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मायके से विदा होती भावुक महिला, माँ की याद में डूबी

दूब-धान

“दूब-धान” एक अत्यंत भावनात्मक हिंदी कहानी है, जो माँ की याद, मायके का खालीपन और बिछड़ते रिश्तों की गहरी संवेदनाओं को उकेरती है। यह मदर-डॉटर स्टोरी हिंदी नवरात्रि के भावनात्मक परिवेश में उस दर्द को सामने लाती है, जब एक बेटी अपने मायके लौटती है, लेकिन माँ की अनुपस्थिति हर कोने में चुभती है। “दूब-धान” केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों की अभिव्यक्ति है, जिन्हें शब्दों में कहना कठिन होता है। यह emotional hindi story हर पाठक के दिल को छू जाती है।

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नवरात्रि में स्थापित कलश, आम्र पत्तों और नारियल के साथ पूजा स्थल

कलश स्थापना एवं महत्व

“कलश स्थापना एवं महत्व” एक आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक लेख है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर किए जाने वाले इस महत्वपूर्ण अनुष्ठान की गहराई को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है।

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जब आती थी रामलीला..

महिदपुर रोड पर आयोजित रामलीला में हनुमान जी की झांकी सबसे रोमांचकारी थी. केले और फलों से लदे पेड़ों को छलाँग लगाकर तोड़ते, अशोक वाटिका उजाड़ते, और कभी-कभी फल दर्शकों की ओर उछालते। दर्शक इसे श्रद्धा से हनुमान जी का प्रसाद मान लेते थे।

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ढाक बाजा, धुनुची और सिंदुर खेला के रंगों में रंगा बोरीवली

अष्टमी के अवसर पर बोरीवली पूर्व स्थित एवान एंक्लेव सोसायटी की महिलाओं ने पारंपरिक बंगाली वेशभूषा में मां दुर्गा की आराधना हेतु नृत्य प्रस्तुत कर कोलकाता की दुर्गा पूजा की झलक मुंबई में साकार कर दी। बारिश के बावजूद उनका उत्साह देखने लायक था। विभिन्न सम्प्रदायों से जुड़ी महिलाओं ने मिलकर यह नृत्य तैयार किया, जिसमें दुर्गा पूजा के धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक पहलुओं को सुंदरता से प्रस्तुत किया गया। मां दुर्गा के रूप में सजी अश्विका और बाल कलाकारों की भूमिकाओं ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। दर्शक भाव-विभोर हो उठे और एवान एंक्लेव का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

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नवदुर्गा के प्रेरक दोहे

नवरात्रि का पर्व शक्ति और भक्ति का अद्वितीय संगम है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री का सुंदर दरबार सजता है, जिनकी आराधना से जीवन में ममता और वात्सल्य का संचार होता है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी का स्मरण किया जाता है, जो तप, साधना और भक्ति की प्रतीक हैं।

माँ चंद्रघंटा अपने अपार सौंदर्य और दिव्य छवि के साथ पीले वस्त्र धारण कर सिंह पर सवार होकर भक्तों को संकटों से मुक्त करती हैं। कूष्मांडा स्वरूप धारण करने वाली माँ के ध्यान से शोक, भय और अशुभता दूर होकर शुभ वरदान मिलता है। पंचम रूप में माँ स्कंदमाता के दर्शन से अद्भुत शांति और कृपा प्राप्त होती है।

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