इंजीनियर भावना और मैनेजर यश का सम्मान

सांताक्रूज़ पश्चिम में आयोजित कार्यक्रम में ऑल इंडिया यादव महासभा, मुंबई ने सामाजिक कार्यों में सक्रिय इंजि. भावना और प्रबंधक यश का सम्मान किया। समारोह में चंद्रवीर बंशीधर यादव, गिरधारीलाल पंडित, डॉ. अमर बहादुर पटेल और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम समाज में सकारात्मक योगदान देने वालों को प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया।

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रात के नौ बजे, जब किस्मत जागती थी…

रात के ठीक नौ बजते ही महिदपुर रोड की रफ्तार बदल जाती थी। दादाभाई की दुकान के आसपास भीड़ सिमटने लगती, आँखों ही आँखों में फैसले हो जाते और किस्मत अपने पत्ते खोलने को तैयार रहती। नंबर खुलते ही कोई भीतर ही भीतर टूट जाता, तो कोई ऑपरेशन थिएटर के सफल होने जैसी राहत महसूस करता। वलन मिलते ही गर्म दूध के कड़ाह चढ़ जाते, मावाबाटी और रबड़ी के ऑर्डर लगते और पुरानी उधारियाँ मिठास में घुलकर उतर जातीं।यह सिर्फ़ सट्टे का खेल नहीं था. यह एक पूरे कस्बे की रातों की धड़कन थी।

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फोन हाथ में लिए खिड़की या दरवाज़े के पास खड़ी एक उदास महिला, रिश्तों में बढ़ती भावनात्मक दूरी को दर्शाता दृश्य।

दूरी की पहली आहट

‘दूरी की पहली आहट’ एक भावनात्मक लेख है जो रिश्तों में धीरे-धीरे बढ़ती दूरी, बदलते व्यवहार और भीतर जन्म लेती बेचैनी को गहराई से उकेरता है। यह कहानी उन अनकहे पलों की है, जब रिश्ता टूटता नहीं, बस धीरे-धीरे दूर होने लगता है।

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शब्दों की विहांगी : नीलम पेड़ीवाल

नीलम पेड़ीवाल “विहांगी” हिंदी साहित्य की एक सक्रिय और बहुआयामी रचनाकार हैं। इस विशेष साक्षात्कार में उन्होंने अपने साहित्यिक सफर, लेखन प्रेरणा, संघर्ष, उपलब्धियों और नए रचनाकारों के लिए महत्वपूर्ण संदेश साझा किए हैं।

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अहसासों के कतरन…

हम अपने आप में बस एक पानी की बूँद जैसे हैं। कभी मिट्टी पर गिरकर उसमें समा जाते हैं, तो कभी किसी पत्ते पर टिककर उसकी शोभा बढ़ाते हैं। और जब लहरों से मिलते हैं, तो खुद सागर का रूप ले लेते हैं। हमारी पहचान इस पर नहीं है कि हम कौन हैं, बल्कि इस पर है कि हम किससे जुड़ते हैं।

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एक प्रश्न

शर्मा जी ने जीवन की पूरी कमाई दो बेटों में बाँट दी, पर बदले में एक कमरा तक न मिला। किराए के मकान में रहने वाले शर्मा जी सुबह का खाना बड़े बेटे और शाम का खाना छोटे बेटे के यहाँ खाकर लौट आते। यह दिनचर्या उनके दस वर्षीय पोते निखिल से छिपी नहीं थी। एक दिन वह मासूमियत से पूछ बैठा. “पापा, जब आप बूढ़े हो जाएँगे… तो दूसरे वक्त का खाना कहाँ खाएँगे

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गोवा के समुद्र तट पर परिवार के साथ बिताए भावनात्मक पल

वाह… गोवा… वाह !

गोवा की यह यात्रा शोर-शराबे से ज़्यादा स्मृतियों की शांति है। समुद्र की लहरें, माँ की यादें, पोते की ज़िद और परिवार के साथ बिताए पल—यह संस्मरण गोवा को महसूस करने की एक भावनात्मक कोशिश है।

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एक भावनात्मक दृश्य जिसमें एक व्यक्ति पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा है, पतझड़ के पत्ते गिर रहे हैं और आसपास बदलते मौसम के साथ प्रकृति में आशा और स्मृतियों का प्रतीकात्मक चित्रण है

मौसम लौटता है ज़रूर

“मौसम लौटता है ज़रूर” एक संवेदनशील कविता है जिसमें ऋतुओं के माध्यम से प्रेम, बिछड़न और उम्मीद को बेहद खूबसूरती से व्यक्त किया गया है। यह कविता जीवन के चक्र और भावनाओं की गहराई को छूती है।

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जनवरी की धूप में चाय पीते हुए आत्मचिंतन करती महिला, सर्दी और मानवीय संवेदना का दृश्य

धूप, चाय और करुणा: जनवरी की सीख

“मेरी प्यारी जनवरी” एक आत्मीय और भावुक गद्य है, जिसमें सर्दियों की ठंड, धूप की मिठास, नए संकल्पों की शुरुआत और समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदना को बेहद सहज शब्दों में पिरोया गया है।

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पद्म पुरस्कारों के पीछे की अनसुनी कहानी

हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित होने वाले पद्म पुरस्कार केवल सम्मान नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का प्रतिबिंब होते हैं। Padma Awards 2026 के साथ जानिए ये प्रतिष्ठित पदक कहां बनते हैं, किस धातु से तैयार होते हैं और क्यों इनके साथ कोई नकद इनाम नहीं दिया जाता।

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