Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
सूर्योदय की सुनहरी रोशनी में एक भारतीय माँ अपने वयस्क बच्चे के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ रखे खड़ी है। दोनों के चेहरे पर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता झलक रही है। पृष्ठभूमि में हरे-भरे खेत, खिले हुए फूल और शांत आकाश दिखाई दे रहे हैं, जो मातृत्व, त्याग, संरक्षण और जीवन की प्रेरणा का प्रतीक हैं।

ममता सागर

माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, प्रेरणा और समर्पण का जीवंत स्वरूप है। यह भावपूर्ण कविता ईश्वर के सबसे अनमोल उपहार “माँ” के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करती है।

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नीले आकाश, हरे-भरे जंगलों, पर्वतों, नदी और झरनों से सजा प्राकृतिक दृश्य, जहाँ एक व्यक्ति पौधा लगा रहा है। आसपास पक्षी और वन्यजीव दिखाई दे रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और धरती माता की सुंदरता का संदेश दे रहे हैं।

नीला अम्बर, स्वच्छ पवन

“नीला अम्बर, स्वच्छ पवन है” कविता प्रकृति की सुंदरता, जैव विविधता और धरती माता के प्रति मानव के कर्तव्यों को दर्शाती है। यह रचना पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का सशक्त संदेश देती है।

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पेड़ तो वही है, पर तुम बदल गए हो

मन्नत का धागा

“पेड़ तो वही है, पर तुम बदल गए हो…” प्रेम, इंतज़ार, तन्हाई और अधूरी चाहत की पीड़ा को व्यक्त करती यह कविता दिल की गहराइयों को छू जाती है। मन्नत के धागे से शुरू होकर प्रेम के दर्द तक की भावनात्मक यात्रा का मार्मिक चित्रण।

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नारी केवल शब्द नहीं, मानवता की पहचान है |

नारी

नारी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि ममता, त्याग, साहस, धैर्य और मानवता की पहचान है। यह कविता नारी के विविध रूपों और उसके अमूल्य योगदान को समर्पित है।

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गौरेया और उसके बच्चों की भावुक कहानी

मेरे घर आई एक नन्ही परी

रसोई के रोशनदान में बसे एक गौरेया जोड़े के घोंसले से निकली एक नन्ही-सी जान लेखक के जीवन का भावनात्मक हिस्सा बन जाती है। अंडे से निकलने, पंख उगने और पहली बार खुले आसमान में उड़ान भरने तक की उसकी यात्रा लेखक को अपने बच्चों के बचपन और जीवन के गहरे सत्य की याद दिलाती है। प्रकृति, मातृत्व, स्नेह और बिछड़ने की मधुर पीड़ा से सजी यह कहानी बताती है कि प्रेम का सबसे सुंदर रूप किसी को अपने पास बांधकर रखना नहीं, बल्कि उसे उड़ने की आज़ादी देना है।

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रात के समय अपने बेटे की तस्वीर को सीने से लगाकर बैठी एक वृद्ध भारतीय माँ, अकेलेपन और मातृत्व के गहरे भावों को दर्शाती हुई।

एकांत का शोर

“एकांत का शोर” एक मार्मिक कहानी है जो पिता के निधन के बाद माँ के जीवन में पसरे अकेलेपन और बेटे की व्यस्तता के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी को चित्रित करती है। जब बेटा अपनी माँ को आधी रात अपनी तस्वीर को सीने से लगाकर लोरी सुनाते हुए देखता है, तब उसे एहसास होता है कि सफलता की दौड़ में उसने सबसे अनमोल रिश्ते को अनदेखा कर दिया है।

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बरामदे के झूले पर बैठी एक भारतीय महिला बारिश के बीच मोबाइल संदेश पढ़ते हुए मुस्कुराती हुई, अनकहे प्रेम और सुकून भरे रिश्ते का एहसास दर्शाती हुई।

अहसास…

रिद्धिमा और राघव के बीच पनपते विश्वास, अपनापन और अनकहे प्रेम को बेहद संवेदनशीलता से चित्रित किया गया है। यह कहानी बताती है कि कुछ लोग जीवन में प्रेम का दावा लेकर नहीं आते, बल्कि सुकून बनकर हमारे भीतर जगह बना लेते हैं। रिश्तों की मर्यादा, भावनाओं की गहराई और आत्मीय जुड़ाव का सुंदर चित्रण इस कहानी को विशेष बनाता है।

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सांवला रंग

“सांवला रंग” एक प्रेरक लघुकथा है जो समाज में व्याप्त रंगभेद की मानसिकता पर गहरा प्रहार करती है। कहानी में एक माँ अपने जीवन में झेले गए तिरस्कार को याद करते हुए संकल्प लेती है कि उसकी बेटी की पहचान उसके रंग से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और उपलब्धियों से होगी। वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम तब सामने आता है जब उसकी बेटी आई.पी.एस. अधिकारी बनकर पूरे शहर का गौरव बन जाती है।

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पेड़ लगाते लोग, हरित प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता यथार्थवादी दृश्य।

प्रकृति बदला नहीं लेती, केवल हिसाब बराबर करती है

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह लेख प्रकृति और मानव के संबंधों पर गंभीर चिंतन करता है। इसमें बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया गया है। लेख यह संदेश देता है कि प्रकृति बदला नहीं लेती, बल्कि समय आने पर अपने साथ किए गए व्यवहार का हिसाब बराबर करती है।

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धरती माँ के प्रतीकात्मक स्वरूप के साथ वृक्षों की कटाई, सूखती नदियों और पिघलते ग्लेशियरों को दर्शाता पर्यावरण संरक्षण का यथार्थवादी दृश्य।

प्रकृति की चेतावनी

“प्रकृति की चेतावनी” धरती माँ की ओर से मानवता को दिया गया एक मार्मिक संदेश है। कविता में वृक्षों की कटाई, नदियों की दुर्दशा, पिघलते ग्लेशियर और पर्यावरण संकट की गंभीरता को उजागर किया गया है। यह रचना मनुष्य को चेताती है कि यदि समय रहते प्रकृति का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

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