महिदपुर रोड जैन समाज शासन स्थापना दिवस

श्रद्धा और उल्लास से मनाया शासन स्थापना दिवस

महिदपुर रोड में जैन समाज ने वैशाख सुदी ग्यारस पर शासन स्थापना दिवस मनाते हुए श्री सुविधिनाथ जैन मंदिर में शासन ध्वज फहराया और सामूहिक आराधना की।

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 विश्वास…

जब व्यक्ति अपने विवेक पर अटूट विश्वास रखता है और परिस्थितियों से लड़ने का साहस जुटाता है, तब वह कठिन परिश्रम और अनुशासन के पालन से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। धैर्य और आशा का संबल, असफलताओं से न घबराना और सही दिशा में सतत प्रयास करना सफलता की गारंटी बनते हैं। समयबद्धता का सम्मान, ज्ञान पर भरोसा और हौसला बनाए रखना, मुश्किल घड़ियों में भी व्यक्ति को झुकने नहीं देता। अच्छे कर्मों से व्यक्ति का नाम रोशन होता है, और जब लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहता है, तो सफलता की राह स्वतः प्रशस्त हो जाती है।

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alt text: Two hands gently holding a symbolic thread representing relationships, warm emotional atmosphere, soft light, trust, balance, connection, meaningful human bond, realistic artistic scene.

रिश्तों की डोर

स्वरा सुरेखा अग्रवाल (उत्तरप्रदेश) रिश्तों की डोर दोनों ओर से मजबूत होनी चाहिए। जितने ज़्यादा रिश्ते, उतनी डोर झुकेगी। रिश्तों की गति मद्धम होनी चाहिए, फास्ट नहीं, ज़रा स्लो रखिए। गर्माहट की तपिश स्निग्ध हो, पकड़ कोज़ी हो, चाशनी कम और कड़वाहट मनमोहक—यानी संतुलन ज़रूरी है। बांधिए भी उतना कि घुटन न हो, पकड़िए भी…

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शब्दकोष बना… पर मान्यता नहीं मिली!

निमाड़ी भाषा को लोकभाषा का दर्जा दिये जाने के लिये दशकों से संघर्ष कर रहे जगदीश जोशीला (खरगोन) को इस बात का दुख है कि सरकार निमाड़ी की अनदेखी करती आ रही है। अब तक 56 से अधिक किताबों में 28 निमाड़ी भाषा में लिख चुके साहित्यकार जोशीला को भले ही इस भाषा का शब्दकोष बनाने पर पद्मश्री से सरकार ने सम्मानित किया हो किंतु उनके मन में टीस है कि मालवी सहित अन्य चार भाषाओं को तो लोकभाषा मान लिया गया लेकिन निमाड़ी आज भी बोली ही मानी जा रही है।

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जनवरी की धूप में चाय पीते हुए आत्मचिंतन करती महिला, सर्दी और मानवीय संवेदना का दृश्य

धूप, चाय और करुणा: जनवरी की सीख

“मेरी प्यारी जनवरी” एक आत्मीय और भावुक गद्य है, जिसमें सर्दियों की ठंड, धूप की मिठास, नए संकल्पों की शुरुआत और समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदना को बेहद सहज शब्दों में पिरोया गया है।

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प्रकृति के बीच बहती नदी, पलाश के फूल और जीवन के प्रवाह को दर्शाता शांत दृश्य

पल-पल जीवन

“पल-पल जीवन” कविता जीवन के निरंतर बहाव, संघर्ष और सौंदर्य को दर्शाती है। इसमें प्रकृति के माध्यम से जीवन के विभिन्न रूपों खुशी, विवशता, आशा और संघर्ष का चित्रण किया गया है। यह कविता हमें सिखाती है कि हर कठिन समय के बाद भी जीवन आगे बढ़ता रहता है और नई उम्मीदें जन्म लेती हैं।

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सुबह की सुनहरी रोशनी में हाथ में चाय का प्याला लिए एक भारतीय महिला खिड़की के पास खड़ी है। बाहर ओस से भीगे फूल, दूर पहाड़ और बहता झरना दिखाई दे रहा है। वातावरण शांत, आत्मचिंतन और निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है।

निःस्वार्थ प्रेम

‘निःस्वार्थ प्रेम’ एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो स्त्री के मौन, त्याग, धैर्य और प्रेम की गहराई को प्रकृति के सुंदर बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त करती है। यह कविता बताती है कि समय के साथ स्त्री शिकायतों से नहीं, बल्कि अनुभवों से परिपक्व होती है। वह जीवन की कड़वाहट को मुस्कान में बदलना जानती है, बंधनों को पीछे छोड़ देती है और प्रेम के उस रूप को संजोए रखती है, जिसमें अधिकार नहीं, केवल समर्पण होता है। कविता पाठक को प्रेम, आत्मबल और स्त्री के अंतर्मन की अनकही दुनिया से परिचित कराती है।

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स्वार्थ…

टूटते और जुड़ते दिल की आदत, बार-बार धोखे और छल का सामना करना, और अंततः यह समझ कि दुनिया में प्यार और वफ़ा केवल स्वार्थ के पीछे छुपे होते हैं यही इस अनुभव की सार्थकता है। पाठ में व्यक्तिगत पीड़ा और जीवन की कठोर सच्चाइयाँ एक साथ बुनी गई हैं,

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जहाँ शब्द नहीं थे, वहाँ माही थी…

माही कोई साधारण लड़की नहीं थी।वह शब्दों से पहले सिसकियाँ समझती थी।घायल पशु हों या खामोश इंसान उसका मन हर पीड़ा पर ठहर जाता।
संवेदनाएँ उसकी कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं।

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