Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
डाइनिंग टेबल पर साथ बैठे परिवार के सदस्य, लेकिन सभी मोबाइल में व्यस्त, पीछे अकेले बैठे बुजुर्ग।

सब साथ हैं… फिर भी अकेले

आज घरों में सुविधाएँ बढ़ गई हैं, लेकिन रिश्तों में समय और अपनापन कम होता जा रहा है। यह लेख सिर्फ संयुक्त परिवारों के टूटने की नहीं, इंसानों के भीतर बढ़ते अकेलेपन की कहानी है।”

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खिड़की के पास शांत बैठी एक भारतीय महिला, चेहरे पर हल्की उदासी, पीछे धुंधला पारिवारिक माहौल और जिम्मेदारियों का प्रतीक दृश्य।

वो हँसती थी… अब चुप रहती है

“वो लड़की जो छोटी-छोटी बातों पर हँसती थी, धीरे-धीरे जिम्मेदारियों के बोझ तले चुप होना सीख गई।
यह सिर्फ एक स्त्री की कहानी नहीं, उन अनगिनत लड़कियों की सच्चाई है जो सबकी बनते-बनते खुद को कहीं पीछे छोड़ देती हैं।”

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भारतीय तिरंगे के साथ खड़ा एक जागरूक युवा, पीछे सोलर ऊर्जा, भारतीय पहाड़, रेगिस्तान और शहर का दृश्य।

देश संग खड़े रहो

“जब देश कठिन दौर से गुजरता है, तब छोटी-छोटी बचत भी बड़ा योगदान बन जाती है।
यह कविता एकजुटता, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की प्रेरक आवाज़ है।”

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मंच पर ग़ज़ल पढ़ता एक शायर, पीछे चमकते सितारे और गंभीर साहित्यिक माहौल का दृश्य।

ग़ज़ल

कलम जब तलवार बन जाए, तब ग़ज़ल सिर्फ़ इश्क़ नहीं करती… सच भी कहती है।यह ग़ज़ल खुद्दारी, संघर्ष, साहित्य की सियासत और मोहब्बत के बदलते मायनों पर तीखा लेकिन संवेदनशील प्रहार करती है।”

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CBSE बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने पर मुस्कुराती हुई छात्रा स्तुति जैन।

स्तुति जैन ने हासिल किए 91 प्रतिशत अंक

महिदपुर रोड की स्तुति जैन ने आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल नागदा से CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा में 91 प्रतिशत अंक प्राप्त कर परिवार और नगर को गौरवान्वित किया है।

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कार्यशाला में शामिल विद्यार्थी और विशेषज्ञ, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर चर्चा करते हुए।

हेरिटेज से शिक्षा का संगम

राजकीय महाविद्यालय पनारसा में आयोजित 7 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम में भारत सहित कई देशों के प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।

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मंद मुस्कान के साथ खड़ी एक युवती, जिसकी आँखों में बचपन और प्रेम की मासूम यादें झलक रही हैं।

लम्हा

कुछ रिश्ते उम्र नहीं, एहसास जीते हैं। “लम्हा” कविता सोलह-सत्रह की मासूमियत, बचपन की खुशबू और प्रेम की कोमल मुस्कुराहटों को बेहद संवेदनशीलता से उकेरती है।

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गाँव की पगडंडी पर स्कूल बैग लेकर मुस्कुराती हुई एक मासूम बालिका, संतोष और सादगी का प्रतीक।

संतुष्ट मुस्कान

अधूरी इच्छाओं और भागती जिंदगी के बीच सच्ची संतुष्टि कहाँ मिलती है? “संतुष्ट मुस्कान” कविता एक मासूम बालिका की मुस्कान में जीवन का गहरा दर्शन खोजती है।

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रात की खामोशी में डायरी के सामने बैठी एक भावुक स्त्री, अधूरी मोहब्बत और अनकहे सवालों में डूबी हुई।

मन का कोरा पन्ना

कुछ प्रश्न जीवन में हमेशा अनुत्तरित रह जाते हैं। “मन का कोरा पन्ना” प्रेम, पीड़ा, विवशता और अनकहे एहसासों की ऐसी ही संवेदनशील यात्रा है, जहाँ शब्दों से अधिक खामोशी बोलती है।

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रंग-बिरंगे फूलों से भरा सुंदर बगीचा, जिसकी खुशबू और प्राकृतिक सुंदरता मानसिक शांति का अनुभव करा रही है।

फिर छिड़ी बात फूलों की….

फूल प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार हैं, जो सौंदर्य, सुगंध और भावनाओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। उनकी खुशबू न केवल रिश्तों में मिठास घोलती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करती है।

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