gulmohar
devotees walking in padyatra with drums and chants heading to Sanwariya Seth temple with flowers and devotion

सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

Read More
नई बहू का गृह प्रवेश, पारंपरिक वेशभूषा में सास आरती की थाली लिए स्वागत करती हुई

बहू रानी

यह कहानी एक माँ के मन के द्वंद्व, बेटे के अचानक विवाह और बहू के आगमन की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है। रिश्तों की खटास और मिठास के बीच अंततः प्रेम और स्वीकार्यता की जीत होती है।

Read More

भारतीय साहित्य संकल्पना और वैश्विक प्रभाव पर मंथन

विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, उज्जैन द्वारा मराठा मंदिर साहित्य शाखा, मुंबई एवं विश्व हिन्दी प्रचार प्रसार संस्थान, पुणे के सहयोग से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संचेतना महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर “भारतीय साहित्य : संकल्पना और वैश्विक प्रभाव” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि श्री सुरेश चंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नॉर्वे) और मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा (उज्जैन) सहित देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने भाग लिया। संगोष्ठी में भारतीय साहित्य की वैश्विक भूमिका, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। शाम को हुए कवि सम्मेलन में भारत, अमेरिका और नॉर्वे के कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन साहित्यिक आदान-प्रदान, भारतीय विचारधारा और विश्व शांति के संदेश को समर्पित रहा।

Read More
सावन की बारिश में अपने प्रिय का इंतजार करती एक युवती

सावन को आने दो

कुछ भाव ऐसे होते हैं जो शब्दों में नहीं ढल पाते, लेकिन सावन की पहली बारिश उन्हें आवाज़ दे देती है। “सावन को आने दो” ऐसी ही एक भावुक कविता है, जहाँ अनकहे जज़्बात बादलों के साथ उमड़ते हैं, बारिश की हर बूंद प्रेम का संदेश बन जाती है और मन किसी अपने की प्रतीक्षा में भीग उठता है। यह कविता प्रेम, प्रतीक्षा और मानसून की मधुर अनुभूतियों को बेहद संवेदनशीलता से व्यक्त करती है।

Read More

माँ जैसी नहीं हूं मैं…

यह कविता एक आत्मस्वीकृति है — एक बेटी की अपनी माँ के प्रति संवेदनाओं, निरीक्षणों और अनुभवों की गहराई से उपजी भावनाओं की अभिव्यक्ति। वह कहती है कि वह अपनी माँ की खामोशी पढ़ लिया करती थी, माँ के संघर्षों और त्याग की साक्षी रही है। माँ की आँखों में छिपे दर्द, जीवन की कठोर सच्चाइयों से संघर्ष, और अपनी इच्छाओं को निस्वार्थ भाव से दबा देने का दृश्य उसने बार-बार देखा।

वह माँ की हर वह चुप्पी पहचानती थी, जिसे दुनिया अनदेखा कर देती है। माँ के आँचल से आँसू पोछने से लेकर, चाँदनी रातों में अपने दुखों से बात करने तक की हर एक लम्हा, बेटी के मन में गहरे बैठ गया।

Read More
वक्त और जिंदगी के बदलते रंगों को दर्शाती हिंदी कविता

मैंने हर रोज़ ज़माने को रंग बदलते देखा है

उम्र के साथ बदलती जिंदगी, ढलती जवानी, कमजोर पड़ती ताकत और वक्त के बदलते रंगों की सच्चाई को बयां करती यह भावपूर्ण कविता इंसान को अपने आज पर घमंड न करने और दूसरों को खुश रखने का संदेश देती है.

Read More
Person sitting in a quiet, dimly lit study, surrounded by papers, charts, and an open diary, contemplating social issues like suicide prevention and mental health, with soft morning light coming through a window symbolizing hope and awareness.

विचार विमर्श

सामाजिक विमर्श की अहमियत और आत्महत्या रोकने के बहुआयामी प्रयासों की ज़रूरत पर प्रकाश डालता है। आंकड़े, मानसिक और आर्थिक कारण, और परिवार की भूमिका पर विचार करते हुए यह जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है।

Read More