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माँ तेरा आँचल…

माँ तेरा आँचल – हृदयस्पर्शी हिंदी कविता

मेघा अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, नागपुर

माँ, तेरा आँचल ही मेरा संसार है,
तू ही मेरी माँझी, तू ही मेरी पतवार है।
धूप हो, छाँव हो आँचल मुझे उड़ाती है,
भूख लगने पर आँचल में मुझे छुपाती है।
मुख हो जाए मैला तो आँचल से पोंछ जाती है।

माँ, तेरा आँचल ही मेरा संसार है,
तू ही मेरी माँझी, तू ही मेरी पतवार है।
गर्मी में आँचल से हवा कर गर्मी भगाती है,
ठंड में आँचल उढ़ाकर तपन दिलाती है।
बीमार हो जाऊँ तो आँचल से सहलाती है।

माँ, तेरा आँचल ही मेरा संसार है,
तू ही मेरी माँझी, तू ही मेरी पतवार है।
खेलकर आऊँ तो पसीना आँचल से सुखाती है,
गरम दूध का गिलास आँचल से पकड़ाती है।
सामान लाने को सिक्का आँचल की गाँठ से दे जाती है।

माँ, तेरा आँचल ही मेरा संसार है,
तू ही मेरी माँझी, तू ही मेरी पतवार है।
नज़र न लग जाए बच्चे को, तेरे आँचल में समाती है।
ठोकर न लग जाए कहीं सोचकर हाथ में आँचल पकड़ाती है।
बच्चा सलामत रहे, भगवान के सामने आँचल फैलाती है।

माँ, तेरा आँचल ही मेरा संसार है,
तू ही मेरी माँझी, तू ही मेरी पतवार है।

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