बाबूजी की हाथ घड़ी

मेरे पिताजी एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे, जिनकी तनख्वाह कम थी, लेकिन आत्मसम्मान और ज्ञान कूट-कूट कर भरा था। साल 1974 में उनके तबादले के समय, घर का सारा खर्च उधारी पर चलता था। घर का सामान बैलगाड़ी में शिफ्ट करना था, लेकिन पिताजी ने सबसे पहले 60 रुपए का उधार चुकाया। इसके लिए उन्होंने अपनी प्रिय सुनहरे डायल वाली हैनरी सैंडो घड़ी बेच दी।

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मतवाले नयन

आँखें केवल देखने का माध्यम नहीं होतीं, वे भीतर छुपे भावों की सबसे सशक्त भाषा होती हैं। जब शब्द असहाय हो जाते हैं, तब नयन ही संवाद का कार्य संभालते हैं। कभी शिकायत, कभी शरारत, कभी विद्रोह आँखों की हर गति मन के भीतर चल रहे परिवर्तन को प्रकट कर देती है। वे मनोभावों की कुशल गुप्तचर हैं, जो बिना कुछ कहे भी सब कुछ कह जाती हैं।

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स्पीड ब्रेकर ने लौटाई सांसें

इसे चमत्कार ही कहा जाएगा! उज्जैन जिले के खाचरोद क्षेत्र में एक महिला, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, एक स्पीड ब्रेकर के झटके से फिर से जीवित हो उठी. मृत महिला की सांसें लौटीं, यह घटना पूरे गांव और समाज के लिए कौतूहल और खुशी का विषय बन गई है.
खाचरोद की रहने वाली 75 वर्षीय अयोध्या बाई की 20 अगस्त को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. उनके बेटे उन्हें तुरंत इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल ले गए. जांच में पता चला कि उनके सिर की नस फट गई है.

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बारिश, प्यार और बिछड़ाव की कहानी

अब क्या होगा..

टीवी पर चलता एक सीन जैसे ही शेफाली की आँखों में उतरा, अतीत के पन्ने खुद-ब-खुद खुलने लगे। बारिश की वो पहली मुलाकात, फिसलते कदम और करण के मजबूत हाथों का सहारा सब कुछ जैसे कल की ही बात हो। लाइब्रेरी की खामोशियों में पनपा प्यार कब हदें पार कर गया, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। मगर हालातों ने ऐसा मोड़ लिया कि वही प्यार एक अधूरी कहानी बनकर रह गया। आज जब जिंदगी आगे बढ़ चुकी है, दिल के किसी कोने में वो यादें अब भी भीगती हैं बिल्कुल उस पहली बारिश की तरह।

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रात की खामोशी में डायरी के सामने बैठी एक भावुक स्त्री, अधूरी मोहब्बत और अनकहे सवालों में डूबी हुई।

मन का कोरा पन्ना

कुछ प्रश्न जीवन में हमेशा अनुत्तरित रह जाते हैं। “मन का कोरा पन्ना” प्रेम, पीड़ा, विवशता और अनकहे एहसासों की ऐसी ही संवेदनशील यात्रा है, जहाँ शब्दों से अधिक खामोशी बोलती है।

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शहर की सड़क के डिवाइडर पर लेटी सोचमग्न बिल्ली, पीछे गुजरती कारें और मोबाइल में व्यस्त लोग, बदलते समय का व्यंग्यात्मक दृश्य।

बिल्ली का अफसोस !

“बिल्ली का अफसोस” एक रोचक व्यंग्य कविता है जिसमें बिल्ली के माध्यम से बदलते समाज, खत्म होते अंधविश्वास और घटते रुतबे पर मज़ेदार कटाक्ष किया गया है।

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नारी देह, प्रकृति और समाज की दोहरी नैतिकता

यह सशक्त वैचारिक निबंध नारी, देह और समाज की दोहरी मानसिकता पर तीखा प्रश्न उठाता है। गाँव और शहर की स्त्रियों के दृष्टिकोण, सेक्स को लेकर समाज की संकीर्णता और प्रकृति के सहज संतुलन को केंद्र में रखते हुए लेख स्त्री-विमर्श को एक गहरे दार्शनिक स्तर पर ले जाता है।

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भारतीय शहर की सड़क पर एक डिलीवरी राइडर हेलमेट पहने मोटरसाइकिल रोककर खड़ा है, चेहरे पर थकान और राहत का भाव, पीछे ट्रैफिक और सिग्नल दिखाई दे रहे हैं, यह दृश्य सुरक्षित डिलीवरी और जिम्मेदार क्विक कॉमर्स का प्रतीक है।

10 मिनट की दौड़ खत्म: क्विक कॉमर्स में सुरक्षा की जीत

‘10 मिनट डिलीवरी’ की दौड़ पर विराम लगना सिर्फ विज्ञापन बदलाव नहीं, बल्कि राइडर्स की सुरक्षा और जिम्मेदार क्विक कॉमर्स की दिशा में एक अहम और संवेदनशील कदम है।

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सिंह पर विराजमान माँ दुर्गा का दिव्य स्वरूप, भक्तों को आशीर्वाद देती हुई

माँ दुर्गा

“माँ दुर्गा” एक भावपूर्ण भक्ति कविता है, जिसमें माँ अम्बे के नौ स्वरूपों का स्मरण करते हुए विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश की कामना की गई है। यह रचना श्रद्धा और समर्पण का सुंदर उदाहरण है।

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सीरत और सूरत के अंतर को दर्शाती हिंदी कविता, जिसमें चरित्र, संस्कार और आंतरिक सुंदरता की महत्ता का वर्णन किया गया है।

सीरत और सूरत

बाहरी सुंदरता समय के साथ फीकी पड़ सकती है, लेकिन अच्छे संस्कार, चरित्र और सौम्यता जीवनभर व्यक्ति की पहचान बने रहते हैं। सीरत और सूरत के अंतर को दर्शाती यह कविता पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।

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