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शिव शक्ति

शिव ही सत्य हैं और सत्य ही शिव हैं। उनकी पहचान सत्यम् शिवम् सुन्दरम् के रूप में होती है। शिव ही शक्ति हैं और शक्ति ही शिव—दोनों एक ही माला के अनमोल मोती हैं जिनसे संपूर्ण विश्व आलोकित होता है। ब्रह्मा जी ने शिव की प्रेरणा से ही ब्रह्मांड की रचना की और विष्णु जी को सृष्टि के पालन का दायित्व भी शिव ने ही प्रदान किया। सृष्टि का संहार स्वयं शिव के हाथ में है। यही इस सृष्टि का सत्य है। परंतु सदाशिव का प्राकट्य कैसे हुआ—इसका प्रमाण शास्त्रों में नहीं मिलता, क्योंकि वे अनादि और अनंत हैं। त्रिकालदर्शी सदाशिव सबसे बड़े प्रशासक और प्रबंधक हैं, जो सबको उनके उत्तरदायित्व सौंपते हैं और सबके कार्य पर सतर्क दृष्टि रखते हैं। समय-समय पर समीक्षक बनकर और कभी तिर्यक दृष्टि से देखकर वे सभी की सहायता को तत्पर रहते हैं। वास्तव में शिव शब्दातीत और अवर्णनीय हैं—उनकी महिमा अपरंपार है। यही स्मरणीय है कि शंकर ही सदा सेवनीय हैं और वही सभी दुःखों का हरण करने वाले हैं।

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वृद्ध माता-पिता की सूनी आँखें अपने बच्चों की राह निहारते हुए – माता-पिता की उपेक्षा और अकेलेपन पर भावपूर्ण हिंदी कविता।

सूनी आँखें

सूनी आँखें” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो वृद्ध माता-पिता के अकेलेपन, उपेक्षा और उनके मन में अपने बच्चों के प्रति अटूट प्रेम को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म और सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है

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दादर से पंढरपुर जाने वाली आषाढ़ी वारी 2026 विशेष ट्रेन में यात्रा करते श्रद्धालु

आषाढ़ी वारी 2026 : पंढरपुर के लिए दादर से 2 विशेष ट्रेनें

आषाढ़ी वारी 2026 के लिए मध्य रेल ने श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात दी है. दादर-पंढरपुर-दादर के बीच 24 और 26 जुलाई को दो विशेष ट्रेनें चलेंगी. जानें समय, स्टॉपेज, आरक्षण और टिकट बुकिंग की पूरी जानकारी.

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नारी शक्ति का प्रतीक भारतीय महिला, जिसमें दुर्गा, मीरा और रानी लक्ष्मीबाई के रूपों की झलक दिखाई दे रही है

स्त्री की वाणी

वह केवल एक स्त्री नहीं, बल्कि अनगिनत रूपों का संगम है दर्द को आँखों में समेटे हुए भी अडिग खड़ी। वह चौखट की मर्यादा भी है और जीवन की हर जिम्मेदारी का आधार भी। कभी दुर्गा बनकर शक्ति का प्रतीक बनती है, तो कभी मीरा बनकर भक्ति में विलीन हो जाती है। उसके भीतर द्रौपदी की प्रतिज्ञा है, पद्मिनी का त्याग है और झांसी की रानी सा साहस भी। वह मौन रहकर भी बहुत कुछ कहती है, सहनशीलता में भी आग समेटे रहती है। वही मां है, वही बेटी और उसी से इस संसार की हर कहानी, हर रिश्ते और हर अस्तित्व की शुरुआत होती है।

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खामोश कमरे में अकेली स्त्री खिड़की के पास बैठी बाहर देखती हुई, चेहरे पर प्रतीक्षा और टूटे प्रेम का भाव, शाम की धुंधली रोशनी और उदास वातावरण।

मुख़्तसर मुलाक़ात, लंबा इंतज़ार

यह कविता प्रेम के उस रूप को उजागर करती है जहाँ चाहने वाला टूटता है और जाने वाला वादा लेकर चला जाता है। शब्दों में ठहरा दर्द और अधूरा इंतज़ार इसकी आत्मा है।

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प्रयागराज: जहाँ जल भी मोक्ष का द्वार बनता है

प्रयागराज—तीर्थों का राजा, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का त्रिवेणी संगम आत्मा को छू लेने वाला अनुभव बन जाता है। यह केवल नदियों का मिलन नहीं, श्रद्धा और सनातन परंपरा की धारा है। संगम में एक डुबकी, जीवन के सभी द्वंद्वों से मुक्ति और शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। नाव की धीमी चाल, मंत्रों की गूंज और जल पर तैरते दीप—यह एक ऐसी यात्रा है, जो हृदय को भीतर तक शांत कर देती है।

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भक्ति और श्रद्धा के सागर में डूबा नगर

नगर में आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली, जब श्रीराम हनुमान मंदिर सेवा समिति के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ. बैंड-बाजों की मधुर धुन, ढोल-नगाड़ों की थाप और हरिनाम के जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया. सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता, पुष्पवर्षा और श्रद्धा भाव ने इस पावन आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया. पं. सुनीलकृष्ण व्यास के ओजस्वी प्रवचनों ने कथा के प्रथम दिवस को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, जिससे नगरवासियों में शांति, भक्ति और आनंद का संचार हुआ.

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हरी-भरी प्रकृति, बहती नदी, पर्वत और आकाश के साथ सृष्टि की सुंदरता को दर्शाता यथार्थवादी दृश्य

सृष्टि का संगीत

“प्रकृति की अद्भुत कृति” एक सुंदर हिंदी कविता है, जो सृष्टि की रचना, प्रकृति की सुंदरता और ईश्वर की अद्भुत कारीगरी का भावपूर्ण वर्णन करती है। इस कविता में धरती, आकाश, सूर्य, चंद्रमा, नदियाँ और हरियाली के माध्यम से जीवन के संतुलन और समानता का संदेश दिया गया है। साथ ही यह रचना आध्यात्मिकता, मानवता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाती है। प्रकृति प्रेमियों और साहित्य पाठकों के लिए यह एक प्रेरणादायक कविता है।

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धूल से ढके पेड़ के नीचे साइकिल के पास खड़ी एक लड़की, पर्यावरण और प्रकृति के संवाद का प्रतीक

प्रकृति और मैं…

यह रचना मनुष्य और प्रकृति के बीच के गहरे और जटिल संबंध को उजागर करती है। एक साधारण-सी प्रतीत होने वाली घटना एक लड़की का साइकिल रोककर पेड़ के नीचे खड़ा होना. धीरे-धीरे एक गहन संवाद में बदल जाती है, जहाँ एक पत्ती स्वयं बोलकर प्रकृति की पीड़ा व्यक्त करती है।

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