चाय की ख़ुशबू और यादों की परतें
चाय की ख़ुशबू संग जब यादों की परतें खुलती हैं,
तो ज़िंदगी में खोया-पाया सब सामने आ खड़ा होता है।दिल अक्सर सोचता है — काश! जो चाहा था, वही मिल जाता… या ज़िंदगी एक और मौका देती।”

चाय की ख़ुशबू संग जब यादों की परतें खुलती हैं,
तो ज़िंदगी में खोया-पाया सब सामने आ खड़ा होता है।दिल अक्सर सोचता है — काश! जो चाहा था, वही मिल जाता… या ज़िंदगी एक और मौका देती।”
रात गहरी हो रही है और हवा में पारिजात की सुगंध घुल रही है। मैं जागता हूँ और कविताएँ लिखता हूँ, पर शब्द अब इस खुशबू में मदहोश होने लगे हैं। मैं रंगों की सुंदरता नहीं चाहता .मुझे तो प्रेम का वही लाल रंग चाहिए जो आत्मा को महका दे। मैं चाहता हूँ कि मैं पारिजात के आँगन की उसी मिट्टी में बो दिया जाऊँ, और वहीं लगातार महकता रहूँ। इस सिंदूरी भोर में, एक स्पर्श भर से मेरी कविता फिर जीवित हो उठी है।
महावीर अभिमन्यु भारतीय इतिहास और महाभारत का ऐसा नाम है, जो अद्भुत साहस और बलिदान का प्रतीक है। अधूरे चक्रव्यूह ज्ञान के बावजूद उन्होंने रणभूमि में अपार वीरता दिखाई। युवा अवस्था में ही अनेक महारथियों का सामना कर उन्होंने इतिहास रच दिया। यह कविता अभिमन्यु के शौर्य, संघर्ष, मातृ स्नेह, अर्जुन पुत्र होने के गौरव और अन्यायपूर्ण मृत्यु की वेदना को व्यक्त करती है। अभिमन्यु केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि साहस, कर्तव्य और आत्मबल का प्रेरणास्रोत हैं, जिनकी गाथा आज भी हर हृदय को प्रेरित करती है।
पति-पत्नी के रिश्ते में तुलना, अपनापन और प्रेम की हल्की नोकझोंक को बयां करती यह भावनात्मक हिंदी लघुकथा बताती है कि हर रिश्ता अपनी अलग पहचान चाहता है।
दशहरे के पावन अवसर पर रत्नराज ज्वेलर्स अपने नए शोरूम का उद्घाटन कर रहा है. नवदुर्गा माता मंदिर के समीप स्थित यह प्रतिष्ठान शुद्धता, विश्वास और उत्कृष्ट डिजाइनों का प्रतीक बनेगा.
रत्नराज ज्वेलर्स ने मावावाला परिवार की ईमानदारी और भरोसे की परंपरा को ज्वेलरी उद्योग में भी कायम रखा है. शोरूम में सोने और चांदी के अत्याधुनिक और पारंपरिक डिजाइनों की एक लंबी रेंज उपलब्ध है.
एक पेम में पानी पोतकर स्लेट पर अक्षर उकेरना यही तो हमारा पहला विद्यालय था। उंगलियों की पकड़, बाबूजी की बनाई लकीरों पर चलना, स्लेट का टूटना और फिर भी सीखने का हौसला… सब याद है। आज बच्चे टचस्क्रीन पर लिखते हैं, मगर हमें अक्षर पेम की खुरदरी चुभन से मिले थे। पानी पोतने से अक्षर मिटते थे, पर बचपन के सबक मन में उतनी गहराई से छप जाते थे कि आज भी स्मृतियों की स्लेट पर चमकते हैं। सच कहें तो हमने सिर्फ अ-आ नहीं सीखा था, हमने जीवन सीखा था।
रीता मिश्रा तिवारी हिंदी साहित्य की सशक्त रचनाकार हैं, जिन्होंने कविता, कहानी और लघुकथा के माध्यम से समाज को नई संवेदना और चेतना दी है।
मुस्कान जीवन की वह अनमोल शक्ति है जो कठिन परिस्थितियों में भी आशा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करती है। युवाओं के लिए यह सफलता की यात्रा का सबसे मजबूत साथी है।
“हर्षित धरा, हर्षित अंबर, कोहरे की विदाई, भौंरे और तितलियों की मुस्कान। दहकते पलाश, हरे-हरे परिधान, पीली सरसों की सजती दुकान। गेहूँ और चने की झूमती बाली, कोयल की मतवाली कूक। अमलतास की झूलती डालियाँ, फूलों की माला लिए प्रीत खड़ी है द्वार पर—सारी धरती बसंत से प्यार में डूबी हुई।”