
वर्षा गर्ग, लेखिका, मुंबई
प्रसव पीड़ा की थकान से अभी तक निढाल पड़ी गीतू,दो दिन के बेटे को लिए घर आकर भी सशंकित सी है.
कौन आएगा मायके से बेटे को देखने? मॉं तो हैं नहीं,छोटी बहन अकेली कैसे आएगी?आने-जाने का खर्चा बहुत होता है , फिर दूरी भी तो कितनी अधिक है. अभी तक शादी का कर्जा ही नहीं उतार पाए पापा, दोबारा इतना बड़ा खर्च सामने आ गया. मन में दबी-छुपी भावना थी कि काश! बेटी हो जाये…पापा को कुछ तो राहत मिलती,और फिर बड़ी होकर उसका दुख-दर्द भी बांट लेती.
पति की सर्विस वाली जगह पर ही है वो,बड़ा शहर है तो सासू मॉं भी यहीं आ गईं,पहला बच्चा है कोई जानकार साथ होना ही चाहिए्. सोच-सोच कर सिर दुखने लगा,आंखों से बहते आँसू सप्रयास छुपाए हुए बेटे को सीने से लगा लिया.
बाहर के कमरे से मॉंजी की आवाज सुनाई दी तो उधर ध्यान गया,फोन पर किसी से बात कर रही हैं,
अरे बधाई तो बनती ही है,दादी मां बन गई हूँ, बहुत अच्छा लग रहा है,बहुत प्यारा है बच्चा,और गीतू भी ठीक है.हिम्मती लड़की है,सब अच्छी तरह हो गया.अब आप आइए कभी समय निकाल कर,अच्छा लगेगा.
इसकी परेशानी बढ़ती ही जा रही है,आँखों के सामने घूम रहे हैं वे उपहार जो ननद के यहॉं बेटा होने पर भिजवाए गए थे सोना,चॉंदी,पालना,कपड़े आदि.
और उसी समय ताई सास की बातें,सब देख समझ लो बहू,अपने घर में बता देना कुछ समय बाद उन्हें भी तो यही सब करना होगा ना. कैसे कहे,पापा किस तरह व्यवस्था करेंगे?
अचानक मॉंजी अन्दर आई,मालिशवाली को साथ लिए्. अच्छी तरह मालिश करना दोनों की,सवा महीने बाद खूब बड़ा फंक्शन करूंगी,तब तक गोद में खिलाने लायक हो जाए मेरा पोता. अब वो फूट-फूट कर रो पड़ी,मॉंजी घबरा गईं.
क्या हुआ,कुछ तकलीफ है तो डॉक्टर को फोन करूं क्या?
उसने हिचकते हुए जो भी बताया सुनते ही उन्होंने गले लगा लियाबस इतनी सी बात..तुम चिंता मत करो,सोना चॉंदी तो जरूर आएगा पर बच्चे के दादा-दादी की ओर से.
आखिर तुमने भी तो हमें पोते के रूप में खरा सोना दिया है.
अब रोना बंद करो, वरना आँखें खराब हो जायेंगी.
गोद में अपने बेटे को उठाए वो अपनी दूसरी मॉं से लिपट गई,कभी न बिछड़ने के लिए..

कितनी ही बेटियों की व्यथा को बयां करती आपकी कहानी।
जी हार्दिक आभार।