सुनो बेटा, एक बात जान लो
उम्र के साथ माँ के कदम भले धीमे हो जाएँ, लेकिन बेटे से उसका अपनापन कभी कम नहीं होता. यह कविता उसी माँ की छोटी-छोटी उम्मीदों और अनकहे प्रेम की कहानी कहती है.

उम्र के साथ माँ के कदम भले धीमे हो जाएँ, लेकिन बेटे से उसका अपनापन कभी कम नहीं होता. यह कविता उसी माँ की छोटी-छोटी उम्मीदों और अनकहे प्रेम की कहानी कहती है.
पैंतीस साल से माँ से दूर रहने के बावजूद उनके कुछ पुराने रुमाल आज भी माँ के स्पर्श, दुलार और आश्वासन का एहसास कराते हैं. ‘माँ के ये रुमाल’ माँ-बेटी के अटूट रिश्ते की मार्मिक कविता है.
‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।
“मैं परछाईं माँ की” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें माँ के संघर्ष, संस्कार, प्रेम और आशीर्वाद को बेटी की भावनाओं के माध्यम से खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
“माँ का आँचल” एक भावनात्मक कविता है जो माँ के प्रेम, ममता और त्याग को सरल और सुंदर शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हर पाठक को अपनी माँ की याद दिलाती है
“एक नायाब संदूक” केवल एक कविता नहीं, बल्कि स्मृतियों का ऐसा कोमल संसार है, जहाँ बचपन की शरारतें, यौवन के सपने और माँ का स्नेह एक साथ सिमट आते हैं। इस कविता में संदूक एक प्रतीक बनकर उभरता है वह स्थान जहाँ जीवन के सबसे अनमोल क्षण सुरक्षित रहते हैं।
‘माँ तेरा आँचल’ कविता माँ के स्नेह, ममता और सुरक्षा के उस भावलोक को चित्रित करती है जहाँ आँचल ही संसार बन जाता है। यह रचना बचपन की स्मृतियों और मातृत्व की गरिमा को सरल शब्दों में जीवंत कर देती है।