मैं लिखने बैठी हूँ – भावनाओं और रचनात्मकता पर आधारित हिंदी कविता

मैं लिखने बैठी हूँ

“मैं लिखने बैठी हूँ” एक भावनात्मक हिंदी कविता है जिसमें कवयित्री अपने मन में उमड़ते विचारों, जीवन के अनुभवों, प्रेम, प्रकृति और स्मृतियों को शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता आत्मा की आवाज़ और संवेदनाओं की गहराई को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है।

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आसरा

पने भीतर के अदृष्ट संसार और भावनाओं की गहराई को व्यक्त करती हैं। यह कविता यादों, अनुभवों और उन कहानियों की प्रतीक है जो हमारे मन में ठहरी रहती हैं—जैसे कवियों की स्मृतियाँ, वर्जीनिया का मौन, मीरा का विस्मय और अजनबी महिलाओं की अधूरी चिट्ठियां। इस अदृश्य संसार के बीच, कवयित्री अपने विचारों को हर रात धीरे-धीरे खो देती हैं, जैसे कोई ज्योत अपने ही प्रकाश से थक गई हो। अंततः, एक प्रिय व्यक्ति की निस्पंद धड़कनों में मिलने वाला आसरा उसे थके हुए मन को सहारा देने और हृदय का भार साझा करने की अनुभूति कराता है।

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14 घंटे की मेहनत, फिर भी चेहरे पर मुस्कान

अनदेखी नायिका: लक्ष्मी भोइर

यह कहानी है पालघर की लक्ष्मी गोपाल भोइर की, जो पिछले 30 वर्षों से हर दिन सुबह 2 बजे उठकर मंडी से ताज़ी सब्ज़ियाँ लाती हैं और मुंबई में बेचती हैं। 14 घंटे की कड़ी मेहनत के बावजूद उनके चेहरे पर मुस्कान और दिल में संतोष है। यह लेख उन अनदेखी महिलाओं की मेहनत और आत्मसम्मान को उजागर करता है, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है। जानिए एक साधारण दिखने वाली महिला की असाधारण जीवन यात्रा।

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ग्लोबल सोलर एक्सपो में आनंद पोरवाल की सक्रिय भूमिका

इंदौर के होटल शेरेटन में 17 व 18 दिसंबर को आयोजित ङ्गइंदौर ग्लोबल सोलर एक्सपो एवं सूर्यकॉन कॉन्फ्रेंस2025फ में देशभर की नामी सोलर कंपनियों ने अपने नवीन सोलर उपकरणों और तकनीकों का प्रदर्शन किया. इस दो दिवसीय भव्य आयोजन में सोलर सोल्यूशन कंपनी, उदयपुरमहिदपुर रोड, रतलाम ने भी अपना प्रभावी स्टॉल लगाकर विजिटर्स को आधुनिक सोलर उत्पादों की जानकारी दी.

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कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

काली राख की बस्ती

कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

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सांझ के समय सुनसान रास्ते पर खड़ा एक अकेला व्यक्ति, बिछड़ते प्रेम और यादों के दर्द को दर्शाता हुआ दृश्य

तुम खो गए हो

यह ग़ज़ल एक ऐसे प्रेम की कहानी कहती है, जो साथ चलते-चलते कहीं खो गया। इसमें यादों की टीस, अधूरी मुलाकातें और इश्क़ की सच्चाई को बेहद मार्मिक तरीके से व्यक्त किया गया है। हर पंक्ति दिल के किसी कोने को छू जाती है और पाठक को अपने अनुभवों से जोड़ देती है।

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नींद

यह कविता अनिद्रा की उस गहरी अवस्था को चित्रित करती है, जहाँ शरीर थक चुका होता है लेकिन मन लगातार सक्रिय रहता है. रात भर जागती सोच, तकिये के नीचे दबी अनकही बातें और स्थिर घड़ी की सुइयाँ जीवन की थकान और मानसिक बोझ को प्रतीकात्मक रूप में सामने लाती हैं. सुबह होने पर भी रात का जागना भीतर बना रहना, आधुनिक मनुष्य की मानसिक बेचैनी को सशक्त रूप से व्यक्त करता है.

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महाकाल मंदिर उज्जैन में भस्म आरती के दौरान श्रद्धालु और पुजारी

महाकाल मंदिर में होगी ‘तत्काल’ भस्म आरती बुकिंग

महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए अब ‘तत्काल’ ऑनलाइन बुकिंग की नई व्यवस्था लागू हो गई है। श्रद्धालु एक दिन पहले सुबह 8 बजे स्लॉट बुक कर सकेंगे, जबकि ऑफलाइन परमिशन पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत 200 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिससे लंबी कतारों से राहत मिलेगी।

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सोफे पर साथ बैठी माँ और बेटी का भावुक चित्र, माँ को समर्पित हिंदी कविता का दृश्य।

मैं परछाईं माँ की

“मैं परछाईं माँ की” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें माँ के संघर्ष, संस्कार, प्रेम और आशीर्वाद को बेटी की भावनाओं के माध्यम से खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।

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वो गाँव की कच्ची सड़क…

गाँव के बदलते स्वरूप और उसमें आने वाले शहरीकरण की भावनात्मक तस्वीर पेश करती है। कच्ची सड़कें अब काली, चौड़ी और बदल चुकी हैं, दोनों तरफ हरियाली से लहलहाते खेत अब दुकानों और व्यावसायिक स्थलों में बदल गए हैं। गाँव के लोग और उनकी सरल जीवनशैली धीरे-धीरे शहरी अंदाज़ और मुखौटे में बदल रही है। सुनार की जगह ज्वैलर्स, भड़भूजे और चने की जगह पॉपकॉर्न जैसी चीजें गाँव में जगह लेने लगी हैं। जबकि यह विकास और सुविधा का प्रतीक है, कवि अपने पुराने प्यार और ग्रामीण सादगी को याद करता है और मन में कचोट अनुभव करता है।

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