
इलासिंह, प्रसिद्ध लेखिका, लखनऊ
वो गाँव की कच्ची सड़क
अब बिल्कुल बदल गई है
काली नागिन सी बलखाती
रस्ते में पसर गई है ।
दोनों तरफ उसके जो
खेत लहलहाते थे
पक्के मकान भी
इक्के-दुक्के नजर आते थे ।
उन खेतों में अब …
दुकानें निकल आई हैं
कुकुरमुत्तों सी ‘शहरियत’
खेतों में उग आई है ।
दुकानों पे चमकते हैं
साइनबोर्ड रंग-रंगीले
हो रहे बदलाव के
देते हैं वो हवाले ।
सुनार की जगह अब
ज्वैलर्स हो गए हैं
भड़भूजे के चने-चबैने
पाॅपकाॅर्न हो गए हैं ।
अच्छा है विकास …फिर क्यों
मन कचोटता है
आदी था जिसका मन
शायद वो प्यार खो गया है ।
निगाहें ढूँढ़ती है
कुछ बाकी बचे निशान
गाँवों में आ गया बड़ी
तेजी से ‘शहरी मिजाज ‘।
चेहरों ने अब वहाँ भी
मुखौटे पहन लिए हैं
घर के दरवाजे तो खुले हैं
पर दिल बन्द कर लिए हैं ।।

सही चित्रण किया आपने
आभार 🙏🏻
आपने मुझको मेरे गांव के याद दिला दी। अब गांव में वो पहले वाली बात नहीं रहेगी। शहर से फिर भी काफी शांत है।
Nise
Very true..
आभार 🙏🏻
विकास छीन लेता है विनाश कहीं
मंजिलो को पता नहीं छोड आये मुकाम कहीं
मानसदर्पण
बहुत सुंदर चित्रण।
सुनार की जगह अब
ज्वैलर्स हो गए हैं
भड़भूजे के चने-चबैने
पाॅपकाॅर्न हो गए हैं।👌
शानदार प्रस्तुतिकरण।
आभार 🙏🏻
बहुत बहुत धन्यवाद
गाँव कि कच्ची सङक का बहुत ही सुंदर वर्णन व चित्रण किया है
बहुत बहुत आभार
मन के अन्दर तिलमिलाती रचनाएं शांति प्रदान करती है,
Bahut sundar kavita apne gaon ke shehrikaran ka khubsurat chitran.. 🙏
Apka bhai Ruvi Singh
सभी पाठकों का आभार-अभिनंदन, आप
इसी तरह उत्साहवर्धन करते रहें
-सुरेश परिहार, एडिटर, लाइव वॉयर न्यूज
Too good
Simply amazing.