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दौड़ते-दौड़ते कहीं ज़िंदगी पीछे न छूट जाए

आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव से दूर परिवार के साथ समय बिताता व्यक्ति मोबाइल और भागदौड़ से कुछ देर दूर होकर अपनों के साथ बिताया समय ही असली सुकून दे सकता है.

सुरेखा अग्रवाल

आज की व्यस्ततम जीवनशैली, जीने के तरीके और प्रतिस्पर्धा के साथ आगे बढ़ने की होड़, अथाह पैसा कमाने की चाह और आधुनिक होता मानव. इंसानी ज़िंदगी को छोड़कर मशीनी ज़िंदगी की तरफ रुख. एकांत से जूझता, रिश्तों से दूर होता आज का समाज.

प्रतिस्पर्धा के इस युग में इंसान डिजिटल होता जा रहा है. मोबाइल में कैद रिश्तों से वह पल भर तो खुशी हासिल कर सकता है, पर जब वह वास्तविक दुनिया में लौटता है, तो सिर्फ एकांत से जूझता है. नतीजा—अवसाद और तनाव.

अपनों को खोता, समय के हिसाब से जी-तोड़ मेहनत करता है, पर उसके मुताबिक उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार प्रतिशत उसके मुताबिक नहीं होता. नतीजा—तनाव.

आज छोटे से बड़े तक सभी तनाव में हैं. चाहे वह विद्यार्थी हो, नौकरी-पेशा हो या साधारण गृहिणी.

समय के अनुसार माहौल भी बदला है. असुरक्षा, अराजकता, सत्ता, आतंकवाद और स्त्रियों पर होते अपराध. हम सभी किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं.

हम मनुष्य ही नहीं, पूरा तबका गंभीर मसलों से जूझ रहा है. और उतना ही हम तनावपूर्ण माहौल में खुद को स्थापित करने की भरसक कोशिश में लगे हैं.

व्यस्ततम ज़िंदगी में शांति मानो है ही नहीं. ऐसे में हमें चाहिए कि इस भागदौड़ से खुद के लिए वक्त निकालें. रिश्तों को महत्व दें. दोस्तों, संगी-साथियों के साथ थोड़ा जिएँ. शायद एकांत को मात देने में हम सक्षम हो जाएँ.

संतुलित खान-पान, थोड़ा व्यायाम, थोड़ी कसरत, थोड़ा योग. थोड़ा परिवार के साथ मेल-जोल और तनाव कम. बातचीत का दायरा अपनों से बढ़ाना होगा. एक स्वच्छंद हँसी को मुकाम मिलेगा. हम हँसेंगे, जग हँसेगा. नतीजा—तनाव कम.

बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार, शिक्षा को लेकर थोड़ी कम सख्ती. और हाँ, थोड़ा बच्चा बनना होगा. नतीजा—बच्चों में अवसाद की कमी.

हम एक-दूसरे के मित्र बनें, यकीनन तनाव कम होगा. संगीत को माध्यम बनाकर ज़िंदगी को गुनगुनाकर देखिए, ज़िंदगी नाच उठेगी.

मोबाइल और डिजिटल उपकरणों को थोड़ी देर के लिए कहीं दूर छुपा दें, ठीक उसी तरह जैसे हमने रिश्तों को दरकिनार किया था. फिर देखिए, अपनों से मिलने का सुख. उस मुस्कान की सेल्फी… 👌 आहा!

यही चंद तरीके हैं मेरी नज़र में, जो तनाव से मुक्त कर सकते हैं हम सभी को.

जिएँ, खूब जिएँ, खुलकर मुस्कुराइए. रिश्तों और मित्रों का दायरा बढ़ाइए. और हाँ, ज़िंदगी पल भर की है, यह याद रखते हुए आज और अभी को साकार करें.

हम हैं तो ज़िंदगी है.

तनाव को मिलकर खत्म करें. खुश रहें और मुस्कुराइए.

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