
सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
महिदपुर रोड –श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण वातावरण में श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस का आयोजन अत्यंत भावपूर्ण रूप से संपन्न हुआ। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भजन-कीर्तन, जयघोष और हरि नाम के संकीर्तन से संपूर्ण पंडाल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने गहन एकाग्रता और भाव-विभोर मन से कथा श्रवण का पुण्य लाभ लिया।
कथा प्रवक्ता पूज्य पंडित श्री सुनीलकृष्णजी व्यास (बेरछा वाले) ने अपने ओजस्वी और हृदयस्पर्शी प्रवचनों में कहा, “भरोसे से भगवान मिलते हैं। जब गुरु की कृपा दृष्टि शिष्य पर पड़ती है, तब शिष्य की पूरी सृष्टि बदल जाती है।” उन्होंने जीवन में विश्वास, सरलता और मन की शांति को सच्ची साधना का मूल आधार बताया। उनके वचनों ने श्रद्धालुओं के हृदय को भीतर तक स्पर्श किया।

तृतीय दिवस की कथा में सुखदेव जी के आगमन, विदुर नीति, ध्रुव चरित्र, शिव चरित्र तथा भगवान नरसिंह अवतार जैसे प्रेरणादायी और भावनात्मक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया।
राजा दक्ष द्वारा शिवजी के अपमान के प्रसंग के माध्यम से अहंकार के दुष्परिणामों को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, वहीं ध्रुव चरित्र ने अटूट भक्ति, तपस्या और विश्वास की शक्ति को उजागर किया। नरसिंह अवतार के सजीव वर्णन ने यह संदेश दिया कि भगवान अपने सच्चे भक्त की रक्षा के लिए स्वयं प्रकट होते हैं।

कथा के दौरान कई क्षण ऐसे आए जब श्रद्धालुओं की आंखें भावुक हो उठीं। “नारायण-नारायण” और “हरि बोल” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो गया। संपूर्ण पंडाल भक्ति, विश्वास और वैराग्य की अनुभूति से सराबोर नजर आया।
तृतीय दिवस की आरती एवं प्रसादी के यजमान श्री गणपतलाल जी, श्री भँवरलाल जी चौधरी एवं समस्त चौधरी परिवार रहे। यजमान परिवार द्वारा पूरे श्रद्धा भाव से आरती एवं प्रसादी का आयोजन किया गया।
कुल मिलाकर, श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस ने यह सशक्त संदेश दिया कि सच्चा भरोसा, पूर्ण समर्पण और निष्कपट भक्ति ही भगवान प्राप्ति का मार्ग है। श्रद्धालु इस आध्यात्मिक अनुभूति को हृदय में संजोए कथा स्थल से लौटते नजर आए।
