ममता सागर

सूर्योदय की सुनहरी रोशनी में एक भारतीय माँ अपने वयस्क बच्चे के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ रखे खड़ी है। दोनों के चेहरे पर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता झलक रही है। पृष्ठभूमि में हरे-भरे खेत, खिले हुए फूल और शांत आकाश दिखाई दे रहे हैं, जो मातृत्व, त्याग, संरक्षण और जीवन की प्रेरणा का प्रतीक हैं।

नीलम पेड़ीवाल, जमशेदपुर (झारखंड)

हे ईश्वर! तूने जो अनमोल उपहार मुझे दिया,
माँ ने ही दी जीवन, जिसको हर क्षण हमने जिया।

करें क्या बखान अपने शब्दों में हम,
माँ के आँचल से शुभता भी होती नम।

जीवन में नित्य प्रेरणा, माँ तुम ही तो हो,
इस जगत् में मेरा सर्वस्व तुम ही तो हो।

तूने हर निर्णय पर साथ मेरा दिया,
मेरे सपनों को भी तूने पूरा किया।

स्वावलंबी बनकर जीना सिखाया,
कर्तव्य-पथ पर चलना सिखाया।

शुभेच्छा मेरी बस, तेरी छवि बन जाऊँ मैं,
तेरे हर त्याग पर बलिहार हो जाऊँ मैं।

प्रभु ने इतना प्यारा उपहार हमें दिया,
जिसका नाम है—

“माँ”

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