दौड़ते-दौड़ते कहीं ज़िंदगी पीछे न छूट जाए
प्रतिस्पर्धा, पैसा कमाने की होड़ और डिजिटल दुनिया ने इंसान को अपनों से दूर कर दिया है. ऐसे में जरूरी है कि हम भागती जिंदगी से थोड़ा वक्त निकालें, रिश्तों को समय दें और तनाव के बजाय सुकून को चुनें.

प्रतिस्पर्धा, पैसा कमाने की होड़ और डिजिटल दुनिया ने इंसान को अपनों से दूर कर दिया है. ऐसे में जरूरी है कि हम भागती जिंदगी से थोड़ा वक्त निकालें, रिश्तों को समय दें और तनाव के बजाय सुकून को चुनें.
यह कविता शीत ऋतु के सजीव और मानवीय चित्रण को प्रस्तुत करती है, जहाँ सूरज भी रजाई ओढ़े प्रतीत होता है. ठंडी हवाएँ, पहाड़ों की बर्फ, अलाव की गर्माहट, तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू और धूप की कोमल मुस्कान मिलकर सर्द मौसम का एक जीवंत, आत्मीय और सौंदर्यपूर्ण दृश्य रचती हैं.
Budget 2026 में बड़ा बदलाव-अब इनकम टैक्स में गलती पर जेल नहीं होगी। NRI और मिडिल क्लास को राहत, सिर्फ जुर्माना देकर मामला खत्म।
“प्रभु का प्रसाद” एक सुंदर भक्ति कविता है जिसमें ईश्वर से आशीर्वाद, प्रेम, सुख और मंगल विचारों की कामना की गई है। यह रचना मानव जीवन में भक्ति, करुणा और सकारात्मकता का संदेश देती है।
यह लेख एक हास्य-व्यंग्य शैली में लिखा गया आत्मकथन है, जिसमें लेखक अपनी असफलता का कारण मज़ाकिया अंदाज़ में पत्नी को ठहराते हैं। वह बताते हैं कि जवानी में यदि पत्नी ने उनके प्रस्ताव पर तुरंत “हाँ” न कहा होता, तो उनके भीतर “दिल टूट रस”, “बेचारा रस” और “मजनूं रस” उमड़ते और वे शायरी, कविताएँ व लेखों के माध्यम से एक बड़े लेखक बन जाते। मगर पत्नी ने उन्हें प्रेम-पत्र लिखने या भावुक कविताओं में ढलने का कोई अवसर ही नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि लेखक के भीतर मौजूद सारे “रस” वातावरण के अभाव में बाहर ही नहीं निकल पाए। लेख हल्के-फुल्के हास्य, नोकझोंक और आत्मव्यंग्य के माध्यम से यह संदेश देता है कि जीवन की दिशा और रचनात्मकता अक्सर निजी परिस्थितियों और रिश्तों से प्रभावित होती है।
वह केवल एक स्त्री नहीं, बल्कि अनगिनत रूपों का संगम है दर्द को आँखों में समेटे हुए भी अडिग खड़ी। वह चौखट की मर्यादा भी है और जीवन की हर जिम्मेदारी का आधार भी। कभी दुर्गा बनकर शक्ति का प्रतीक बनती है, तो कभी मीरा बनकर भक्ति में विलीन हो जाती है। उसके भीतर द्रौपदी की प्रतिज्ञा है, पद्मिनी का त्याग है और झांसी की रानी सा साहस भी। वह मौन रहकर भी बहुत कुछ कहती है, सहनशीलता में भी आग समेटे रहती है। वही मां है, वही बेटी और उसी से इस संसार की हर कहानी, हर रिश्ते और हर अस्तित्व की शुरुआत होती है।
राघव जयपुर में और रिद्धिमा भोपाल में रहती है, लेकिन दूरी उनके रिश्ते के बीच कभी नहीं आई। एक ऑनलाइन साहित्यिक मंच से शुरू हुई उनकी दोस्ती धीरे-धीरे एक ऐसे आत्मिक जुड़ाव में बदल गई, जिसे किसी नाम की जरूरत नहीं थी। दोनों एक-दूसरे को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं। यह कहानी बताती है कि हर गहरा रिश्ता प्रेम नहीं होता, कुछ रिश्ते विश्वास, सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा पर टिके होते हैं। आज की Gen Z भाषा में इसे प्लैटोनिक सोलमेट कहा जा सकता है।
जयपुर एयरपोर्ट से चेन्नई जाने वाली इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट के अचानक रद्द होने से बुधवार को यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-5362 को ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए अंतिम समय पर कैंसिल कर दिया गया. यह फ्लाइट सुबह 9.55 बजे जयपुर से रवाना होकर दोपहर 12.35 बजे चेन्नई पहुंचने वाली थी.
कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते ज़िंदगी को नया जन्म दे जाते हैं। यह कहानी उन सच्चे दोस्तों को समर्पित है, जिन्होंने हर कठिन दौर में साथ देकर हिम्मत, उम्मीद और जीने का साहस दिया। अगर आपकी ज़िंदगी में भी ऐसे दोस्त हैं, तो यह लेख उनके नाम ज़रूर साझा करें।