शायद माँ आयी है
‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।

‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।
कात्रज स्थित मनपा के राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय की ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली को नागरिकों से उत्तम प्रतिसाद मिल रहा है. ऑनलाइन बुकिंग सेवा शुरू होने के बाद अर्थात पिछले दो वर्षों में इस सुविधा के माध्यम से उद्यान का दौरा करने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है. १ जनवरी २०२४ से दिसंबर २०२५ के कालखंड में लगभग ५ लाख ४४ हजार ६३ पर्यटकों ने उद्यान की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा का लाभ लिया. इस माध्यम से उद्यान प्रशासन को लगभग २ करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है
“एक नायाब संदूक” केवल एक कविता नहीं, बल्कि स्मृतियों का ऐसा कोमल संसार है, जहाँ बचपन की शरारतें, यौवन के सपने और माँ का स्नेह एक साथ सिमट आते हैं। इस कविता में संदूक एक प्रतीक बनकर उभरता है वह स्थान जहाँ जीवन के सबसे अनमोल क्षण सुरक्षित रहते हैं।
एक सस्पेंस और इमोशनल हिंदी कहानी रीता मिश्रा तिवारी भागलपुर लाइट ऑन करने पर देखा तो दरवाजे पर गिरी पड़ी थी शेफाली..!आवाज़ लगाई पर कोई हरकत नहीं। पानी का छींटा मारा..!” क्या कर रही पागल हो गई है..जगा दिया कितना प्यारा सपना देख रही थी”हड़बड़ा कर उठ बैठी शेफाली। “थैंक गॉड मेरी तो जान ही…
दिल एक स्थायी ठिकाना नहीं है, यह किसी मुसाफ़िर का डेरा है। कभी यह ठहर जाता है, तो कभी अचानक कहीं और निकल पड़ता है। इसमें रुकने का कोई नियम नहीं है—यह क्षणिक है, चंचल है। इंसान सोचता है कि दिल अब सुकून पाएगा, किन्हीं भावनाओं में ठहर जाएगा, मगर अगले ही पल यह फिर चल पड़ता है, नई राहों की तलाश में। जैसे कोई मुसाफ़िर यात्रा के बीच कहीं विश्राम करता है और फिर सुबह होते ही अगले पड़ाव की ओर निकल जाता है, वैसे ही दिल भी है—कभी आता है, कभी ठहरता है और फिर चुपचाप आगे बढ़ जाता है।
यह कविता धैर्य और perseverance का संदेश देती है। जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, समय, लगन और सही प्रयास से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। कवि ने साधारण उदाहरणों — पक्षियों का धीरे-धीरे नीड़ बनाना, पर्वत चढ़ाई, अर्जुन की वीरता — के माध्यम से समझाया है कि धैर्य एक ऐसा गुण है, जो अंततः सफलता और फल की प्राप्ति कराता है। यह कविता आत्म-प्रेरणा और मानसिक दृढ़ता की भावना को गहरे रूप में उजागर करती है।
“माँ के आगमन का पैगाम” एक सुंदर और भावपूर्ण भक्ति कविता है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के आगमन की खुशी और आध्यात्मिक ऊर्जा को व्यक्त करती है। इस कविता में प्रकृति और मानव जीवन के बीच के उस गहरे संबंध को दर्शाया गया है, जो माँ के आगमन के साथ नवजीवन और उत्साह से भर उठता है।
सर्दियों की परतों में लिपटा एक आदमी, और उसी सड़क पर नंगे पाँव खड़ा एक बच्चा हितेश। कुछ ही सवालों में उसकी पूरी दुनिया खुल जाती है: शराब में डूबे पिता, रजाइयाँ बेचती माँ, स्कूल से कोसों दूर सपने, और नीम के नीचे गुज़ारी हर रात। ठिठुरन उस बच्चे की नहीं, उस आदमी की आत्मा में घुसती है, जो अपनी जैकेट उतारकर भी खुद को नग्न महसूस करता है। हितेश की मासूमियत जैकेट पर डियो छिड़ककर “आपसे बदबू नहीं आएगी” कहना उसकी गरीबी से कहीं ज़्यादा क्रूर है।
“स्मृति नाद” अपूर्वा की ऐसी काव्य कृति है, जो स्मृतियों, रिश्तों और भावनाओं के गहरे संसार को सजीव करती है। इसमें मां, पिता और बचपन से जुड़ी अनुभूतियां इतनी सजीव हैं कि पाठक केवल पढ़ता नहीं, बल्कि उन्हें जीने लगता है।
‘विलुप्त श्रोता’ एक मार्मिक मुक्तछंद कविता है, जो मनुष्य के भीतर जमा होते दर्द, भावनात्मक थकान और ऐसे समय की विडंबना को उजागर करती है जहाँ सुनने वाले लोग धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं।