फोन पर माता-पिता से तलाक पर बहस करती महिला, भावनात्मक पारिवारिक संघर्ष का दृश्य।

बसा बसाया घर

‘बसा-बसाया घर’ एक ऐसी मार्मिक लघुकथा है, जिसमें बेटी अपने तलाक के फैसले पर अडिग रहती है। माता-पिता उसे समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बातचीत के दौरान वह उनके अतीत का ऐसा सच सामने रख देती है, जिससे दोनों निरुत्तर हो जाते हैं। कहानी रिश्तों में विश्वास, दोहरे मापदंड और आत्मसम्मान जैसे गंभीर विषयों को उजागर करती है। यह कथा बताती है कि दूसरों को सलाह देना आसान है, लेकिन जब सच सामने आता है तो अपने ही बनाए मूल्य टूट जाते हैं।

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जन्म एक मां का…

बच्चे का जन्म केवल एक नए जीवन का आगमन नहीं होता, बल्कि उसी क्षण एक औरत का भी पुनर्जन्म होता है — एक मां के रूप में। मातृत्व का यह चमत्कार औरत के भीतर प्रेम, त्याग और जिम्मेदारी की एक नई दुनिया खोल देता है। जैसे-जैसे बच्चा सीखता है, वैसे-वैसे मां भी सीखती है; यही जन्म का दूसरा चमत्कार है — एक मां का अवतरण।

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जब आता था कलाई करने वाला: पीतल के बर्तनों की यादें”

महिदपुर रोड की गलियों में, कलाई करने वाला अपनी भट्टी और चमकीले पीतल के बर्तनों के साथ आता था। तपेली, डेकची और लोटे—हर बर्तन उसकी कला की छाप लिए होते थे। बच्चों की जिज्ञासा, धुएँ की हल्की गंध और भट्टी की आंच—सब कुछ बचपन की यादों में अमिट छाप छोड़ गया। यह केवल बर्तनों की कहानी नहीं, बल्कि उस समय की जीवनशैली, रिश्तों और परंपरा की सजीव झलक है।

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भारतीय शादी का पारंपरिक मंडप और अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में विवाह समारोह

खरमास समाप्त, अब शुरू होंगे मांगलिक कार्यों के शुभ दिन

खरमास की समाप्ति के साथ 14 अप्रैल से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. इस बार 20 अप्रैल की अक्षय तृतीया सबसे खास मानी जा रही है, जिसे अबूझ मुहूर्त के रूप में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.

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बलात्कार के केस की धमकी तीन युवकों से वसूली भारी रकम

,सोशल मीडिया पर पहचान बढ़ाकर एक युवती ने युवक को अपने घर बुलाया और उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया. इसके बाद बलात्कार का झूठा केस दर्ज करने की धमकी देकर उससे पौने दो लाख रुपये वसूले. जब उसने ५ लाख रुपये की मांग पूरी नहीं की तो उसके खिलाफ बलात्कार और एट्रोसिटी का गंभीर मामला दर्ज कर दिया गया. हैरान करने वाली बात यह है कि इसी तरह इस युवती ने नांदेड़ और कंधार के दो अन्य युवकों के खिलाफ भी बलात्कार और अट्रोसिटी का मामला दर्ज करवाया है.

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एक भावुक जोड़ा, अधूरी मुलाकात का प्रतीक, शांत वातावरण में खड़ा हुआ

जब तुम आओ…

जब कोई मिलने आए, तो वह अधूरा नहीं, पूरा होकर आए—यही इस कविता का मूल भाव है। यह रचना बताती है कि आधे मन और बंटी हुई भावनाओं के साथ सच्चा समर्पण संभव नहीं होता। प्रेम तभी पूर्ण होता है, जब उसमें किसी प्रकार की कमी या विभाजन न हो।

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रेशम के धागों से बाजार तक

सेंट्रल रेलवे की पहल से महाराष्ट्र के रेशम किसानों को एशिया के सबसे बड़े रेशम कोकून बाजार रामनगरम तक सीधी पहुंच मिली है. संगठित रेल परिवहन से किसानों को बेहतर दाम, कम लागत और गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल रही है.

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विश्व में हिंसा और होली के विरोधाभास को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य

जब रंग हुए लाल

यह कविता विश्व में फैलती हिंसा, नकली व्यवहार और टूटते मानवीय मूल्यों पर तीखा प्रश्न उठाती है। होली और रमज़ान जैसे पावन अवसरों के बीच खून-खराबे की विडंबना को उजागर करती एक मार्मिक सामाजिक रचना।

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झुकी हुई रीढ़ के प्रतीक के रूप में लोकतंत्र, चुनावी रैली, भीड़ और मंच पर खड़े नेता का व्यंग्यात्मक दृश्य

लोकतंत्र की झुकी हुई रीढ़

लोकतंत्र आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ उसकी रीढ़ भीड़ और दिखावे के बोझ तले झुकती नजर आती है। चुनावी रैलियाँ संवाद नहीं, शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन गई हैं, जहाँ नागरिकों को गिना जाता है, समझा नहीं जाता। जनकल्याणकारी योजनाएँ अधिकार नहीं, बल्कि चुनावी उपहार की तरह परोसी जा रही हैं। इस पूरे परिदृश्य में मतदाता धीरे-धीरे ग्राहक में बदलता जा रहा है। फिर भी उम्मीद कायम है जब जनता सवाल पूछती है और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है, तभी लोकतंत्र की झुकी हुई रीढ़ फिर से सीधी होने लगती है।

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