कालू का दर्द  

कालू कुत्ते की कहानी

516 ,साँईनाथ कालोनी . सेठीनगर उज्जैन . -( म.प्र.)

हमेशा खुश रहने वाले कालू कुत्ते को उदासी लिए असमय घर आया देख उसकी मां मिल्की ने पूछा -‘ क्या बात है कालू ! रोज तो बुला बुला कर थक जाती हूँ फिर भी नहीं आता है आज अचानक और इतना उदास भी क्या किसी ने मारा तुझे?’ कालू ने बड़े ही दर्द भरे शब्दों मे अपने मन की व्यथा प्रगट की .’ माँ ! जिस हवेली के बाहर मे बैठा करता था आज रात मे जो कुछ  मैने देखा उससे मेरा मन बहुत दुखी हो गया ‘

‘ ऐसा क्या देखा तू ने वहाँ ?” माँ ! वहाँ मेरे जैसे कई कुत्ते और नौकर चाकर पलते है लेकिन एक छोटी सी गुड़िया को वे कपड़े मे लपेट अंधेरे मे कहीं दूर छोड़ आये कोई इंसान इतना निर्दयी हो सकता है मै तो सोच भी नहीं सकता उस बेचारी ने उनका क्या बिगाड़ा था .

बताओ माँ ? उसकी बात सुन मिल्की की भी आँखों मे आँसू आ गये और भारी गले से बोली-‘ बेटा ! हमारे लिए तो  बच्चे , बच्चे ही होते है लेकिन वो इंसानों की दुनिया है . वहाँ बच्चे लिंग भेद के साथ  वैध और अवैध होते हैं ‘  माँ द्वारा बच्चों को लेकर बताई गई परिभाषा को समझने मे कालू स्वयं को असमर्थ पा रहा था.

                 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *