स्त्री की वाणी

नारी शक्ति का प्रतीक भारतीय महिला, जिसमें दुर्गा, मीरा और रानी लक्ष्मीबाई के रूपों की झलक दिखाई दे रही है

अंशु गुप्ता, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

मैं हूं स्त्री की वाणी ,
आंखों से कहूं दर्द का पानी,

चौखट से दरवाजे की दस्तक हूं,
चरण श्री के और में ही मस्तक हूं,

सती का सत और मंदोदरी का कथ हूं,
मैं स्त्री की वाणी हूं ,
न मै कोई बेचारी हूं,

मै ही दुर्गा , मैं ही भवानी ,
मैं ही रानी झांसी की हूं,

पद्मिनी का त्याग कहो और मैं ही द्रोपदी की प्रतिज्ञा हू,
मैं ही अम्बर और धात्री हूं,

मैं स्त्री की वाणी हूं,साथ ही अग्निपरीक्षा हूं,

मै ही हर एक जिम्मेदारी,
मुझ से ही दुनियादारी हूं,
मै ही जगदंब और विन्ध्वासिनी हूं,
मै स्त्री की वाणी हूं,
एक मौन कहानी हू,

अहिल्या का शिला ,
पांचाली के खुले केश हूं,
हरिनाम शीश धरा ,
मै ही शिरोमणि मीरा हूं,
मैं ही कर्मा और उर्मिला हूं,
मै स्त्री की वाणी हूं,
युद्ध की मर्दानी हूं,
रासमणि और समय अनसूया का हूं,

मै ही अल्ता और कुंजीकस्तला हूं,
मांडवी और श्रुतकीर्ति का त्याग।
मै स्त्री की वाणी हूं,
मै ही मां और मैं ही बेटी हूं।..


अंशु गुप्ता
समकालीन हिंदी काव्य जगत की एक सशक्त और संवेदनशील स्वर हैं, जिनकी रचनाओं में भाव, भक्ति और सामाजिक चेतना का सुंदर संगम दिखाई देता है। प्रहरी मंच, महिला काव्य मंच और चैतन्य काव्य मंच से सक्रिय रूप से जुड़ी अंशु गुप्ता वर्तमान में दर्जिलिंग इकाई में सचिव के रूप में अपनी साहित्यिक भूमिका निभा रही हैं।उनकी कविताएँ प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘दैनिक विश्वमित्र’ में नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं तथा लिट्ररी सोसाइटी की ‘पोलिग्लोट’ पत्रिका में भी उनकी रचनाएँ सराही गई हैं।
पश्चिमबंग हिंदी अकादमी, खबर समय द्वारा ‘कलमकार 2024’, मोहन लाल जैन सम्मान, विद्यापति मंच और सिलीगुड़ी लिटररी सोसाइटी जैसे विभिन्न मंचों से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. सत्या होप टॉक के मंच पर उनका काव्य पाठ प्रसारित हो चुका है और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कविताओं की प्रस्तुति दे चुकी हैं। स्त्री विमर्श, भक्ति और पौराणिक कथाओं को केंद्र में रखकर लिखी गई उनकी रचनाएँ पाठकों के मन में गहरी छाप छोड़ती हैं। काव्य लेखन के साथ-साथ अध्ययन, नृत्य, चित्रकला और मंच संचालन में उनकी गहरी रुचि है, जो उनकी रचनात्मकता को और अधिक समृद्ध बनाती है।

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3 thoughts on “स्त्री की वाणी

  1. स्त्री का वास्तव यथार्थ आपने अपनी कविता में उजागर किया है 👏🏻💖

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