
सुनो बेटा, एक बात जान लो,
मेरे बालों में बादलों का रंग है, जान लो।
मुझे उम्र ने छू लिया है,
मेरे दोनों पैरों में दर्द है,
मेरे कदम धीमे हो गए हैं।
कभी थोड़ा चलते वक्त मेरा हाथ पकड़ लेना,
ठीक वैसे, जैसे बचपन में मैंने तुम्हारा पकड़ा था।
कभी पूछ लेना बेटा,
“एक कप चाय पियोगे?”
भूख या प्यास न होने पर भी,
तब मेरा दिल ठंडा हो जाएगा,
दिल की धड़कन शायद तब सामान्य गति से चलेगी।
ताना मारकर बातें मत करना।
तुम्हारी तुलना में हम बहुत कुछ नहीं जानते,
पर तुम भी बहुत-सी बातों में आज भी अबोध बच्चे हो।
कभी तुम्हें अपने हाथों से भात खिला दूँगी,
उसी में मेरी खुशी का एक हिस्सा है।
कभी अपनी थाली से एक कौर मुझे भी देना, मेरी माँ की तरह।
तुममें ही मैं अपना खोया हुआ छठा सुख ढूँढूँगी।
