हाँ, मैं एक स्त्री हूँ…
यह कविता उस स्त्री की आवाज़ है जो समाज की परिभाषाओं से परे अपनी पहचान खुद गढ़ना चाहती है। संघर्ष, आत्मविश्वास और स्वाभिमान से भरी यह रचना स्त्री-अस्तित्व की सशक्त अभिव्यक्ति है।
चलते रहने का नाम ज़िंदगी
क़तर में अकेली ज़िंदगी जी रही मान्या परिवार की जिम्मेदारियों के बीच खुद को भूल चुकी थी। तन्हाई, पुराने प्रेम की स्मृतियाँ और नए रिश्ते के डर के बीच जब जीवन ने उसे प्रेम का दूसरा अवसर दिया, तब उसे समझ आया कि चलते रहने का नाम ही ज़िंदगी है।
मंदिरों की व्यवस्था को संभालने तैयार होंगे प्रोफेशनल
उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने मंदिरों की बढ़ती आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एमबीए टैंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू किया है। ग्रेजुएट विद्यार्थी इस दो वर्षीय कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अधिकमास के कारण थमी गंगा दशहरा की रौनक
उज्जैन में गंगा दशहरा उत्सव के दौरान जूना अखाड़े ने अधिकमास के कारण पेशवाई और नीलगंगा सरोवर में होने वाले स्नान कार्यक्रम स्थगित कर दिए। हालांकि संतों ने मां शिप्रा और चिंतामन गणेश का विधिवत पूजन किया। अब केवल मां गंगा की आरती आयोजित की जाएगी।
बिल्कुल तुम्हारी तरह
पति-पत्नी के रिश्ते में तुलना, अपनापन और प्रेम की हल्की नोकझोंक को बयां करती यह भावनात्मक हिंदी लघुकथा बताती है कि हर रिश्ता अपनी अलग पहचान चाहता है।
अपनी राह: अँधेरे से उजाले तक
दूसरों के बनाए रास्तों पर चलने के बजाय अपनी मंज़िल खुद तलाशने का संदेश देती यह प्रेरक हिंदी कविता आत्मविश्वास, संघर्ष और हौसले की ताकत को खूबसूरती से व्यक्त करती है।
यात्रा, जो लौटकर भी साथ रही
हिंदी साहित्य भारती के शिर्डी अधिवेशन की यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मित्रता, आत्मीयता, जिम्मेदारियों और यादों से भरा जीवन का सुंदर अनुभव बन गई।
