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इंदौरियत जिंदा है…..

इंदौर ने स्वच्छता में लगातार आठवीं बार पहला स्थान पाकर यह सिद्ध कर दिया है कि जब नागरिक जागरूक हो जाएं तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं। जहां देश के कई शहरों में सफाईकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं इंदौर में उन्हें हार पहनाकर सम्मानित किया जा रहा है। यह सिर्फ स्वच्छता की जीत नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता की जीत है। इंदौर ने साबित किया है कि शहर की खूबसूरती केवल सड़कें नहीं, बल्कि वहां के लोगों का दिल भी होता है।

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दिल के ये जख्‍म…

यह कविता दिल के जख़्मों और दर्द को शब्दों और संगीत के रूप में ढालने की बात करती है। इसमें भाव है कि दिल अपने हर दर्द, हर टूटे सपने और हर बिखरे पल को सहेजकर उन्हें गीत, नग़मा और ग़ज़ल में बदल देता है। दुख और तकलीफ़ भी जब सुर और लय में ढलते हैं तो वे मधुर तराने बन जाते हैं। हर अक्षर एक दास्तां कहता है, हर धड़कन में संगीत छिपा है, और हर ग़म को गीत एक मीठे अहसास में बदल देता है। यह दृष्टिकोण जीवन को केवल तकलीफ़ों की कहानी न मानकर, उन तकलीफ़ों को एक सुंदर अफ़साने और मधुर यादों में ढालने की प्रेरणा देता है।

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 वो लड़की

सोमेश की कंपनी में नया प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, इसलिए अब उसे ऑफिस में ज़्यादा देर तक रुकना पड़ता था. इस बात से उसका मन खिन्न हो रहा था. दस बजे की मेट्रो से उतरकर वह ऑटो की ओर बढ़ा. जैसे ही वह ऑटो में बैठा, वैसे ही एक खुशबू का झोंका उसकी नाक से टकराया.
रुको, मुझे भी ले चलो, लगभग हांफते हुए उस लड़की ने कहा.
वो खूबसूरत चेहरा, हिरणी सी आंखें, बाल हवा में बिखरे हुए, साड़ी पहने हुए थी. कहते-कहते ही वह बैठ गई.अरे! ऐ, इन साहब ने ऑटो रुकवाया है, तुम किसी और में चली जाओ, ऑटो वाले ने डपटते हुए कहा.

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नौकरी

नौकरी सिर्फ़ तन्ख्वाह नहीं, बल्कि अनुशासन, समझौता और जीवन की रफ्तार है। यह कविता कामकाजी जीवन के उन अनकहे सचों को उजागर करती है, जहाँ मुस्कान भी ज़िम्मेदारी बन जाती है और नौकरी जीवन को गति देती है।

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झंकार में दबा इंतज़ार

पायल और कंगनों की झंकार के बीच प्रेमिका अपने ही मन की उलझनों में बंधी है। आँसू, उदासी और अधूरी चाहत उसे प्रिय से मिलने से रोक रही हैं, और रात चाँद के साथ उसका मौन साक्षी बन जाती है।

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एक व्यक्ति शांत वातावरण में डायरी लिखते हुए, मन की गहराई को व्यक्त करता हुआ

मन की कही

“मन की कही” एक भावनात्मक और आत्मचिंतन से भरी हिंदी रचना है, जो मन की उन अनकही बातों को व्यक्त करती है जिन्हें हर किसी से साझा नहीं किया जा सकता। यह लेख विश्वास, आत्मीयता और मौन के महत्व को उजागर करता है, और बताता है कि क्यों हर दिल हमारे रहस्यों का भार नहीं उठा सकता। अंत में यह संदेश देता है कि एक पुस्तक ही सबसे सच्ची और निस्संदेह साथी बन सकती है।

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बड़ा बैनजी श्यामलता शर्मा: एक युग का अंत

बड़ा बैनजी- श्यामलता शर्मा

महिदपुर रोड की 95 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका श्यामलता शर्मा, जिन्हें पूरा क्षेत्र “बड़ा बैनजी” के नाम से जानता था, अब हमारे बीच नहीं रहीं। बेटियों की शिक्षा के लिए उनका संघर्ष, उनका स्नेह और उनकी रोशन मुस्कान पीढ़ियों तक याद की जाएगी।

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पुरानी छत पर सूखते कपड़े, दर्पण और बिखरे फूलों के साथ यादों से भरा भावनात्मक दृश्य

यादें…

यह कविता यादों की उस दुनिया को शब्द देती है, जहाँ प्रेम, बिछड़न और बीते पलों की महक आज भी जीवित है। सूखे फूलों, होली के रंगों और बारिश की स्मृतियों के माध्यम से मन में छिपी भावनाओं को बेहद मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है।

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पुरानी कलाई घड़ी और उसके साथ रखी पारिवारिक यादें, जो भावनात्मक लगाव और स्मृतियों का प्रतीक हैं।

घड़ी

यह कविता एक साधारण-सी घड़ी से जुड़े गहरे भावनात्मक संबंध को व्यक्त करती है। पिता द्वारा विवाह में उपहार में दी गई घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं, बल्कि प्रेम, दुआओं और स्मृतियों की अमूल्य निशानी बन जाती है। उसके खो जाने के बाद भी उससे जुड़ी यादें मन में जीवित रहती हैं।

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