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इंदौर के मानस भवन सभागार में आयोजित साहित्य सम्मान समारोह में पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल को सम्मानित करते हुए अतिथि एवं आयोजक।

पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल सम्मानित

विश्व हिंदी प्रचारिणी महासभा और यूनिक यूनिवर्सल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा इंदौर में आयोजित साहित्यिक समारोह में कवयित्री पूनम सिंह और नीलम पेड़ीवाल को उनके साहित्यिक योगदान और काव्य प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया।

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पूर्णिमा की रात वृंदावन के वातावरण में बांसुरी लिए कृष्ण और उनके सामने भावपूर्ण मुद्रा में खड़ी राधा, आध्यात्मिक प्रेम और एकात्म का प्रतीकात्मक दृश्य।

राधाकृष्ण: दो नहीं, एक भी नहीं

राधा और कृष्ण के इस काव्य-संवाद में प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मिक एकत्व और समर्पण की अनुभूति बनकर सामने आता है—जहाँ दो अस्तित्व मिलकर राधाकृष्ण हो जाते हैं

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अमलतास के सुनहरे फूलों से भरे जंगल में पीले घाघरे पहने रंगरेजन का जादुई और प्रकृतिमय दृश्य।

रंगरेजन

अमलतास के सुनहरे फूलों से भरे जंगल में रहने वाली कारीगर रंगरेजन की यह लघुकथा प्रेम, प्रकृति और रंगों के अद्भुत संबंध को उजागर करती है। एक जादुई घाघरा और अमलतास के बीजों के माध्यम से कहानी जीवन में प्रेम और हरियाली बोने का संदेश देती है।

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रात के शांत वातावरण में अकेली स्त्री, चाँदनी और स्मृतियों में डूबी भावनात्मक अनुभूति का दृश्य।

स्मृति और… तुम!

स्मृति और… तुम!’ प्रेम और अनुपस्थिति के सूक्ष्म भावों को गहरी संवेदना के साथ अभिव्यक्त करती कविता है। स्मृतियों की नमी, इंतज़ार की सीलन और भीगे सन्नाटे के बीच यह रचना बताती है कि प्रेम को अंत तक ढोने के लिए शब्द नहीं, स्मृति चाहिए।

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आदिवासी गोदना से प्रेरित धरती पर उकेरी हरियाली, जंगल, नदियाँ और वृक्षों का प्रतीकात्मक कलात्मक दृश्य।

गोदना

‘गोदना’ कविता आदिवासी परंपरा और प्रकृति के गहरे संबंध को रूपक बनाकर धरती पर जंगलों और हरियाली को स्थायी पहचान की तरह सहेजने का संदेश देती है। यह कविता पर्यावरण, स्मृति और जीवन के सौंदर्य का हरित घोषणापत्र बन जाती है।

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नौतपा की तपती दोपहर में धूप से झुलसी सड़क, गर्म हवाएं और गर्मी से बचाव के पारंपरिक पेय दर्शाता दृश्य

नौतपा

नौतपा की तपती दोपहरी, लू की मार और गर्मी से राहत के घरेलू उपाय इन सबको सरल लोकभाषा और सहज भाव में प्रस्तुत करते ये दोहे मौसम का चित्र भी उकेरते हैं और सावधानी का संदेश भी देते हैं।

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भीषण गर्मी में कमरे में चलता कूलर और राहत महसूस करता व्यक्ति, मानवीय संवेदना और पड़ोसी सहयोग का दृश्य।

करवटें बदलते रहे, सारी रात हम…

उज्जैन की भीषण गर्मी, आर्थिक मजबूरियां और बिना कूलर की बेचैन रातों के बीच एक किराएदार को भवालकर परिवार की संवेदनशीलता ऐसी राहत देती है, जो सिर्फ ठंडी हवा नहीं बल्कि इंसानियत का स्पर्श भी बन जाती है।

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खिड़की के पास बैठा उदास व्यक्ति, विरह और प्रतीक्षा के भाव दर्शाता दृश्य।

दीद उसकी

यह ग़ज़ल प्रेम, विरह और प्रतीक्षा की सूक्ष्म अनुभूतियों को शब्द देती है। मीरा, कृष्ण और स्मृतियों के प्रतीकों के माध्यम से प्रेम की पीड़ा और गहराई को सुंदर ढंग से व्यक्त किया गया है।

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मशाल थामे साथ दौड़ते लोग, एकता और सामूहिक सफलता का प्रेरक दृश्य।

अहं नहीं, वयं सत्य!

यह कविता ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा को दर्शाती है। अहंकार, प्रतिस्पर्धा और आत्ममुग्धता के बीच सहयोग, मशाल सौंपने और साथ मिलकर मंज़िल पाने का गहरा संदेश देती है।

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