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सौतेले पिता को गले लगाती भावुक बेटी, पारिवारिक प्रेम का मार्मिक दृश्य

पापा

“पापा” एक ऐसी मार्मिक कहानी है जिसमें एक छोटी बच्ची अपने असली पिता के जाने के बाद सौतेले पिता को स्वीकार नहीं कर पाती। दर्द, तकरार और मासूम भावनाओं के बीच अंततः रिश्ते का सच्चा रूप सामने आता है।

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जंगल में झरने के पास बैठे एक युवक और चट्टान पर खड़ी पहाड़ी महिला, दोनों के चेहरों पर गहरा दर्द और भावनात्मक जुड़ाव

पीर की नदी

बहुत देर तक जंगल में भटके कृष की थकान झरने की कल-कल में घुलने लगी। तभी चट्टान पर झुकी एक पहाड़ी औरत दिखी। उसकी आँखों की पीड़ा कृष को अपनी लग रही थी। वे दोनों अलग भाषाएँ बोलते थे, पर दर्द की भाषा एक थी। इशारों और टूटे शब्दों के बीच दोनों अपनी-अपनी चुप चीखें उँडेलते रहे। वह भार, जो दिलों पर चट्टान बना बैठा था, धीरे-धीरे पिघलता चला गया। उस पल उन्हें समझ आया कि पीर को भाषा नहीं चाहिए .वह तो गूंगी होती है, पर हर अंग से बोलती रहती है।

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कालू कुत्ते की कहानी

  कालू का दर्द  

कालू नाम के कुत्ते की यह मार्मिक कहानी समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। एक हवेली के बाहर रहने वाला कालू जब एक मासूम बच्ची के साथ हुई निर्दयता देखता है, तो उसका मन व्यथित हो उठता है। उसकी मां मिल्की के शब्द इंसानों की दुनिया की कठोर सच्चाई को सामने लाते हैं जहां बच्चे भी भेदभाव का शिकार होते हैं। यह कहानी संवेदनाओं को झकझोरने वाली एक गहरी सामाजिक टिप्पणी है।

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