माँ का आँचल
“माँ का आँचल” एक भावनात्मक कविता है जो माँ के प्रेम, ममता और त्याग को सरल और सुंदर शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हर पाठक को अपनी माँ की याद दिलाती है
समर्पण और सफलता की मिसाल: अंशिका मालवीय
गुरुकुल मानस एकेडमी की छात्रा अंशिका मालवीय ने 12वीं में 89.6% अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। उनकी यह सफलता मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है, जो अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।
उज्जैन में पहली बार सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट
धर्म और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध उज्जैन अब चिकित्सा क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है . जिले के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में पहली बार सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जाने से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई दिशा मिली है . इस उपलब्धि के साथ अब मालवा अंचल के मरीजों को जटिल उपचार के लिए इंदौर, मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा .
कोटा तक नहीं जाएगी इंदौर-कोटा एक्सप्रेस
कोटा रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ना शुरू हो गया है। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर काम जारी होने के चलते रतलाम मंडल से संचालित इंदौर-कोटा एक्सप्रेस अब 4 मई तक कोटा स्टेशन तक नहीं पहुंचेगी। यह ट्रेन सोगरिया स्टेशन तक ही जाकर वहीं से वापस लौटेगी।
मोहब्बत, खामोशी और कसक
कभी-कभी मोहब्बत शब्दों से नहीं, खामोशियों से समझ आती है। सामने वाला साथ होने का दावा करता है, लेकिन हर भीड़ में एक अजीब-सी तन्हाई घिर आती है। यादें तस्वीरों में कैद तो हो जाती हैं, मगर उनमें छिपी खाली जगह हर बार दिल को चुभती है। शायद यही इश्क़ की सच्चाई है जहाँ चाहत तो पूरी होती नहीं, और उसकी कसक हर पल साथ चलती रहती है।
अब क्या होगा…?
“रीता ने दरवाज़े की दोनों कुंडियाँ कसकर बंद कर दीं।आज उसने ठान लिया था—सच जानकर ही रहेगी। आधी रात को जब उसकी आँख खुली,
तो उसने घबराकर शेफाली के बिस्तर की ओर देखा…बिस्तर फिर से खाली था।रीता की सांसें थम-सी गईं दरवाज़ा तो अंदर से बंद था…तो आखिर शेफाली गई कहाँ?”
मैं इक किताब…
हम सबके भीतर एक कोरा पन्ना होता है, जिस पर समय और अनुभव धीरे-धीरे अपने रंग भरते हैं। इन्हीं रंगों से जीवन की कहानी बनती है. कभी खुशी, कभी अधूरी इच्छाओं के साथ। अंततः यही भावनाएँ हमें एक ऐसी किताब में बदल देती हैं, जिसे हम जीते भी हैं और समझते भी हैं।
उम्मीद
यह सुनते ही रोहित तुरंत घर के अंदर गया और अपना गुल्लक लेकर आया।उसने वह गुल्लक राहुल के पिता को देते हुए कहा,‘आप इन पैसों से राहुल का इलाज करवा दीजिए।’
यह वही पैसे थे, जिन्हें वह अपनी साइकिल खरीदने के लिए जमा कर रहा था.लेकिन उस दिन उसकी छोटी-सी सोच ने किसी के घर में बड़ी उम्मीद जगा दी।”
आत्मा का समर्पण
हिमालय की गोद में जन्मी पार्वती के मन में केवल महादेव का ही नाम बसा था। उन्होंने कठोर तपस्या और अटूट विश्वास के साथ हर क्षण शिव को पुकारा। ऋतुएँ बदलती रहीं, समय बीतता रहा, पर उनका संकल्प कभी नहीं डगमगाया।
कैलाश पर समाधि में लीन शिव के भीतर भी एक सूक्ष्म स्पंदन था, जो पार्वती की भक्ति को महसूस कर रहा था। जब दोनों की दृष्टि मिली, तो वह मिलन केवल प्रेम नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्ण समर्पण का प्रतीक बन गया जहाँ ‘मैं’ समाप्त होकर ‘हम’ का जन्म होता है।शिव और पार्वती का यह संग सृष्टि का आधार है, जो प्रेम, विश्वास और ऊर्जा का अनंत प्रकाश फैलाता है।
