मां की आंखों के सामने गहराई में समा गया लाडला

Rescue team working to save a child trapped in a borewell in Ujjain while a distressed mother waits nearby

17 घंटे से बोरवेल में जिंदगी की जंग, बेटे की एक आवाज को तरसती मां

उज्जैन/बडनगर. मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के पास झालरिया गांव में एक दर्दनाक घटना ने हर किसी का दिल दहला दिया है. दो साल का मासूम भागीरथ देवासी खेलते-खेलते खुले बोरवेल में गिर गया और पिछले 17 घंटे से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है.

मां की आंखों के सामने यह हादसा हुआ. वह कुछ ही कदम पीछे चल रहा था, तभी अचानक उसकी आवाज आई और देखते ही देखते वह गहरे अंधेरे में समा गया. मां सट्टू बाई की चीखों से पूरा इलाका गूंज उठा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अब वही मां बेटे की एक आवाज सुनने के लिए तरस रही है.

करीब 200 फीट गहरे बोरवेल में 75 फीट नीचे फंसे भागीरथ को निकालने के लिए रेस्क्यू टीम लगातार प्रयास कर रही है. शुरुआत में उसे निकालने के लिए रिंग डालकर कोशिश की गई, लेकिन वह नाकाम रही. अब टीम सुरंग खोदकर बच्चे तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. पोकलेन मशीनों से तेजी से खुदाई जारी है, लेकिन हर गुजरता पल परिवार की बेचैनी बढ़ा रहा है.

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया. एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और रातभर से अभियान जारी है. पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर डटे हुए हैं. गांव में भारी भीड़ जमा हो गई है और हर कोई मासूम के सुरक्षित बाहर आने की दुआ कर रहा है.

भागीरथ का परिवार राजस्थान के पाली जिले के गुड़ानला गांव का रहने वाला है. वे यहां भेड़ चराने आए थे और कुछ दिनों से इसी इलाके में डेरा डाले हुए थे. पिता पूसाराम जब घटना के समय राजस्थान में थे, तो खबर मिलते ही वे तुरंत उज्जैन के लिए रवाना हो गए. मौके पर पहुंचते ही उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे.मामा भीमा राव और अन्य परिजन भी बेसुध हैं. उनका कहना है कि पीढ़ियों से वे यहां पशु चराने आते रहे हैं, लेकिन कभी ऐसा हादसा नहीं देखा. गांव में हर तरफ सिर्फ एक ही दुआ है कि भागीरथ सुरक्षित बाहर आ जाए. समय बीतता जा रहा है, खुदाई जारी है, लेकिन मां की निगाहें अब भी उसी गहरे गड्ढे पर टिकी हैं, जहां उसका लाल जिंदगी की जंग लड़ रहा है.

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