10:49 बजे से लेकर 20 अप्रैल सुबह 3:57 बजे तक रहेगा। यानी आपके पास पूरा दिन है अपने सुनहरे फैसले लेने के लिए। हर साल अक्षय तृतीया पर ज्वेलरी शॉप्स में उमड़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि लोगों के लिए यह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास का पर्व है। माना जाता है कि इस दिन खरीदा गया सोना घर में बरकत लाता है, आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है और भविष्य के लिए सुरक्षित निवेश बनता है।
लेकिन अक्षय तृतीया केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, अन्न-जल या वस्त्र का दान, और किसी नए काम की शुरुआत करना बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि आज किया गया छोटा सा दान भी बड़ा फल देता है। वहीं इस दिन नकारात्मक सोच, बेवजह विवाद और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचना चाहिए, क्योंकि आज का दिन ऊर्जा का है जैसा करेंगे, वैसा बढ़ेगा।
दरअसल, अक्षय तृतीया हमें एक गहरी सीख भी देती है कि असली “अक्षय धन” सोना-चांदी नहीं, बल्कि हमारे अच्छे कर्म हैं। हो सकता है आप आज सोना न खरीदें, लेकिन अगर आपने किसी की मदद कर दी, किसी को मुस्कान दे दी, तो यकीन मानिए आपने सबसे बड़ा निवेश कर लिया। यही इस पावन दिन की सच्ची भावना है जो कभी खत्म नहीं होती।
