सीधा सा गणित: बहू और ससुर के रिश्ते की भावुक हिंदी कहानी

सीधा सा गणित

‘सीधा सा गणित’ एक मार्मिक पारिवारिक कहानी है, जिसमें बहू के परिश्रम को अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन ससुर के स्नेहपूर्ण व्यवहार से रिश्तों की असली गरिमा सामने आती है। यह कहानी परिवार, सम्मान और प्रेम का सुंदर संदेश देती है।

Read More

“कब कह पाएंगे दिल की बात”

सोनम और राजा की कहानी ने एक बार फिर ये सवाल उठाया है — क्या हमारे समाज में किसी लड़की को सच कहने की आज़ादी है? जब रिश्तों में संवाद की जगह चुप्पी ले लेती है, तब वही चुप्पी कभी किसी की जान ले सकती है… और कभी किसी की जान बचा भी सकती है।

Read More

तिनके

छिन चुकी थीं एक छत, जो बँटवारे की भेंट चढ़ गई थी और मजबूरी में बेचनी पड़ी थी।
वैसे तो सविता को ज़मीन-जायदाद से कोई मोह नहीं था, लेकिन एक रहने को घर तो चाहिए ही था — जो अपना होता। पर जमीनी लालची अपनों ने ही उसका घर छीन लिया था। कानूनी दांव-पेंच में सविता को अपनी पतंग काटने में बरसों लग गए।
जीवन बिखरे तिनकों को समेटने में बीत रहा था। ख्वाहिशों की आग भी अब मध्यम हो चुकी थी।

Read More

जीवन चक्र और अंतिम विदाई

50 वर्षों का साथ, सुख-दुख की साझेदारी और परिवार की खुशियाँ — सब एक क्षण में बदल जाती हैं जब जीवन साथी इस संसार से विदा हो जाता है। यह अनुभव अकेलेपन, स्मृतियों और जीवन के चक्र की गहनता को सामने लाता है। इस लेख में हम एक पति के दृष्टिकोण से उस अंतिम विदाई और जीवन के अनुभवों की झलकियाँ साझा कर रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक परिवार और बच्चों के लिए समर्पण किया।

Read More
र्दी की आड़ में ठगी का खेल: निलंबित पुलिस हवलदार आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार

वर्दी की आड़ में विश्वासघात: पुलिस हवलदार बना ठग

पुणे में सराफों और महिलाओं से लाखों की धोखाधड़ी करने वाला निलंबित पुलिस हवलदार गणेश जगताप आखिरकार आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार किया गया. वरिष्ठ अधिकारियों का नाम, पत्नी की बीमारी और बेटी की पढ़ाई जैसे बहानों से उसने भरोसा जीतकर ठगी की. पुलिस अब उसके अन्य मामलों की भी जांच कर रही है.

Read More

मुशायरा ‘जश्न-ए-हिंदुस्तान’ का सफल आयोजन

अखिल भारतीय हिंदी उर्दू एकता अंजुमन’ संस्था द्वारा बाहरी दिल्ली के नांगलोई इलाके में एक शानदार मुशायरा और कवि सम्मेलन (एक शाम एहतराम सिद्दीकी के नाम) का आयोजन सुरभि स्टूडियो में किया गया। इसकी सदारत मशहूर शायर ख़ुमार देहलवी साहब ने की। मुख्य अतिथि फहीम जोगापुरी, अनिल मीत और अनस फैज़ी रहे।
मुशायरे का आगाज़ ताबिश खेराबादी ने ‘नात-ए-पाक’ से किया। निज़ामत असलम बेताब ने बेहद खूबसूरत अंदाज़ में निभाई। इस मुशायरे में दिल्ली और इसके आसपास के शहरों से आए लगभग 35 शायरों और शायरा ने शिरकत की और अपने-अपने कलाम पेश किए, जिन्हें वहाँ मौजूद श्रोताओं ने खूब सराहा।

Read More

जब तक शिष्टाचार जीवित, समाज भी जीवित

Give and Take की थ्योरी एक सरल लेकिन गहराई से भरी जीवन-दृष्टि है, जो न सिर्फ हमारे व्यक्तिगत संबंधों को परिभाषित करती है, बल्कि हमारे सामाजिक और पेशेवर जीवन में भी अहम भूमिका निभाती है। फिर चाहे वह मान – सम्मान,स्नेह हो या नफ़रत …..।
वैसे तो आज के समय में यदि हम अपने चारों ओर नज़र डालें, तो एक स्पष्ट और चिंताजनक परिवर्तन दिखाई देता है — शिष्टाचार की कमी। वह विनम्रता, वह ‘कृपया’, ‘धन्यवाद’, और ‘माफ कीजिए’ जैसे शब्द अब धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं। एक समय था जब बड़ों का सम्मान, छोटों पर स्नेह, और अजनबियों के प्रति भी आदर का भाव समाज की आत्मा हुआ करता था।

Read More

जब चिड़िया चुग गई खेत !

तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में आगे बढ़ते हुए विनोद ने सफलता तो पा ली, लेकिन रिश्तों को समय देना भूल गया। करवाचौथ के दिन एक गजरा उसे एहसास दिला देता है कि प्यार बड़ी चीज़ों में नहीं, बल्कि उन छोटे पलों में छिपा होता है जिन्हें वह हमेशा टालता रहा। जब समझ आया, तब बहुत देर हो चुकी थी।

Read More

स्लेट, पेम और चुप्पी

स्लेट, पेम और पानी.. इन सबसे जुड़ी एक मासूम-सी बात आज भी याद आते ही होंठों पर मुस्कान आ जाती है. बात उन दिनों की है. तब स्कूल जाना अभी-अभी शुरू हुआ था. मैं बहुत छोटा था और मेरी बड़ी बहन.. जीजी. मुझे अपने साथ स्कूल ले जाया करती थीं. वे अपनी कक्षा में जातीं और मैं अपनी. सरकारी स्कूल था, इसलिए कक्षाएँ पास-पास थीं और जीजी की नज़र मुझ पर बनी रहती थी.

Read More

गुड़ वाली चाय और मैं

गुड़ वाली चाय और मैं दोनों थोड़े देसी, थोड़े अनगढ़, पर पूरी तरह ईमानदार। जैसे गुड़ अपने रंग को धीरे-धीरे पानी में खोलता है, वैसे ही मेरी मिठास भी समय लेकर सामने आती है। सादगी में भी स्वाद छिपा होता है, यही हमें एक-दूसरे से जोड़ता है।

Read More