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अपने परिवार के साथ खड़े एक स्नेही और संघर्षशील भारतीय पिता का भावपूर्ण दृश्य, जो प्रेम, त्याग, सुरक्षा और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है।

पिता का प्रेम

पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की नींव, विश्वास का स्तंभ और त्याग का दूसरा नाम हैं। प्रस्तुत है पिता के प्रेम, संघर्ष और समर्पण को समर्पित एक हृदयस्पर्शी कविता।

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कोलकाता में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली का दृश्य, जहाँ बड़ी संख्या में लोग राजनीतिक झंडों और बैनरों के साथ नेताओं का संबोधन सुन रहे हैं। चुनावी माहौल, जनउत्साह और लोकतांत्रिक गतिविधियों को दर्शाता यथार्थवादी चित्र।

बंगाल की चुनावी रैली

बंगाल की चुनावी रैली एक व्यंग्यात्मक कविता है, जिसमें चुनावी नारों, राजनीतिक टकराव, जनभावनाओं और बंगाल की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को रोचक एवं मंचीय अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है।

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यादें

यह भावपूर्ण हिंदी कविता बिछड़ने के बाद भी जीवन के हर कोने में जीवित रहने वाली यादों की कहानी कहती है। प्रेम, स्मृतियों और विरह की संवेदनशील अभिव्यक्ति।

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चाँदनी रात में प्रेमी की यादों में खोया एक शायर, इश्क़ और मोहब्बत की भावनाओं से सराबोर दृश्य

इश्क़ का सुरूर

इश्क़ के सुरूर, यादों की शमा और मिलन की मधुर प्रतीक्षा को शब्दों में पिरोती यह ग़ज़ल प्रेम की गहराइयों को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त करती है। हर शेर दिल की धड़कनों, निगाहों की भाषा और मोहब्बत की अनकही दास्तान कहता है।

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स्वर्णिम प्रभात की सुनहरी किरणें जब धरती को आलोकित करती हैं, तब प्रकृति का हर कण जीवन, सौंदर्य और नवचेतना का संदेश देता है

स्वर्णिम प्रभात

स्वर्णिम प्रभात की सुनहरी किरणों से आलोकित यह कविता प्रकृति के अनुपम सौंदर्य, पक्षियों के मधुर कलरव, उषा की मनोहारी लालिमा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह रचना प्रकृति के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और संरक्षण की भावना जागृत करती है।

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एक भारतीय महिला पारंपरिक घर की देहरी पर आत्मविश्वास के साथ खड़ी है।

नारी की गरिमा

यह कविता नारी के जीवन-संघर्ष, त्याग, सहनशीलता और आत्मसम्मान को स्वर देती है। समाज की चुनौतियों के बीच अपनी गरिमा बनाए रखने वाली स्त्री के अदम्य साहस का भावपूर्ण चित्रण करती है।

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यशोधरा आधी रात के शांत राजमहल में अपनी गोद में शिशु राहुल को लिए खड़ी हैं। उनकी आँखों में गहरा दर्द, अकेलापन और आत्मसम्मान झलक रहा है। खिड़की से आती चांदनी उनके चेहरे को प्रकाशित कर रही है, जबकि पृष्ठभूमि में खुला द्वार सिद्धार्थ के प्रस्थान का प्रतीक है। दृश्य त्याग, विरह, मातृत्व और आंतरिक शक्ति की मार्मिक अनुभूति कराता है।

सुनो बुद्ध…

यह कविता यशोधरा के दृष्टिकोण से बुद्ध के संन्यास पर प्रश्न उठाती है। प्रेम, कर्तव्य, गृहस्थ जीवन और आत्मकल्याण के बीच के द्वंद्व को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है।

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भीड़भाड़ वाले भारतीय शहर के बाज़ार में ट्रैफिक जाम के बीच खड़ी एक महिला मुस्कुराते हुए अपने आसपास की चहल-पहल को देख रही है। सड़क पर वाहन, दुकानदार, राहगीर और बाजार की हलचल दिखाई दे रही है, जो अपने शहर के प्रति अपनापन, जीवंतता और जीवन के उत्साह को दर्शाती है।

खोया हुआ शहर

विदेश की सुव्यवस्थित और मशीनी जिंदगी छोड़कर अपने शहर की भीड़, जाम, बिजली कटौती और जीवंत हलचल में लौटने वाली एक महिला की कहानी। यह कथा बताती है कि जीवन केवल सुविधाओं का नाम नहीं, बल्कि उन धड़कनों का भी नाम है जो हमें अपनेपन का एहसास कराती हैं।

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धुंधले सांध्य वातावरण में एक भारतीय महिला अकेली खड़ी है। उसके पास दलदल में खिला एक कमल दिखाई दे रहा है, जो देह और आत्मा के संघर्ष का प्रतीक है। पृष्ठभूमि में चट्टानें, बहता जल और धुंध आत्मबोध, तन्हाई और अस्तित्व की गहन यात्रा को दर्शा रहे हैं।

प्राण प्रतिष्ठा

प्राण प्रतिष्ठा” एक गहन प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें देह, आत्मा, यथार्थ और तन्हाई के बीच संघर्ष को सशक्त बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। यह रचना मनुष्य के अस्तित्व, आत्मबोध और भीतर सुलगती मौन पीड़ा की मार्मिक पड़ताल करती है।

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सूर्योदय की सुनहरी रोशनी में एक भारतीय माँ अपने वयस्क बच्चे के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ रखे खड़ी है। दोनों के चेहरे पर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता झलक रही है। पृष्ठभूमि में हरे-भरे खेत, खिले हुए फूल और शांत आकाश दिखाई दे रहे हैं, जो मातृत्व, त्याग, संरक्षण और जीवन की प्रेरणा का प्रतीक हैं।

ममता सागर

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, प्रेरणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप है। यह भावपूर्ण कविता ईश्वर के सबसे अनमोल उपहार “माँ” के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करती है।

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