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कपिल दा जवाब नहीं

देश को पहला क्रिकेट विश्व कप दिलाने वाले महान ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान कपिल देव का उज्जैन दौरा पूरी तरह सादगी और अपनत्व से भरा रहा. मंगलवार को अल्प प्रवास पर उज्जैन पहुंचे कपिल देव ने किसी औपचारिक कार्यक्रम या प्रोटोकॉल से दूरी रखते हुए आम लोगों और बच्चों के बीच समय बिताया.

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उफनते सागर के किनारे खड़ा एक चिंतनशील व्यक्ति अपनी परछाई को निहारता हुआ, समय, अस्तित्व और जीवन के बदलते किरदारों पर मनन करता हुआ।

किरदार

हम सभी अपने भीतर कई किरदारों को जीते हैं। कुछ समय के साथ खो जाते हैं, कुछ स्मृतियों में रह जाते हैं, और कुछ जीवन के संघर्षों के बीच नई पहचान गढ़ते हैं। ‘किरदार’ जीवन, समय, जिजीविषा और आत्म-अस्तित्व की उसी अंतर्द्वंद्वपूर्ण यात्रा का काव्यात्मक दस्तावेज़ है।

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शत्रुंजय महातीर्थ की 7 यात्रा पूर्ण करने वाले तपस्वी अंकित बोथरा का जैन नवयुवक परिषद द्वारा स्वागत

तपस्वी अंकित बोथरा का किया बहुमान

अखिल भारतीय राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद शाखा महिदपुर रोड द्वारा शत्रुंजय महातीर्थ पालीताणा की 7 यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले तपस्वी अंकित बोथरा का भव्य स्वागत एवं बहुमान किया गया।

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स्पीड ब्रेकर ने लौटाई सांसें

इसे चमत्कार ही कहा जाएगा! उज्जैन जिले के खाचरोद क्षेत्र में एक महिला, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, एक स्पीड ब्रेकर के झटके से फिर से जीवित हो उठी. मृत महिला की सांसें लौटीं, यह घटना पूरे गांव और समाज के लिए कौतूहल और खुशी का विषय बन गई है.
खाचरोद की रहने वाली 75 वर्षीय अयोध्या बाई की 20 अगस्त को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. उनके बेटे उन्हें तुरंत इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल ले गए. जांच में पता चला कि उनके सिर की नस फट गई है.

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मुझसे मुझ तक…

प्रेम मेरे लिए कभी प्रश्न नहीं रहा।
मैंने देखा है तृणों को ओस की बूँदों को थामते हुए,
नन्हें जीवों को अपनी माँ की खोज में भटकते हुए,
धरती को तपिश में बादलों के लिए तड़पते हुए,
और पतझड़ को बसंत की याद में बिलखते हुए।
मेरे लिए तो यही है प्रेम की सबसे संजीदा कहानी जहाँ पीड़ा भी करुणा में ढल जाती है,
और आँसू भी कविता बनकर बह निकलते हैं।

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एक दुआ

यह कविता एक माँ के निःस्वार्थ प्रेम और आशीर्वाद की अभिव्यक्ति है, जहाँ वह अपने सुख और उम्र तक को त्याग कर संतान के लिए उज्ज्वल, सुरक्षित और छायादार जीवन की कामना करती है।

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मौन..

जब मन, शरीर और आत्मा एकसमान और संतुलित स्थिति में होते हैं, तब वास्तविक मौन का अनुभव होता है। ध्यान और मौन के अभ्यास से हम न केवल अपने मन को नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि ब्रह्मांड की शक्तियों और जीवन के गहरे रहस्यों से भी परिचित हो सकते हैं। नकारात्मक विचारों की तरह मन की उर्जा भी बिखरती रहती है, जिससे निर्णय क्षमता प्रभावित होती है। इसे शांत और सकारात्मक विचारों से भरकर, हम अपनी बौद्धिक क्षमता बढ़ा सकते हैं और आत्म-ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यह अभ्यास निरंतरता और धैर्य मांगता है, पर धीरे-धीरे यह सुखद अनुभव और गहन आध्यात्मिक अनुभूतियों का मार्ग खोलता है।

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स्त्री का मौन बोझ

किसी एक स्त्री ने कभी अपने ऊपर सारी ज़िम्मेदारियाँ लाद ली होंगी प्रेम और सम्मान की आशा में। तभी तो पीढ़ियाँ गुज़र गईं, पर “ना” कहने की हिम्मत आज भी उसके भीतर कहीं दबी रह गई। उसने जो बोझ उठाया, वही बोझ उसने अपनी बेटी को भी सौंप दिया.यह कहकर कि “मैंने किया है, तुम भी करना।”
शायद अगर कभी उसने एक बार कह दिया होत “यह सिर्फ मेरा काम नहीं है, हम मिलकर बाँटेंगे”तो आज घरों में ज़िम्मेदारियाँ बराबर होतीं, और स्त्री सिर्फ कर्तव्य नहीं, अपना अधिकार भी जी रही होती।

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मुंबई में आयोजित हुआ ‘केवल काव्य परिवार’ का भव्य काव्य संध्या समारोह

चेन्नई से पधारे कवि-उद्योगपति केवल कोठारी के सम्मान में हुआ आयोजन नवी मुंबई, 14 जून साहित्यिक प्रेमियों के लिए शनिवार की शाम खास रही, जब सेक्टर-21, खारघर में आयोजित हुई एक भावपूर्ण और भव्य काव्य संध्या। यह आयोजन “केवल काव्य परिवार” के संस्थापक, चेन्नई से पधारे उद्योगपति व कवि श्री केवल कोठारी के मुंबई आगमन…

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अरावली : सभ्यता, प्रकृति और भविष्य की पुकार

अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ नहीं, बल्कि भारत की सबसे पुरानी प्राकृतिक धरोहर और पर्यावरणीय सुरक्षा कवच है। नीतिगत परिभाषाओं के नाम पर यदि इसे कानूनी संरक्षण से बाहर किया गया, तो अवैध खनन, जल संकट और मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ेगा। अरावली को बचाना आज केवल पर्यावरण नहीं, देश के भविष्य को बचाने का सवाल है।

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