एक दिन यूं ही !!
जब भीतर का रोष शब्दों में उबलने लगे और कलम ही अभिव्यक्ति का आखिरी हथियार रह जाए, तब कविता जन्म लेती है. ‘एक दिन यूं ही’ इसी बेचैनी और आक्रोश की मार्मिक अभिव्यक्ति है.

जब भीतर का रोष शब्दों में उबलने लगे और कलम ही अभिव्यक्ति का आखिरी हथियार रह जाए, तब कविता जन्म लेती है. ‘एक दिन यूं ही’ इसी बेचैनी और आक्रोश की मार्मिक अभिव्यक्ति है.
हनुमान जी को माता-पिता समान मानकर यह कविता उनके संरक्षण, दया और शक्ति की प्रार्थना करती है, जहां भक्त जीवन के दुखों से पार लगाने की विनती करता है.
स्त्री के उस अनकहे इतिहास की साक्षी है, जिसे वह नीले निशानों, झुकी आँखों और मौन सहमति के बीच ढोती रहती है। पिता से पति तक, देह से धर्म तक, वह हर भूमिका निभाती हुई अपनी इच्छाओं को अवर्जित कर देती है। अहिल्या, द्रौपदी, उर्मिला और सीता की तरह वह सदियों से अग्नि-परीक्षाओं में झोंकी जाती है फिर भी सृजन करती है, सहती है और अंत तक एक अभेद रहस्य बनी रहती है
बंगाल की राजनीति पर आधारित यह व्यंग्य सत्ता, हार-जीत, इस्तीफे और राजनीतिक नाटकों की विडंबना को हास्य और तंज के माध्यम से बेहद रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं वित्त केंद्र (आईबीएफसी) का होगा विकास पुणे/नागपुर,– नागपुर के शहरी परिदृश्य को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एन.एम.आर.डी.ए.) के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना के अंतर्गत नवीन नागपुर को एक योजनाबद्ध…
13 जुलाई, रविवार को मध्य रेल के मुंबई मंडल में विद्याविहार–ठाणे और कुर्ला–वाशी के बीच मेगा ब्लॉक लागू रहेगा। इस दौरान कई मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें डायवर्ट की जाएंगी और हार्बर लाइन की उपनगरीय सेवाएं रद्द रहेंगी। रेलवे ने यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और विशेष लोकल ट्रेनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई है।
शराब सिर्फ नशा नहीं, एक ज़हर है – जो रिश्तों को अंदर से खोखला कर देता है। आराधना की कहानी किसी फिल्म से नहीं, हमारे ही समाज से निकली सच्चाई है – जहां एक पत्नी अपने शराबी पति की मार, अपमान और बेवफाई को सालों झेलती रही, सिर्फ इसलिए कि शायद अगली बार सब ठीक हो जाएगा। लेकिन कभी नहीं हुआ। फिर भी वह लौटी… क्योंकि औरतें सिर्फ माफ नहीं करतीं, वो हर बार खुद को जोड़ती हैं – खामोशी से, टूटते हुए।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कौशल बंसल ने मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा के जीर्णोद्धार और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी आध्यात्मिक साधना, अनुभव और चमत्कारी घटनाओं से यह धाम आज एक जागृत शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है।