gulmohar

नया साल

यह रचना सालों के बदलने के बहाने मनुष्य की आदतों, हिंसा और संवेदनहीनता पर तीखा व्यंग्य है। 2025 और 2026 के संवाद के माध्यम से कवि यह प्रश्न उठाता है कि क्या नया साल सच में नया होता है, या वही पुरानी शरारतें नए कैलेंडर के साथ आगे बढ़ जाती हैं।

Read More

“बृज की रज, रबड़ी और राधा

गोवर्धन की परिक्रमा कोई साधारण यात्रा नहीं, यह आत्मा की तपस्या है। 27 से 30 सितंबर तक की इस दंडवती परिक्रमा में मैंने न केवल शरीर को बल्कि हृदय को भी बृजरज में लोटते पाया। हर कदम, हर प्रणाम में बृज का माधुर्य, भक्ति की ऊष्मा और सेवा का भाव समाया था। भक्तों का प्रेम, रास्ते के भंडारे, बुजुर्गों की प्रेरणा और मित्र का साथ — सबने मिलकर यह यात्रा एक दिव्य अनुभव बना दी। राधा कुंड में स्नान से लेकर कुसुम सरोवर की विद्युत छटा तक, हर पड़ाव ने मुझे भीतर तक छू लिया। यह यात्रा थी—तन की थकान को तज कर मन की शांति पाने की।

Read More
गोगापुर गौशाला में गायों को चारा खिलाते हुए श्रद्धालु, पुण्यतिथि पर आयोजित गौसेवा कार्यक्रम का दृश्य

पुण्यतिथि पर गौसेवा: युवाओं ने पेश की मिसाल

महिदपुर रोड में स्व. सुरेश चंद्र चत्तर की पुण्यतिथि पर आयोजित गौसेवा कार्यक्रम ने समाज में सेवा, संवेदनशीलता और जीवदया का प्रेरक संदेश दिया।

Read More

प्रेम पाक

हंडिया सी इस घाटी में एक दिन अवकाश का दो स्कूप बादल, रात भर भीगी गुनगुनी हवा, पेड़ों से छन कर आती  धूप के कुछ कतरे और  अंजुली भर पानी बारिश का उस पे बुरकना है  तुम्हारे सान्निध्य का  एक छोटा चम्मच मसाला … बस इतनी सी तो है इच्छा चलो दोनों मिल आज ढलते…

Read More

नए साल में लंबी और स्वस्थ जिंदगी का संकल्प

नए साल 2026 में स्वास्थ्य विशेषज्ञ छोटे और व्यावहारिक हेल्थ रेजोल्यूशन अपनाने की सलाह दे रहे हैं. रोज 30 मिनट की गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, पानी का सही सेवन और तनाव प्रबंधन से फिटनेस बेहतर होती है, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है और लंबी उम्र पाई जा सकती है.

Read More
एक भारतीय माँ सुबह के धुंधलके में घर के दरवाज़े पर खड़ी, दूर जाते बेटे को स्नेह और उम्मीद भरी आँखों से देखते हुए.

तुम सपने ज़रूर देखना…

यह कविता सपनों के माध्यम से माँ और संतान के रिश्ते की उस गहराई को छूती है, जहाँ प्रेम स्वार्थ नहीं बल्कि त्याग बन जाता है. महानगर की चकाचौंध के बीच यह रचना याद दिलाती है कि असली ऊर्जा माँ की आँखों में छुपी होती है, और सपनों का सच होना तभी सार्थक है जब उसमें उसकी साँसें बाकी रहें.

Read More
टेबल पर खुली किताब, बिखरे कागज़ और खिड़की से आती रोशनी, अधूरे सपनों का भावनात्मक दृश्य

ख़्वाब

ख़्वाब” कविता अधूरे सपनों, बिखरी ख्वाहिशों और यादों की गहराई को व्यक्त करती है। यह रचना बताती है कि हर सपना पूरा होना ज़रूरी नहीं, कुछ अधूरे ख़्वाब ही जीने की वजह बन जाते हैं और यादों में हमेशा जिंदा रहते हैं।

Read More

साहित्यिक सम्मान की यात्रा

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पटना में चतुर्वेदी प्रतिभा मिश्र साहित्य सम्मान प्राप्त करना मेरे लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि रांची से पटना तक की वह भावनात्मक यात्रा थी जिसमें परिवार, गाँव, मायका और साहित्यिक रिश्तों का आत्मीय संगम साकार हुआ। यह सम्मान वर्ष 2025 के अंत में जीवन को कृतज्ञता और आनंद से भर देने वाला क्षण बन गया।

Read More

राष्ट्रनायक नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी केवल एक नेता नहीं, बल्कि भारत माँ के ऐसे सपूत हैं जिन्होंने संघर्षों की भट्टी में तपकर अपनी पहचान बनाई। जनसेवा उनके जीवन का धर्म है और राष्ट्रभक्ति उनकी पूजा।
मोदी ने अपने संकल्पों से भारत को नवयुग की ओर अग्रसर किया। हर कठिनाई के सामने साहस के साथ खड़े होकर उन्होंने जनता को विश्वास और आशा दी। उनका जीवन कर्म, सरदार पटेल के साहस और शिवाजी की वीरता की याद दिलाता है।

Read More

मैं जब पेड़ लगाता हूँ

प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की सुंदर अभिव्यक्ति है। इसमें कवि ने पेड़ लगाने के आनंद और उससे जुड़ी संवेदनाओं को सहज बालसुलभ भाव में प्रस्तुत किया है। कविता यह संदेश देती है कि पेड़ केवल फल या छाया ही नहीं देते, बल्कि वे मनुष्य और जीव-जंतुओं — सबके जीवन का आधार हैं। दादी के स्नेहिल शब्दों से लेकर झूले पर झूलने की कल्पना तक, हर पंक्ति में प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध झलकता है। यह रचना बच्चों में पेड़ों के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाने वाली है।

Read More