Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

मीरा का मन

मीरा का जीवन समाज और परिवार की परंपराओं से परे, एक अद्भुत और अद्वितीय प्रेम का प्रतीक था। उसने राजमहल की सारी सुख-सुविधाएँ त्याग दीं और केवल अपने गिरधर गोपाल को ही अपना सर्वस्व मान लिया। जहाँ एक ओर लोग उसे समझाने का प्रयास करते कि कृष्ण तो राधा और रुक्मिणी के हैं, वहीं मीरा के लिए उनका प्रेम सांसारिक पाने और खोने से परे था। मीरा के हृदय में कृष्ण केवल पति या स्वामी नहीं, बल्कि आत्मा के आधार बन चुके थे। उसके लिए यह प्रेम किसी बंधन, किसी सामाजिक मान्यता से नहीं बंधा था। इसी अनुराग ने उसे विष भी अमृत जैसा प्रतीत कराया और हर पीड़ा को भक्ति में बदल दिया। मीरा का यह निस्वार्थ और आत्मिक प्रेम आज भी सच्चे समर्पण की अमिट मिसाल के रूप में जीवित है।

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सुनहरा छाता

किसी को कुछ बताना भी नहीं चाहती थी। किसे बताती? कौन सुनता? आँसू तो पहले ही सूख चुके थे। वो बस उस सुनहरे छाते को देखती आगे बढ़ रही थी। शायद उसी छाते के नीचे थोड़ी गुनगुनी धूप मिले… बिना रोक-टोक… बिना बाँधन।
पर तभी एक चीख गूँजी। लोग भागकर इकट्ठे हुए। सायरन बजाती एम्बुलेंस आई और एक शरीर उठा ले गई। इस घर में उसी घर में जिसके लिए उसने अपना मायका छोड़ा… खून के रिश्ते छोड़े बस सन्नाटा फैल गया। राकेश काला चश्मा लगाकर आया और बस इतना कहा “सब ख़त्म हो गया।”

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हनुमंती में देवभूमि नेत्र चिकित्सालय का नि:शुल्क नेत्र शिविर, 25 फरवरी को मोतियाबिंद ऑपरेशन

हनुमंती में ‘रोशनी’ का महाशिविर

हनुमंती में देवभूमि नेत्र चिकित्सालय द्वारा आयोजित नि:शुल्क नेत्र शिविर में ग्रामीणों को जांच, दवा और चश्मे वितरित किए गए। मोतियाबिंद मरीजों को 25 फरवरी को कोटद्वार में नि:शुल्क ऑपरेशन की तिथि दी गई।

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गाँव की पगडंडी पर स्कूल बैग लेकर मुस्कुराती हुई एक मासूम बालिका, संतोष और सादगी का प्रतीक।

संतुष्ट मुस्कान

अधूरी इच्छाओं और भागती जिंदगी के बीच सच्ची संतुष्टि कहाँ मिलती है? “संतुष्ट मुस्कान” कविता एक मासूम बालिका की मुस्कान में जीवन का गहरा दर्शन खोजती है।

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A middle-aged Indian woman in her early 40s sits cross-legged on a bed in a dimly lit bedroom, softly illuminated by the glow of her mobile phone. She is looking down at the screen, smiling faintly with an expression that conveys a mix of secrecy, guilt, and quiet pleasure. Her husband is visible in the background, seated in a chair, engrossed in his laptop, completely unaware of her. The room has a warm, intimate atmosphere typical of an Indian middle-class home, with shadows highlighting the emotional distance between the couple.

शादीशुदा रिश्तों में बढ़ती ‘सीक्रेट चैट्स’ की लत

क्या यह सिर्फ दोस्ती है या कुछ और?
सब कुछ ठीक है, परिवार भी खुश है… फिर भी फोन की स्क्रीन पर उस ‘हरी बत्ती’ (Online Status) का इंतज़ार क्यों? 40 के पार का यह ‘नया नॉर्मल’ कई घरों की कहानी बन गया है। एक ऐसा रिश्ता जिसकी कोई मंज़िल नहीं, बस ‘फील गुड’ का नशा है।

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026 में लो-राइज़ जींस की वापसी: वाई2के फैशन ट्रेंड फिर चर्चा में

लो-राइज़ जींस की वापसी

नाभि दिखाती कमरलाइन, नीचे बैठी जींस और आत्मविश्वास से भरा अंदाज़—साल 2026 में फैशन की दुनिया एक बार फिर 2000 के दशक की ओर लौट चुकी है। लो-राइज़ जींस, जिसे कभी “खतरनाक रूप से नीचे बैठी जींस” कहा जाता था, अब नए रूप, बेहतर फिट और ज्यादा आराम के साथ दोबारा ट्रेंड में है।

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सिर्फ प्यार होना काफी नहीं, उसे जताना भी ज़रूरी है | रिश्तों की सच्चाई

अनकहा प्रेम

सिर्फ किसी से प्यार करना ही रिश्ते को मजबूत नहीं बनाता, बल्कि उस प्यार को समय-समय पर शब्दों, व्यवहार और छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से जताना भी उतना ही जरूरी होता है। जब हम अपने प्रियजनों को यह महसूस कराते हैं कि वे हमारे लिए कितने खास हैं, तब रिश्तों में विश्वास, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव गहरा होता है। जानिए क्यों प्रेम की अभिव्यक्ति किसी भी रिश्ते की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है।

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6/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान ताज होटल में अपने परिवार के साथ डरी हुई ज़ीनत – भावनात्मक हिंदी कहानी

आख़िरी रात

ज़ीनत की ज़िंदगी बागबानी, परिवार और अपने छात्रों के बीच खुशी से बीत रही थी। शादी की सालगिरह मनाने के लिए वह अपने पति फ़रीद और बेटे के साथ मुंबई के ताज होटल पहुँचती है। लेकिन 26 नवंबर 2008 की वह रात उनकी ज़िंदगी की सबसे भयावह रात बन जाती है। गोलियों, धमाकों और दहशत के बीच यह कहानी सिर्फ़ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि इंसानियत, प्रेम और आतंकवाद के खिलाफ़ खड़े होने वाले साहस की भी मार्मिक दास्तान है।

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मुंबई – रत्नागिरी के बीच 6 अतिरिक्त होली

होली के अवसर पर यात्रियों की सुविधा के लिए पनवेल–रत्नागिरी के बीच 6 अनारक्षित मेमू विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी. साथ ही दिवा–चिपलून स्पेशल की तिथियों में बदलाव किया गया है. रेलवे ने यात्रियों से संशोधित समय सारणी की जानकारी लेने की अपील की है.

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सूखी नदी, कूड़े के पहाड़ और प्लास्टिक से ढके शहर को देखते हुए एक लेखिका डायरी में लिखती हुई, पर्यावरणीय चिंता और संवेदनशीलता को दर्शाता दृश्य।

मैं लिखूँ

जब प्रकृति घायल हो, नदियाँ सूख जाएँ, शहर प्लास्टिक से ढक जाएँ और चारों ओर पर्यावरणीय संकट दिखाई दे, तब संवेदनशील मन चुप नहीं रह पाता। ‘मैं लिखूँ’ कविता उसी बेचैनी, जिम्मेदारी और परिवर्तन की उम्मीद का सशक्त स्वर है।

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