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मेरा श्रृंगार

यह कविता उस प्रेम की है जहाँ साथी केवल जीवन का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का श्रृंगार बन जाता है। मेंहदी की खुशबू, चूड़ियों की खनक और पायल की रुनझुन सब उसी के स्पर्श से अर्थ पाते हैं। सुख–दुख में साथ निभाने वाले प्रेम के उस रूप को यह पंक्तियाँ समर्पित हैं, जो मोह-माया से परे होकर भी दिल पर अपना गहरा रंग छोड़ जाता है. जैसे आत्मा का श्रृंगार।

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रात के समय अपने बेटे की तस्वीर को सीने से लगाकर बैठी एक वृद्ध भारतीय माँ, अकेलेपन और मातृत्व के गहरे भावों को दर्शाती हुई।

एकांत का शोर

“एकांत का शोर” एक मार्मिक कहानी है जो पिता के निधन के बाद माँ के जीवन में पसरे अकेलेपन और बेटे की व्यस्तता के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी को चित्रित करती है। जब बेटा अपनी माँ को आधी रात अपनी तस्वीर को सीने से लगाकर लोरी सुनाते हुए देखता है, तब उसे एहसास होता है कि सफलता की दौड़ में उसने सबसे अनमोल रिश्ते को अनदेखा कर दिया है।

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तेरी यादों का सैलाब

तेरी यादें जब भी उठती हैं तो सैलाब-सी बनकर मन को बहा ले जाती हैं। आँखों से आँसुओं के कतरे ढलते हैं, और हर कण में तेरा ही नूर झलकता है। तू अपनी जुल्फ़ों से बहारों को महकाती है, इंद्रधनुष-सी रंगीन चूनर लहराती है और चांदनी रातों को मधुशाला बना देती है। जितना तुझे भूलने की कोशिश करता हूँ, उतनी ही गहराई से तू याद आती है।

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सूर्योदय के समय चट्टान पर आत्मविश्वास से खड़ी भारतीय महिला, चेहरे पर दृढ़ता और शक्ति का भाव।

कुछ भी कहो…

“कुछ भी कहो” एक प्रेरक कविता है जो स्त्री की शक्ति, सहनशीलता, संघर्ष और आत्मविश्वास को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि नारी केवल नाम नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का स्वरूप है।

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म्मा: दादी की यादों, संस्कारों और ममता पर भावुक कविता

अम्मा

अम्मा” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो दादी की ममता, संस्कार और बचपन की यादों को सहेजती है. 2010 के बाद के अकेलेपन और भावनात्मक रिक्तता को यह रचना बेहद संवेदनशील ढंग से व्यक्त करती है.

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शहर में अपने लापता बेटे की तलाश करती बिहार की एक संघर्षशील माँ

तलाश

बिहार के एक छोटे से गाँव की सावित्री अपने लापता बेटे की तलाश में शहर पहुँच जाती है। अनेक कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद वह हार नहीं मानती और अपनी ममता की ताकत से अपने बेटे को ढूँढ़ निकालती है। यह कहानी माँ के अटूट प्रेम और साहस का अद्भुत उदाहरण है।

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पंजाब: संकट की घड़ी में मसीहा बने सोनू सूद

पंजाब इन दिनों भयंकर बाढ़ की चपेट में है. कई जिले पानी में डूब गए हैं, हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. ऐसे मुश्किल वक्त में अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद एक बार फिर लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं.
सोनू सूद, जो खुद पंजाब से हैं, ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचाने का काम शुरू कर दिया है. टीम द्वारा भोजन, दवाइयाँ और आश्रय उपलब्ध कराया जा रहा है. बचाव कार्यों में नावों का उपयोग कर कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया है.

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पेड़ की छांव में बैठी महिला स्कूल परिसर में लिख रही है, आसपास खेलते बच्चे और तितलियां हैं, जबकि पृष्ठभूमि में युद्धग्रस्त शहर की धुंधली छवि दिखाई दे रही है।

सत्य

‘सत्य’ एक गहन और विचारोत्तेजक कविता है, जो अमन के बीच युद्ध की भयावहता, बच्चों की मासूमियत और मानव सभ्यता के क्रूर यथार्थ को सामने लाती है। यह कविता शांति, संवेदना और सत्य की खोज का मार्मिक दस्तावेज है।

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महिदपुर रोड की बहू बनी हाईकोर्ट एडवोकेट, चुनौतियों को हराकर लिखी सफलता की कहानी

महिदपुर रोड की खुशबू सिद्धार्थ कोचर ने साहस और मेहनत से हाईकोर्ट एडवोकेट बनने का सपना पूरा किया. उनकी यह कहानी महिलाओं के लिए प्रेरणा है.

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ग्वालियर में गालव म्यूजिकल ग्रुप की सुरमई शाम

गालव म्यूजिकल ग्रुप द्वारा आयोजित सुरमई शाम का कार्यक्रम इस माह भी बाल भवन में बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। हर बार की तरह इस बार भी कार्यक्रम में आम जनता की पसंद के नगमों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे श्रोता झूम उठे। कार्यक्रम का संचालन आशी, प्रतिभा दुबे और वर्षा श्रीवास्तव ने किया।

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