जेन-ज़ी महिलाओं ने बदली भारत की ट्रैवल कहानी

सुरेश परिहार, पुणे
भारत में ट्रैवल का एक नया और दिलचस्प ट्रेंड उभर रहा है. सड़क यात्राओं की दुनिया में अब महिलाएं सिर्फ यात्री नहीं, बल्कि बदलाव की अगुआ बन रही हैं. ऑनलाइन बस टिकटिंग प्लेटफॉर्म रेडबस की ‘पिंक रिपोर्ट’ बताती है कि 2019 के बाद से भारत में महिलाओं की इंटरसिटी बस यात्राओं में 136 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है जेन-ज़ी यानी 14 से 29 साल की युवा महिलाएं. रिपोर्ट के मुताबिक बस से यात्रा करने वाली महिलाओं में करीब 60 प्रतिशत इसी आयु वर्ग की हैं और महिलाओं की कुल सोलो ट्रिप्स में उनकी हिस्सेदारी 68 प्रतिशत है. यह साफ संकेत है कि नई पीढ़ी की महिलाएं अब आत्मविश्वास के साथ अपने दम पर देश घूमने निकल रही हैं.
दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है. करीब 68 प्रतिशत महिला यात्री टियर-2 और टियर-3 शहरों से आती हैं. यानी छोटे शहरों की युवतियां भी अब पढ़ाई, काम, छुट्टियों या नए अनुभवों के लिए बेझिझक यात्रा कर रही हैं.
सोलो ट्रैवल के लिए गोवा, जयपुर और गोकर्ण जैसे डेस्टिनेशन महिलाओं के बीच खासे लोकप्रिय बन रहे हैं. समुद्र किनारे की सुकून भरी शामें, ऐतिहासिक शहरों की रंगीन गलियां और प्रकृति के बीच शांत पल – ये जगहें आज की स्वतंत्र यात्री महिलाओं को खूब आकर्षित कर रही हैं.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि महिलाएं यात्रा की योजना बनाने में काफी सजग होती हैं. करीब 62 प्रतिशत महिलाएं अपनी बस टिकट एक दिन पहले ही बुक कर लेती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 48 प्रतिशत है. बस चुनते समय वे सुरक्षा, अन्य महिला यात्रियों की संख्या और रेटिंग जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देती हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर सड़क संपर्क, ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म और किफायती किराया महिलाओं की यात्रा को आसान बना रहे हैं. यही कारण है कि आज भारत में हर तीन बस यात्रियों में एक महिला है.
दरअसल यह सिर्फ यात्रा की कहानी नहीं, बल्कि बदलते भारत की कहानी है — जहां महिलाएं अपनी मंजिल खुद चुन रही हैं, अपना रास्ता खुद तय कर रही हैं और बस की खिड़की से दुनिया को नए नजरिये से देख रही हैं.
