सुनो बेटा, एक बात जान लो
उम्र के साथ माँ के कदम भले धीमे हो जाएँ, लेकिन बेटे से उसका अपनापन कभी कम नहीं होता. यह कविता उसी माँ की छोटी-छोटी उम्मीदों और अनकहे प्रेम की कहानी कहती है.

उम्र के साथ माँ के कदम भले धीमे हो जाएँ, लेकिन बेटे से उसका अपनापन कभी कम नहीं होता. यह कविता उसी माँ की छोटी-छोटी उम्मीदों और अनकहे प्रेम की कहानी कहती है.