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पुणे की महिलाओं ने बनाया नया वर्ल्ड रिकॉर्ड

पुणे के गणेशोत्सव को और भी यादगार बनाते हुए ढोले पाटील शैक्षणिक संस्था ने एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. संस्था के अध्यक्ष सागर उल्हास ढोले पाटिल के नेतृत्व में, सर्वाधिक नागरिकों ने एक साथ दीप जलाकर आरती की और नया विश्वविक्रम स्थापित किया. खास बात यह रही कि आरती करने वाली सभी महिलाएं थीं
इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित सरयू आरती समिति का वह पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया जिसमें दिवाली पर सबसे अधिक लोगों ने एक साथ दीपों से आरती की थी

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चाँदनी रात में डायरी पर लिखी प्रेम ग़ज़ल, पास में रखा फाउंटेन पेन और हल्की रोशनी

ग़ज़ल

“तिरी पलकों के साये में” एक भावपूर्ण हिंदी ग़ज़ल है जो प्रेम की नज़ाकत, रिश्तों की अहमियत, इल्म की रोशनी और माँ-बाप के अनकहे दर्द को बेहद संवेदनशील अंदाज़ में प्रस्तुत करती है। हर शेर जीवन की सच्चाई से रूबरू कराता है।

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गाँव के आँगन में अपनी छोटी भांजी के साथ बैठा एक स्नेही मामा, उसे कलम बनाना सिखाते हुए, ग्रामीण परिवेश में प्रेम, सुरक्षा और बचपन की यादों से भरा भावनात्मक दृश्य।

बेचन मामा

मुन्नी शायद पाँच साल की थी जब पहली बार उसे मामा के घर भेजा गया। बचपन से ही माता-पिता से दूर रहकर उसने बड़े लोगों के साए में अपना जीवन काटा — कभी बड़ी अम्मा के यहाँ, तो कभी बुआ के पास। पर मुन्नी के जीवन में सबसे कोमल, सबसे निर्मल प्रेम अगर किसी ने उसे दिया तो वो थे बेचन मामा। बेचन मामा के घर में मुन्नी ने पहली बार वो स्नेह पाया जो शायद एक बच्चा माँ-बाप से चाहता है। उनके साथ वह खेलती, रूठती, मनाती और उनके साये में हर डर भूल जाती।

बेचन मामा के बनाए कंडों की कलमों से लिखते हुए उसकी पटरी सबसे चमकती थी, और मामा की सिखाई हुई सुंदर लिखावट में उसका नाम लिखा जाता था। समय के साथ मुन्नी ने जाना कि बचपन में जो छाया उसे मिली, वह सामान्य नहीं थी — वह तो प्रेम की पराकाष्ठा थी, जो हर किसी के हिस्से में कहाँ आती है।

पन्द्रह साल बाद जब वह फिर मामा के घर लौटी, तो उसकी आँखें नम थीं, लेकिन दिल भरा हुआ — मामा की वही मुस्कान, वही स्नेह और वही अपनापन देखकर। उसने मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना की — “हे ईश्वर, हर बच्ची को एक बेचन मामा जरूर मिले

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पल्लवी रानी का काव्य संग्रह ‘चितचोर’ विमोचित

मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित काव्य संग्रह ‘चितचोर’ के लोकार्पण अवसर पर साहित्यकारों ने कवयित्री पल्लवी रानी की कविताओं को भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा बताया। डॉ. हरि जोशी ने उनकी रचनाओं में दिनकर और दुष्यंत कुमार की प्रतिध्वनि अनुभव करते हुए उन्हें भविष्य की सशक्त काव्य-सम्भावना बताया।

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जागरण को जी रही हूँ…

“जागरण को जी रही हूँ, याद को प्रहरी बनाकर… मैं अब दर्द को मुस्कुराकर आज़माना चाहती हूँ। भोर की आसावरी में चेतना के छंद लिखना, सरित की लहरों के साथ प्यास के अनुबंध रचना और अनमनी यामिनी को चाँद का झाँसा दिखाना… यही अब जीवन का नया संकल्प है। चार दिन की ज़िन्दगी को प्यार से सजाना, नफ़रत को मात देना और हर मुश्किल को आसान बनाना—बस यही है मेरी नई यात्रा का उद्देश्य।”

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जिंदगी के सुख-दुख, हार-जीत और जीवन दर्शन को दर्शाती प्रेरणादायक हिंदी कविता

जिंदगी का सच

हार और जीत, सुख और दुख, प्रेम और घृणा—जिंदगी इन सभी भावों का संगम है। यह कविता जीवन के इसी सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है और हमें सिखाती है कि कर्म, सरलता और परमार्थ के मार्ग पर चलकर ही जीवन के पलों को सार्थक बनाया जा सकता है।

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वो भी इंसान है… बस कह नहीं पाता।

वो पुरुष

“वो पुरुष” एक गहरी और संवेदनशील कविता है, जो पुरुष के जीवन में छिपे संघर्ष, जिम्मेदारियों और अनकही भावनाओं को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि मजबूती के पीछे भी एक थका हुआ और संवेदनशील दिल होता है।

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विजया गार्डन जमशेदपुर में सावन महोत्सव के दौरान महिलाओं का उत्सव

सावन के रंग में रंगा विजया गार्डन, झूम उठीं महिलाएं

जमशेदपुर के विजया गार्डन में सावन महोत्सव के दौरान महिलाओं ने गीत-संगीत, नृत्य और रंग-बिरंगे परिधानों के साथ जमकर उत्सव मनाया। पूर्णिमा साहू की मौजूदगी ने कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई।

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जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते जैन मुनिराज और श्रद्धापूर्वक उपस्थित श्रद्धालु।

मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान है, इसे व्यर्थ न गंवाएं

नागदा में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज श्री डॉ. संयमरत्न विजय जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान दुर्लभ है। उन्होंने जिनेंद्र भक्ति, वैरभाव त्याग और आत्मा को निर्मल बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म को जीवन का वास्तविक मार्ग बताया।

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बारिश में अपने अंडों को बचाती चिड़िया, मां के निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक

जब तूफान से लड़ी एक मां

मां का प्रेम निस्वार्थ और अटूट होता है। एक छोटी सी चिड़िया, जो तेज बारिश और तूफान में भी अपने अंडों की रक्षा के लिए अडिग खड़ी रही, हमें ममता का सच्चा अर्थ समझाती है। यह भावनात्मक अनुभव हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इंसानों में भी ऐसा ही निष्काम प्रेम मौजूद है।

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