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सागर

डॉ. शशिकला पटेल असिस्‍टेंट प्रोफेसर (मुलुंड पूर्व) मुंबई

ये बलखाती मौजें, ये लहराता सागर
जाने किसको पुकारे, मधुर गीत गाकर।।
सुनो, सुनो, सुनो न…

क्या चाँदा से बोले लहर हौले-हौले,
बेईमान मनवा भी कुछ राज खोले।
हवाएँ भी बहती हैं कुछ गुनगुनाकर,
सुनो, सुनो, सुनो न…

झिलमिल सितारों भरी रात रानी,
सुबह की चाहत में लगती दीवानी।
चली चली ये तो झाँझर झनकाकर,
सुनो, सुनो, सुनो न…

सागर की बाँहों में बसी कुछ कहानी,
रंगीन सपनों से सजी वे नादानी।
बाँध लूँ पलकों में इसे जगमगाकर,
सुनो, सुनो, सुनो न…

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