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महंगाई

आज की महंगाई ने जीवन को बहुत मुश्किल बना दिया है। हर चीज़ की कीमत बढ़ गई है और आम आदमी का घर चलाना कठिन हो गया है। पहले जो छोटी-सी चीज़ें आसानी से मिल जाती थीं जैसे मोटर या भिंडी . अब उन्हें खरीदना भी मुश्किल हो गया है। तेल न होने पर खाना बनाना भी मुश्किल हो जाता है और परेशानियाँ बढ़ जाती हैं। लोग पूछते हैं तो कुछ कह नहीं पाते, और ना पूछें तो मन में ही दुःख बढ़ता रहता है। महंगाई की मार से जीवन इतना जटिल हो गया है कि इसे अनदेखा करना भी मुश्किल है।

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डाकिया डाक लाया

जब मोबाइल और ई-मेल नहीं थे, तब खत ही रिश्तों की धड़कन हुआ करते थे। पोस्टकार्ड से लेकर लिफाफे तक, हर पत्र में सिर्फ़ खबर नहीं, पूरा जीवन लिखा होता था। यह कहानी उसी इंतज़ार, उस स्याही और उन भावनाओं की है, जो आज भी दिल को भिगो देती हैं।

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“पूर्णिमा की रात समुद्र किनारे चाँदनी में चमकती लहरें, शांत वातावरण में भावनात्मक गहराई का दृश्य”

लहरें…

यह कविता शांत चित्त और गहरी भावनाओं को चाँद और समुद्र की लहरों के माध्यम से व्यक्त करती है, जहां मिलन की तड़प और प्रकृति का अद्भुत संबंध झलकता है।

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गर्मियों में प्यासे परिंदों के लिए एक संजीवनी प्रयास

जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे न केवल इंसान, बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. ऐसे समय में कुछ समाज सेवकों द्वारा किया गया यह छोटा सा लेकिन अत्यंत संवेदनशील कार्य न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि मानवता की एक सुंदर मिसाल भी है.

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हिंदी में हँसी, हिंदी में प्यार

आज हिंदी दिवस पर सबको याद दिलाएँ – अंग्रेज़ी नहीं, अपनी प्यारी हिंदी बोलें! बात करें, हँसी-मज़ाक करें और इसे दिल से अपनाएँ। क्योंकि हिंदी है हमारी भाषा, हमारी पहचान।”

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“किताब”

किताबें सचमुच खुशनसीब होती हैं। हर कोई उन्हें खोलकर पढ़ना चाहता है, उनकी गहराइयों तक उतर जाना चाहता है। मगर हम… हम तो अपनी ज़िंदगी यूँ ही किताबों से बातें करते हुए गुज़ार देते हैं। पता नहीं, हमारी अपनी गहराइयों को समझने वाला कौन होगा…और कब आएगा…जो हमें भी किसी किताब की तरह ध्यान से पढ़ सके, और हमारी ख़ामोश निगाहों में छिपे अर्थों को समझ पाए।

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दो छोटी सहेलियाँ एक-दूसरे का हाथ थामे मुस्कुराती हुईं, सच्ची दोस्ती, विश्वास और अपनत्व का भावनात्मक दृश्य।

सच्चे दोस्त

कुक्कू को लगता था कि झिलमिल हर बात पर उसे रोकती-टोकती है, लेकिन एक घटना ने उसे सच्ची दोस्ती का असली अर्थ समझा दिया। यह प्रेरणादायक बाल कहानी मित्रता, विश्वास और साथ निभाने के मूल्य को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है।

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डिब्बे वाले

“सब की भूख का हिसाब रखने वाले, अपनी भूख को कैसे दबा कर रख पाते होंगे?”
यह पंक्ति डिब्बे वालों के जीवन की मार्मिक विडंबना को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ दर्शाती है — वे जो दूसरों की भूख मिटाते थे, स्वयं भूखे रह गए।

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साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. का महिदपुर रोड में भव्य मंगल प्रवेश

साध्वी शाश्वतप्रिया म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश

महिदपुर रोड में साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश। गुरुदेव जयघोष, धर्मसभा और रतलाम चातुर्मास निमंत्रण।

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