नवदुर्गा के प्रेरक दोहे

उषा शर्मा, प्रसिद्ध लेखिका, जामनगर (गुजरात)

माँ शैलपुत्री का सजा, है सुंदर दरबार।
माँ को निशदिन पूजिए, हो ममता संचार।।

नवरात्रा माँ दूसरा, ब्रह्मचारिणी नाम।
भाव-भक्ति परिपूर्ण हो, जपते आठों याम।।

मात चंद्रघंटा भई, छवि निराली अपार।
पीत वस्त्र माँ पे सजे, आती शेर सवार।।

कूष्मांडा स्वरूप धरे, माँ का करते ध्यान।
अशुभ शोक-संकट कटे, पाते शुभ वरदान।।

पंचम रूप स्कंदमाता, अम्बे माँ का रूप।
जननी हैं जो स्कन्द की, अद्भुत रूप अनूप।।

षष्ठी तिथि कात्यायनी, पूजें मात स्वरूप।
शहद-भोग माँ को लगे, माँ ममता का रूप।।

दुर्गा रूप है निरंजनी, अंबे सिंह सवार।
अष्टम गौरी रूप माँ, पूजें सब नर-नार।।

माँ अंबे सिंह-राजति, दुर्गा काली रूप।
आदर-भाव पूज रहे, नर-नारी सब भूप।।

लाल वस्त्र सिंह-वाहिनी, माँ दुर्गे का रूप।
शक्ति-भक्ति से पूर्ण है, पूजा के अनुरूप।।

मात तिहारी शरण जो आ, रखता जो विश्वास।
नवम रूप सिद्धिदात्री, करती पूरी आस।।

श्रद्धा पूर्वक हम करें, माता का उपवास।
माँ दुर्गा पूरी करें, सबके मन की आस।।

One thought on “नवदुर्गा के प्रेरक दोहे

  1. सादर धन्यवाद 🙏 मेरी रचना को स्थान देने के लिए

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