
सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
स्लेट, पेम और पानी.. इन सबसे जुड़ी एक मासूम-सी बात आज भी याद आते ही होंठों पर मुस्कान आ जाती है. बात उन दिनों की है. तब स्कूल जाना अभी-अभी शुरू हुआ था. मैं बहुत छोटा था और मेरी बड़ी बहन.. जीजी. मुझे अपने साथ स्कूल ले जाया करती थीं. वे अपनी कक्षा में जातीं और मैं अपनी. सरकारी स्कूल था, इसलिए कक्षाएँ पास-पास थीं और जीजी की नज़र मुझ पर बनी रहती थी.
उस समय तक घर में हम स़िर्फ दोनों ही भाई-बहन थे. सुधा और सुनील का जन्म बाद में हुआ. एक दिन मेरी कक्षा के शिक्षक स्कूल नहीं आए. कक्षा सूनी थी और बच्चों की शरारतों से शोर इतना बढ़ गया कि आवाज़ें दूसरी कक्षाओं तक पहुँचने लगीं. जीजी घबरा गईं. वे मुझे पकड़कर अपनी कक्षा में ले आईं.
अचानक बड़ी कक्षा में बैठना मेरे लिए बहुत डरावना था. मैं चुपचाप बैठ गया. जीजी की सहेलियाँ मुझसे बात करने लगीं, पर मुझे समझ ही नहीं आता था कि क्या जवाब दूँ. बस सिर झुकाए बैठा रहता.
कुछ देर बाद मुझे प्यास लगी. दो बार ऑफिस से पानी मंगवाकर पिलाया गया. और यहीं से एक नई मुसीबत शुरू हो गई. मुझे ज़ोर की सुसू लगने लगी. लेकिन इतनी बड़ी कक्षा में, इतने सारे बच्चों के बीच बोलने की हिम्मत नहीं हुई. शर्म के मारे चुपचाप बैठा रहा. प्रेशर बढ़ता गया और मेरी नन्ही-सी सहनशक्ति जवाब दे गई.
जो नहीं होना चाहिए था, वही हो गया. निकर में ही सुसू निकल गई. टाट-पट्टी भीग गई और पानी धीरे-धीरे कक्षा के सीमेंट के फर्श तक फैल गया. शर्म से बचने के लिए मैंने एक भोली-सी चाल चली. बस्ते में रखी पानी की शीशी जिसे हम तब पानी पोता कहते थेउसे तोड़ दिया, ताकि सबको लगे कि पानी गिर गया है. लेकिन बच्चों की आँखें बहुत तेज़ होती हैं. लाख कोशिश के बाद भी सच्चाई छिप न सकी. सब समझ गए कि असल माजरा क्या है. उस दिन बहुत शर्म आई थी.लेकिन आज, इतने वर्षों बाद, जब उस नन्हे-से बच्चे की मासूम चालाकी याद आती है, तो मन हँस पड़ता है.बचपन भी क्या गज़ब की चीज़ होता है. जहाँ गलती भी मुस्कान बनकर याद रह जाती है.

मासूम बचपन करता था मासूम शरारतें
आपकी कहानी पढ़कर याद आ गई सेम स्थिति थी मेरे एक छात्र की.. बच्चों ने उसका मजाक बना था कई दिन वो स्कूल नहीं आया था। फोन करके मैंने बहुत समझाया तब जाकर स्कूल आना हुआ उसका। बच्चों की मासूमियत की कई अनुभव है कुछ मेरे अपने और मेरे छात्रों की। सच में याद आते हैं होठों पर मुस्कुराहट आ जाती है।
बहुत-बहुत धन्यवाद आपका.. आप इसी तरह मार्गदर्शन करती रहें.
बचपन की बातें मतलब मासूमियत भरा पिटारा 👌👌