
डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई
आज का युग तकनीक का युग है। मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है। जहाँ एक ओर हमें तकनीक से सुविधा मिलती है, वहीं इसका गलत उपयोग भी समाज के लिए खतरा बन सकता है, खासकर किडनैपिंग जैसे अपराधों में।पहले अपहरण के मामले सीमित साधनों के कारण अपेक्षाकृत कम होते थे, लेकिन अब अपराधी तकनीक का सहारा लेकर अधिक योजनाबद्ध तरीके से अपराध करते हैं। सोशल मीडिया, लोकेशन ट्रैकिंग, फेक प्रोफाइल और डेटा चोरी जैसे माध्यमों का उपयोग करके अपराधी लोगों की निजी जानकारी जुटा लेते हैं। इससे बच्चों और युवाओं की सुरक्षा पर खतरा बढ़ जाता है।किडनैपिंग आज एक संगठित अपराध बन चुका है, जिसमें अपराधी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। मोबाइल लोकेशन, सोशल मीडिया प्रोफाइल और व्यक्तिगत जानकारी के माध्यम से वे अपने शिकार को निशाना बनाते हैं। इस तरह के मामलों में आईटी सेक्टर के कर्मचारी, जो अक्सर अलग शहरों में अकेले रहते हैं, अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
हाल के समय में नासिक से जुड़ा एक मामला चर्चा में आया, जिसे कुछ लोगों ने Tata Consultancy Services (TCS) के एक कर्मचारी से जोड़ते हुए धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील विषय से भी संबंधित कर दिया। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी आवश्यकता है. तथ्यों की स्पष्टता और समाज में संतुलित सोच बनाए रखना।
भारत एक विविधताओं से भरा देश है, जहाँ हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और बदलने की स्वतंत्रता है। यह अधिकार Article 25 of the Indian Constitution के अंतर्गत दिया गया है। लेकिन यह स्वतंत्रता पूरी तरह स्वेच्छा पर आधारित होनी चाहिए—किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या धोखा इसमें शामिल नहीं होना चाहिए।
नासिक केस के संदर्भ में, जब धर्म परिवर्तन की बात सामने आती है, तो समाज में भावनाएँ तेज हो जाती हैं। परंतु यह समझना जरूरी है कि हर घटना के पीछे की सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होती है। केवल अफवाहों या अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष निकालना न केवल गलत है, बल्कि इससे सामाजिक सौहार्द भी प्रभावित होता है।
इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा के पारंपरिक उपाय अब पर्याप्त नहीं हैं। हमें डिजिटल और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर सावधानी बरतनी होगी।
हालाँकि, कानून-व्यवस्था और पुलिस की सक्रियता से ऐसे मामलों में अक्सर अपराधियों को पकड़ा जाता है और पीड़ित को सुरक्षित वापस लाया जाता है। लेकिन इससे पहले कि कोई घटना घटे, जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
