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महाकाल के चरणों में धनखड़

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के आयोजित भस्म आरती में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शामिल हुए. उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर भगवान महाकाल का जाप किया और दो घंटे तक भक्ति भाव से आरती में सहभागिता की. दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि महाकाल के दरबार में आने से मन को अद्भुत शांति मिलती है और देश में सकारात्मक बदलाव की लहर दिखाई दे रही है.

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कटनी में महामुलिया पर्व पर सजाई गई डाल के चारों ओर लोकगीत गाती बालिकाएँ

महामुलिया: बचपन का उत्सव

कटनी की मिट्टी में महाकौशल, बघेलखंड और बुंदेलखंड की संस्कृति का सुंदर संगम दिखाई देता है। अक्षय तृतीया और महामुलिया जैसे लोकपर्व इस क्षेत्र की लोक-आस्था, परंपरा और बालमन की खुशियों को जीवंत रखते हैं।

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शरीर को स्वस्थ, मन को निर्मल बनाता है योग

योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि मानसिक शांति, आत्मचिंतन और संतुलित जीवन का माध्यम है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और बेचैनी से मुक्ति का सरल, सस्ता और प्रभावी उपाय है योग। यह न सिर्फ शरीर को सशक्त करता है बल्कि मन को भी स्थिरता, ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। योग वह शक्ति है जो जीवन को दिशा, उद्देश्य और संतुलन प्रदान करती है।

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तकनीक का जाल: सुविधा या बढ़ता खतरा ?

डिजिटल युग में बढ़ते अपराधों के बीच यह लेख तकनीक के सही और गलत उपयोग, किडनैपिंग के बदलते स्वरूप और समाज में संतुलित सोच की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

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पर्णकुटी और कोंगा सॉफ्टवेयर द्वारा महिलाओं को मिला स्वरोजगार

पर्णकुटी संस्था और कोंगा सॉफ्टवेयर प्रा. लि. की ओर से जरूरतमंद महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग और सामग्री प्रदान की गई। इस उपक्रम के तहत कुल 10 महिलाओं को बिजनेस किट्स दी गईं। इनमें से तीन महिलाओं को सिलाई मशीनें, चार महिलाओं को एडवांस ब्यूटी पार्लर किट्स और तीन महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए कुल 32,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। यह कार्यक्रम सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत स्वयंरोजगार और कौशल विकास अभियान** के रूप में आयोजित किया गया। इस अवसर पर अभिनेत्री तथा *अस्मिता महाराष्ट्राची* संस्था की संचालिका अंकिता शिवतारे और पर्णकुटी की सह-संस्थापक स्नेहा भारती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उनके हाथों लाभार्थी महिलाओं को स्वरोजगार सामग्री वितरित की गई।

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शांत प्राकृतिक वातावरण में झील किनारे बैठी एक युवती, जो गहरे विचारों में डूबी हुई आत्म-चिंतन कर रही है

गहराइयों में छिपी सच्चाई

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई जीवन की सच्चाई अक्सर सतह पर नहीं, उसकी गहराइयों में छिपी होती है। इसे समझने के लिए हमें कभी-कभी ठहरकर अपने भीतर झांकना पड़ता है। मेरे जीवन में भी एक ऐसा ही अनुभव आया, जिसने मुझे जीवन की गहराई से परिचित कराया। यह उन दिनों की बात है जब सब कुछ…

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जब सवाल कपड़ों का नहीं, मानसिकता का हो

भारत में बलात्कार की घटनाएँ हर उम्र और वर्ग को प्रभावित कर रही हैं छोटी बच्चियाँ, किशोर, महिलाएँ और यहाँ तक कि पुरुष भी शिकार बन रहे हैं। यह केवल शरीर का नहीं, मानसिकता का अपराध है। समाधान क़ानून के साथ-साथ शिक्षा, संवेदनशीलता और समाजिक चेतना में निहित है।

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जब चिड़िया चुग गई खेत !

तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में आगे बढ़ते हुए विनोद ने सफलता तो पा ली, लेकिन रिश्तों को समय देना भूल गया। करवाचौथ के दिन एक गजरा उसे एहसास दिला देता है कि प्यार बड़ी चीज़ों में नहीं, बल्कि उन छोटे पलों में छिपा होता है जिन्हें वह हमेशा टालता रहा। जब समझ आया, तब बहुत देर हो चुकी थी।

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एक छोटी लड़की चूल्हे और किताबों के बीच खड़ी, पढ़ाई और अपने सपनों की ओर बढ़ने की इच्छा दर्शाती हुई।

चूल्हे से किताब तक

खुशबू गोयल माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न।नहीं पकड़नी ये करछी मुझको,ज़रा कलम तो पकड़ाओ न। भैया भी तो पढ़ने जाता है,मुझको भी तो पढ़ाओ न।माँ, थोड़ी तो दया करो मुझ पर,पापा, आप ही समझाओ न। मेरे भी तो सपने हैं,करने उनको अपने हैं।मत सुलगाओ चूल्हे की अग्नि में मुझको,विद्यालय…

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