
पूनम शर्मा स्नेहिल, प्रसिद्ध लेखिका, जमशेदपुर
बुध ग्रह की स्वामिनी, है ममता का रूप।
मां कुष्मांडा हर रही, जीवन के हर कूप।।
रूप-बुद्धि वरदायिनी, रखे भुजाएँ आठ।
श्रद्धा-भाव से तुम करो, नित माता का पाठ।।
चक्र, कमंडल अरु गदा, शोभित नीरज हाथ।
धनुष-बाण, अमृत-कलश, रखती सब कुछ साथ।।
कर में रख जप-माला, करती जन कल्याण।
दुष्ट जनों पर ही सदा, ताने माता बाण।।
माता को है अति-प्रिय, पीला देखो रंग।
केसर पेड़ा चढ़ रहा, मालपुए के संग।।
रूप-बुद्धि दे कर रही, मां सब पर उपकार।
अष्टभुजा वाली करे, दुष्टों का संहार।।

भक्ति भाव लिए अनुपम दोहावली