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इसी तरह सोचो

यह कविता जीवन और संघर्ष की कठिनाइयों में महिलाओं को आत्मनिर्भर और साहसी बनने का संदेश देती है। कविता में बताया गया है कि जैसे लोहा आग में पिघलकर भी अपनी ताकत नहीं खोता, वैसे ही महिलाओं को भी कठिन परिस्थितियों में अपने साहस और आत्मविश्वास को बनाए रखना चाहिए। ‘बिटिया’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जीवन के जंगल में जिंदा रहने के लिए हिम्मत, धैर्य और साहस आवश्यक हैं।

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सिंहस्थ 2028 में उज्जैन पहुंचने से पहले रोकी जाएंगी ट्रेनें, रेलवे की नई रणनीति

सिंहस्थ 2028: उज्जैन स्टेशन से पहले रोकी जाएंगी ट्रेनें

आगामी सिंहस्थ 2028 को लेकर रेलवे ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। इस बार फोकस केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नहीं, बल्कि भीड़ नियंत्रण और यात्री प्रबंधन पर है। इसी के तहत उज्जैन मुख्य स्टेशन पर दबाव कम करने के लिए ट्रेनों को शहर के बाहर ही रोकने की योजना बनाई गई है।

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रात में बालकनी में बैठा एक व्यक्ति हाथ में चाय लिए किसी प्रिय स्त्री को याद करते हुए भावुक भाव में शहर की रोशनियों को देख रहा है।

बालकनी की उस रात में तुम…

रात की खामोशी, अधूरी चाय और बालकनी में बैठा एक व्यक्ति जो एक ऐसी स्त्री को याद कर रहा है, जिसने उसे सिखाया कि सपनों को जिम्मेदारियों के बीच भी जिंदा रखा जा सकता है।

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प्रेम की राह पर सरकारी ब्रेक

गुजरात सरकार प्रेम विवाह और घर से भागकर शादी करने वाले जोड़ों के लिए विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को और सख्त करने की तैयारी में है. प्रस्तावित नियमों के तहत अब ऐसे विवाहों का पंजीकरण क्लास-2 अधिकारी की मंजूरी से ही हो सकेगा, जबकि अब तक यह प्रक्रिया क्लास-3 अधिकारी यानी तलाटी के स्तर पर पूरी हो जाती थी.

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भीड़भरी भारतीय सिटी बस में एक कॉलेज लड़की गर्भवती मजदूर महिला को सीट पर बैठा रही है, जबकि अन्य यात्री शर्मिंदा नजर आ रहे हैं।

शर्मिंदा

“शर्मिंदा” एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो समाज की संवेदनहीनता और दिखावटी व्यवहार पर गहरा प्रहार करती है। बस में खड़ी एक गर्भवती मजदूर महिला को कोई सीट नहीं देता, लेकिन कुछ युवाओं का व्यवहार कॉलेज लड़कियों के आते ही बदल जाता है। तभी एक समझदार लड़की इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए महिला को सीट पर बैठा देती है। यह छोटी-सी घटना बड़े सामाजिक संदेश के साथ सामने आती है। कहानी बताती है कि सम्मान रूप देखकर नहीं, जरूरत देखकर देना चाहिए। यह लघुकथा पाठकों को आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है।

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रसोई में काम करती एक भारतीय माँ, चेहरे पर थकान के बावजूद संतोष और ममता की मुस्कान, परिवार के प्रति समर्पण और त्याग को दर्शाता भावनात्मक दृश्य।

माँ होना ही कठिन लगा

माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।

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आजन्म बिछोह

इस बार की यात्रा वैसी नहीं थी जैसी पहले हुआ करती थी। न तस्वीरें देखीं, न डायरी लिखी — मन एक अजीब उचाट, थका और शून्य में डूबा हुआ है। जूड़े के फूलों के बीच अब एक जोड़ी उदास आँखें महसूस होती हैं, जो स्मृतियों की तरह टंगी रह गई हैं। हर बार की तरह यह यात्रा आनंद नहीं, बल्कि एक सैलाब छोड़ गई — भावनाओं का, बिछोह का, और उस प्रेम का जो चुपचाप आता है और सब बहा ले जाता है। इस बार आषाढ़ केवल मौसम नहीं, एक डूबती आत्मा का रूप बन गया है। न प्रतीक्षा है, न वचन, न कोई सहारा — बस एक अंतहीन दूरी, जहाँ अगली मुलाकात की कोई संभावना नहीं। इस प्रेम की परिणति नहीं, केवल आजन्म बिछोह ही लिखा है।

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सौतेले पिता को गले लगाती भावुक बेटी, पारिवारिक प्रेम का मार्मिक दृश्य

पापा

“पापा” एक ऐसी मार्मिक कहानी है जिसमें एक छोटी बच्ची अपने असली पिता के जाने के बाद सौतेले पिता को स्वीकार नहीं कर पाती। दर्द, तकरार और मासूम भावनाओं के बीच अंततः रिश्ते का सच्चा रूप सामने आता है।

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बारिश भरी शाम में शांत भाव से अपने दोस्त को समझाती और मुस्कुराकर देखती एक संवेदनशील भारतीय युवती।

पार्थ कहने वाली लड़की

यह लेख एक ऐसे अनमोल रिश्ते की भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ एक लड़की “पार्थ” कहकर केवल पुकारती नहीं, बल्कि टूटते हुए मन को साहस, अपनापन और पहचान भी देती है।

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Pune Grand Tour 2026 Stage 2 race on Sinhagad Road with cyclists competing for yellow jersey

सिंहगढ़ रोड की चढ़ाइयों ने बदली रेस की तस्वीर

सिंहगढ़ रोड की चढ़ाइयों ने Pune Grand Tour 2026 के स्टेज-2 को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया। 105.3 किमी की रेस में ल्यूक मुडग्वे ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की।

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