Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में महिला की दुकान में तोड़फोड़ का दृश्य

उज्जैन में मंदिर के पास महिला से 60 हजार लूट का आरोप

महाकाल क्षेत्र में एक महिला ने अपनी दुकान में तोड़फोड़ और 60 हजार रुपये लूटे जाने का आरोप लगाया है. पीड़िता के अनुसार, पड़ोसी दुकानदार लगातार दबाव बनाकर दुकान पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया.

Read More
"भारतीय ग्रामीण आँगन में एक वृद्ध सास अपनी नवविवाहिता बहू को स्नेहपूर्वक गले लगाते हुए। बहू लाल दुल्हन के परिधान में है और दोनों की आँखों में भावुकता झलक रही है। पारंपरिक विवाह की सजावट, गेंदे के फूल और गोधूलि की सुनहरी रोशनी इस माँ-बेटी जैसे रिश्ते की आत्मीयता को दर्शा रही है।"

अनोखा रिश्ता

पति के विश्वासघात के बाद जब रीना का संसार उजड़ जाता है, तब उसकी सास शांता उसे अकेला नहीं छोड़ती। वह बहू को बेटी का दर्जा देकर अपनी पूरी संपत्ति उसके नाम करने का निर्णय लेती है। यह लघुकथा बताती है कि खून से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व से रिश्ते बनते हैं।

Read More

सितंबर अहा!

सितंबर आते ही ऋतु-संधि का मधुर प्रकाश धरती पर उतर आता है। बरखा की विदाई और शरद की मुस्कान एक साथ झलकने लगती है। खेतों में धान और मक्का लहलहाते हैं, तो आँगनों में गेंदा और कमल अपनी सुगंध बिखेरते हैं। यह महीना केवल प्रकृति के बदलते रंगों का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सवों का भी साक्षी है। पितृपक्ष की श्रद्धा और गणपति का उल्लास, दोनों एक साथ वातावरण को भक्ति और आनंद से भर देते हैं। नीलम-से गगन में पुखराज-सा सूरज चमकता है और मन के आँगन में एक नया उजास जगाता है। सचमुच, सितंबर नवजीवन का संदेश लेकर आता है।

Read More

क्या-क्या है हिंदी

कविता हिंदी भाषा की विविधता, सांस्कृतिक महत्व और इसकी भावनात्मक गहराई को उजागर करती है। यह बताती है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह संबंधों, संस्कारों, व्यक्तित्व, वीरता, साधना और भक्ति का प्रतीक है। मां की गोद से लेकर ऋषि-मुनियों की सभ्यता, संत-कवियों की शिक्षा और समाज के विविध अनुभव—हिंदी इन सबका माध्यम रही है। कविता में यह भी कहा गया है कि हिंदी ने विश्व मंच पर भी अपनी पहचान बनाई है और विभिन्न परिस्थितियों में लोगों के मनोभावों, संस्कारों और इतिहास को व्यक्त किया है।

Read More

“अस्तित्व”

“दुर्गम पहाड़ों और घने जंगलों की राहों में भी, छोटे-छोटे क्षण और यादें हमारे अस्तित्व को जीने का साहस और संबल देती हैं। गुप्तधन जैसे नन्हा दीपक, उड़ते पंछी, यादों की कुप्पी—ये सब हमें जीवन की छोटी-छोटी खुशियों और अपने अस्तित्व के साथ जुड़ने का अनुभव कराते हैं।

Read More
बसंत के मौसम में खिले फूलों और हरियाली के बीच खड़ी एक मुस्कुराती महिला

मौसम-ए-बहार

“मौसम-ए-बहार” एक खूबसूरत हिंदी कविता है, जो बसंत ऋतु की ताजगी, प्रकृति की रंगीन छटा और मन की गहरी भावनाओं को बेहद कोमलता से व्यक्त करती है। इस कविता में बाग-बगीचों की हरियाली, खिलते फूल, और हल्की-हल्की हवाओं का स्पर्श एक जीवंत दृश्य रचते हैं, जो पाठक को सीधे प्रकृति की गोद में ले जाता है।

Read More
अनकहे प्रेम का भाव दर्शाता एक शांत दृश्य, जहाँ दो लोग बिना बोले आँखों से गहरा भाव साझा कर रहे हैं, वातावरण में मोगरे की हल्की सुगंध और कोमल शांति व्याप्त है।

तुम्हारा–मेरा प्रेम

उस प्रेम की कथा कहती है जो शब्दों का मोहताज नहीं होता। आँखों की गहराइयों में ठहरा, निःस्वार्थ और समान पीड़ा में बंधा यह प्रेम मोगरे की सुगंध की तरह मन में सहेजा रहता है धीरे-धीरे फैलता हुआ, आज भी अव्यक्त, फिर भी अटूट और अभेद्य।

Read More
रात के शांत वातावरण में एक युवक अपनी मां के नाम भावुक पत्र लिखता हुआ दिखाई दे रहा है, पास में हल्की पीली रोशनी वाला लैम्प, पीछे धुंधली यादों में मां और बहन की छवियां उभरती हुईं, जो पारिवारिक संवेदनाओं और समान परवरिश के भाव को दर्शाती हैं।

मां, मुझे भी रोने का हक चाहिए था

एक बेटे का अपनी मां के नाम लिखा गया यह भावुक पत्र समाज में बेटों और बेटियों की परवरिश के अंतर, पुरुषों की भावनाओं और बदलते समय की जरूरतों पर गंभीर सवाल उठाता है।

Read More

नींद और शांति का राज: लैवेंडर की खुशबू

“सोने से पहले तकिए पर 2–3 बूँदें लैवेंडर तेल डालें। इसकी खुशबू तनाव कम करती है, शरीर को शांत करती है और नींद को गहरा बनाती है। भले ही असर कुछ हद तक विश्वास (प्लेसबो) से हो, फिर भी सोने का माहौल सुखद और आरामदायक बनता है।”

Read More

ग़ज़ल 

जब दिल के मचलते भाव किसी अक्षर को ढूँढ लेते हैं, तो उन्हें बयान करने का अंदाज़ भी खोज लिया जाता है। जिन्हें उड़ने की चाहत होती है, वे पर ढूँढ लेते हैं और ज़मीन पर रहते हुए भी अपना आसमान पा लेते हैं। बच्चे बिना समझे पराए के अंतर को भी पहचान लेते हैं। उन्हें कमजोर करना आसान नहीं होता, क्योंकि अँधेरे में भी वे अपने मार्ग को प्रकाशमान बना लेते हैं। जो अपनी किस्मत खुद लिखते हैं, उन्हें अपने प्रयास पर विश्वास होता है और अवसर अपने आप ढूँढ लेते हैं। जिनके लिए मकान पक्का हो या न हो, वे सियासत के ज्वलनशील शोले भी पार कर लेते हैं। यह शरीर मिट्टी का बना है और मिट्टी में ही लौटना है, फिर भी वे अपनी आत्मा के दूसरे रूप को खोज लेते हैं। जब तक साँस चलती है, अर्चना को भी फुर्सत नहीं होती, फिर भी कुछ पल के लिए सुकून पा लेते हैं।

Read More