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ट्रैफिक सिग्नल पर कार में बैठी उदास मृणालिनी और पास की कार में उसे देखते डॉक्टर मृगांक का भावनात्मक दृश्य।

मृणालिनी

“कभी-कभी जिंदगी में मिलने वाले लोग प्रेम नहीं, आईना बनकर आते हैं…
पति की बेवफाई और भीतर के अकेलेपन से टूट चुकी मृणालिनी की जिंदगी एक ट्रैफिक सिग्नल पर बदलने लगती है, जहां उसकी मुलाकात डॉक्टर मृगांक से होती है। एक अनकहा भावनात्मक रिश्ता जन्म लेता है जिसमें आकर्षण है, अपनापन है, लेकिन मर्यादा भी है। यह कहानी प्रेम, आत्मसम्मान और घर टूटने व बचने के बीच की नाजुक रेखा को छूती है।”

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अकेलेपन और प्रेम को दर्शाता थिएटर सीन”

नेपथ्य और रंगमंच

यह कविता जीवन को एक रंगमंच के रूप में प्रस्तुत करती है, जहां हर व्यक्ति एक किरदार निभा रहा है। कवयित्री स्वयं को मंच पर उपस्थित बताती है, जहां वह अपने भावों, पीड़ाओं और प्रेम को खुलकर जी रही है, जबकि उसका प्रिय नेपथ्य में रहकर अपने अस्तित्व को छिपाए हुए है।

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एहतियात कैसी ?

सपने सदियों से कल्पना के आसमान में उड़ान भरते आए हैं और हर बार यथार्थ की धरती पर लौटकर हमें यही सिखाते हैं. जब दिल सच्चा हो, तो एहतियात की कैसी गुंजाइश? एक मुट्ठी आसमान, शबनम का छोटा-सा कतरा इन छोटी-सी चीज़ों में भी प्रेम दरिया बनकर उमड़ आता है।

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मैं एक दीवार हूँ: मौन सहारा, दर्द और इतिहास की संवेदनशील कविता

ऐतिहासिक दीवार

मैं एक पुरानी दीवार हूँ बोलने में असमर्थ, फिर भी सबके दुःख-दर्द, गुस्से और उपेक्षा की साक्षी| लोग अपने विषाद, हँसी, और थकान को मुझ पर टांग जाते हैं जैसे कोई पोस्टर दीवार पर चिपकाता है| जब वे मेरी पीठ से सिर टिकाकर बैठते हैं, मैं उन्हें मौन सहारा देती हूँ्| फिर भी, बदले में मुझे गालियॉं और अपमान मिलता है जैसे कोई पान की पीक थूक देता हो| मैं पुरानी जरूर हूँ, टूटने की कगार पर भी, लेकिन मेरे भीतर इतिहास छिपा है मैं ऐतिहासिक हूँ्

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अधूरी ख्वाहिश..

गर्मी के एक दोपहर में, सुदीप बनर्जी के अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही है। निधि, जो अपने पति अमितेश के उपेक्षात्मक और हिंसक व्यवहार से वर्षों से जूझ रही है, यह घोषणा करती है कि मुखाग्नि सुदीप का बेटा सुजीत देगा—एक सच्चाई जिसे अब तक कोई नहीं जानता था। विरोध और संदेह के बावजूद, निधि यह साबित करने पर अडिग रहती है कि सुजीत सुदीप का खून है।

सुदीप के गुजरने के बाद, निधि को उसकी एक रिकॉर्डेड ऑडियो क्लिप मिलती है, जिसमें वह अपनी आखिरी ख्वाहिश व्यक्त करता है—कि निधि उसकी मृत्यु के बाद भी उसके नाम का सिंदूर लगाए और उसकी पत्नी की तरह जीवन बिताए। निधि इस इच्छा को उसी रात पूरी करती है।
कुछ दिन बाद, वकील की उपस्थिति में सुदीप की वसीयत पढ़ी जाती है, जिसमें उसकी सारी संपत्ति निधि और उसके बाद सुजीत के नाम की जाती है, और निधि से कहा जाता है कि वह उसकी विधवा नहीं बल्कि सुहागन की तरह इस घर में रहे। यह सब सुनकर सुदीप की माँ निधि को अपनाती है और अपने पोते को गले लगाती है। यह क्षण एक रिश्ते के खोने के दर्द के साथ-साथ नए अपनत्व और स्वीकृति के सुख को भी दर्शाता है।

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टीआई पंवार का बड़ा कदम: ₹51,000 दान से समाज को दी प्रेरणा

टीआई मदन सिंह पंवार ने समाज सेवा की मिसाल पेश की

महिदपुर रोड में टीआई मदन सिंह पंवार ने श्मशान समिति को ₹51,000 की दान राशि देकर समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उनके इस कदम से न केवल विकास कार्यों को बल मिलेगा, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।

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नवदुर्गा के प्रेरक दोहे

नवरात्रि का पर्व शक्ति और भक्ति का अद्वितीय संगम है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री का सुंदर दरबार सजता है, जिनकी आराधना से जीवन में ममता और वात्सल्य का संचार होता है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी का स्मरण किया जाता है, जो तप, साधना और भक्ति की प्रतीक हैं।

माँ चंद्रघंटा अपने अपार सौंदर्य और दिव्य छवि के साथ पीले वस्त्र धारण कर सिंह पर सवार होकर भक्तों को संकटों से मुक्त करती हैं। कूष्मांडा स्वरूप धारण करने वाली माँ के ध्यान से शोक, भय और अशुभता दूर होकर शुभ वरदान मिलता है। पंचम रूप में माँ स्कंदमाता के दर्शन से अद्भुत शांति और कृपा प्राप्त होती है।

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लिखते हुए तुम

यह कविता लिखने की प्रक्रिया के भीतर छिपे प्रेम, एकाग्रता और भावनात्मक जुड़ाव को उकेरती है। प्रिय को लिखते हुए देखना, उसकी उँगलियों, कलम और भावनाओं को महसूस करना यह रचना शब्दों से पहले जन्म लेने वाले एहसासों की कथा है।

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साहित्यकार मधु मिश्रा पुस्तकों के साथ बैठी हुई, लेखन और साहित्यिक उपलब्धियों को दर्शाता प्रेरणादायक दृश्य।

मधु मिश्रा : संवेदना की लेखिका

मधु मिश्रा हिंदी साहित्य जगत की एक संवेदनशील, सक्रिय और बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न रचनाकार हैं। उन्होंने कहानी, लघुकथा, कविता, हाइकु और आलेख के माध्यम से समाज, स्त्री संवेदना और रिश्तों के यथार्थ को प्रभावशाली स्वर दिया है। उनका लघुकथा संग्रह धूप के पाँव तथा कहानी संग्रह ड्रीम गर्ल विशेष रूप से चर्चित रहे हैं। वर्ष 2001 से निरंतर उनकी रचनाएँ अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित मधु मिश्रा आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।

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शिव पार्वती का दिव्य मिलन दर्शाती भावपूर्ण हिंदी कविता, तप और समर्पण का प्रतीक

आत्मा का समर्पण

हिमालय की गोद में जन्मी पार्वती के मन में केवल महादेव का ही नाम बसा था। उन्होंने कठोर तपस्या और अटूट विश्वास के साथ हर क्षण शिव को पुकारा। ऋतुएँ बदलती रहीं, समय बीतता रहा, पर उनका संकल्प कभी नहीं डगमगाया।

कैलाश पर समाधि में लीन शिव के भीतर भी एक सूक्ष्म स्पंदन था, जो पार्वती की भक्ति को महसूस कर रहा था। जब दोनों की दृष्टि मिली, तो वह मिलन केवल प्रेम नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्ण समर्पण का प्रतीक बन गया जहाँ ‘मैं’ समाप्त होकर ‘हम’ का जन्म होता है।शिव और पार्वती का यह संग सृष्टि का आधार है, जो प्रेम, विश्वास और ऊर्जा का अनंत प्रकाश फैलाता है।

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