महिदपुर रोड में गुरु सप्तमी महापर्व की रहेगी धूम
महिदपुर रोड स्थित श्री स्थानीय सुविधिनाथ जैन मंदिर में गुरु सप्तमी महापर्व के अवसर पर प्रभात फेरी, भक्तांबर पाठ, गुरु इक्कीसा, गुरुपद महापूजन, महाआरती एवं भक्ति संध्या सहित विविध धार्मिक आयोजनों का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसमें महिला मंडल, बहु मंडल की सक्रिय सहभागिता रहेगी।
राग, ताल और नृत्य से गूँजा बालगंधर्व रंगमंदिर
आशाजनक कलाकारों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से बीते 28 वर्षों से आयोजित किया जा रहा कावेरी परंपरा बालसंगीत महोत्सव इस वर्ष भी उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। जंगली महाराज रोड स्थित बालगंधर्व रंगमंदिर में हुए इस आयोजन में नन्हें कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को जीवंत करते हुए अनुशासित और प्रभावी प्रस्तुतियाँ दीं। पुणे फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायक राहुल देशपांडे, सुप्रसिद्ध तबला वादक निखिल फाटक तथा विख्यात कथक नृत्यांगना शर्वरी जमेनीस मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर कन्नड़ संघ के अध्यक्ष कुशल हेगड़े, उपाध्यक्षा इंदिरा सालियान और कोषाध्यक्ष राधिका शर्मा भी मौजूद रहे।
शुक्रिया देवर्षि
दिल्ली से अहमदाबाद की एक साधारण-सी कैब यात्रा, जीवन का असाधारण अनुभव बन गई। महिला कैब ड्राइवर देवर्षि की आत्मनिर्भरता, साहस और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण ने यह एहसास कराया कि स्त्री हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। संवेदनाओं से भरा यह संस्मरण पाठकों को लंबे समय तक याद रहेगा।
जब रंग हुए लाल
यह कविता विश्व में फैलती हिंसा, नकली व्यवहार और टूटते मानवीय मूल्यों पर तीखा प्रश्न उठाती है। होली और रमज़ान जैसे पावन अवसरों के बीच खून-खराबे की विडंबना को उजागर करती एक मार्मिक सामाजिक रचना।
कुछ भी कहो…
“कुछ भी कहो” एक प्रेरक कविता है जो स्त्री की शक्ति, सहनशीलता, संघर्ष और आत्मविश्वास को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि नारी केवल नाम नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का स्वरूप है।
सैनिक का अंतर्मन
यह कविता एक सैनिक के अंतर्मन की उन गहराइयों को उजागर करती है, जहाँ कर्तव्य और भावनाएँ एक साथ सांस लेती हैं। वह अपने परिवारपत्नी, बहन, पिता और माँसे दूर होते हुए भी उनसे गहराई से जुड़ा रहता है, लेकिन देश के प्रति अपने वचन को सर्वोपरि रखता है। उसके भीतर का प्रेम त्याग में बदल जाता है, और उसकी हर विदाई एक अनकही पीड़ा के साथ-साथ गर्व का संदेश भी छोड़ जाती है। यह रचना बताती है कि एक सैनिक केवल सरहदों की रक्षा नहीं करता, बल्कि अपने दिल के सबसे करीब रिश्तों को पीछे छोड़कर पूरे देश को अपना परिवार मान लेता है।
बड़ी होटल : जब खबरें साँस लिया करती थीं
बड़ी होटल केवल एक होटल नहीं थी, बल्कि पूरे गाँव की धड़कन थी। वाल्व वाले रेडियो की गूंज में लोग अपने सुख-दुख, गर्व और शोक साझा करते थे। वहीं से देश-दुनिया की खबरें गाँव की गलियों में उतरती थीं और पोरवाल परिवार की सेवा-परंपरा ने इसे सच्चा सूचना केंद्र बना दिया।
सीमाओं के भीतर उड़ान
वह किसी पोस्टर पर छपी निडर स्त्री नहीं थी. न ही हर बहस में आगे बढ़कर अपनी ताक़त साबित करने वाली कोई प्रतीकात्मक नायिका. अनन्या उन अनगिनत महिलाओं में से एक थी, जिनकी शक्ति शोर नहीं करतीवह संतुलन रचती है.
महाकाल के चरणों में धनखड़
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के आयोजित भस्म आरती में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शामिल हुए. उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर भगवान महाकाल का जाप किया और दो घंटे तक भक्ति भाव से आरती में सहभागिता की. दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि महाकाल के दरबार में आने से मन को अद्भुत शांति मिलती है और देश में सकारात्मक बदलाव की लहर दिखाई दे रही है.
