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बचपन को बाँहों में भर लो…

बच्चे रंग, खुशबू और उम्मीदों से भरे उस चमन के फूल हैं जिनकी नर्म हथेलियों पर उनकी पूरी तकदीर लिखी होती है। कहीं धूल-भरी मुट्ठियाँ हैं, कहीं हँसी से भरा बालपन और कहीं वही बचपन घरों में कैद होकर बहेलियों की निगाहों से डरता है। उनके मस्तक वात्सल्य से भीगने के लिए बने हैं, न कि भय से काँपने के लिए। पर सच यह है कि कुछ बच्चे शिक्षा के मंदिरों में बैठते हैं, जबकि कुछ बाहर मायूस खड़े रह जाते हैं.

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मन 

यह कविता रिश्तों में पसरी हुई खामोशी और मन की गहराइयों में उपजी पीड़ा का चित्रण करती है। कवि कहता है कि यह खामोशी, मन को एक निर्जल और सूने कुएँ में धकेल देती है, जहाँ आकुलता और विकलता का साया छा जाता है। वहाँ न कोई चाहत होती है, न उम्मीद—नव अंकुर फूटने की संभावना भी नहीं।मन के किसी कोने में आशाएँ और अभिलाषाएँ सुंदर यादों की पोटली बनकर धरी रह जाती हैं। हर अहसास धीरे-धीरे पिघलकर पतझड़ के मौसम में बदल जाता है, और अंततः यह मन एक बांझ धरा की तरह फट पड़ता है।

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नवदुर्गा के प्रेरक दोहे

नवरात्रि का पर्व शक्ति और भक्ति का अद्वितीय संगम है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन शैलपुत्री का सुंदर दरबार सजता है, जिनकी आराधना से जीवन में ममता और वात्सल्य का संचार होता है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी का स्मरण किया जाता है, जो तप, साधना और भक्ति की प्रतीक हैं।

माँ चंद्रघंटा अपने अपार सौंदर्य और दिव्य छवि के साथ पीले वस्त्र धारण कर सिंह पर सवार होकर भक्तों को संकटों से मुक्त करती हैं। कूष्मांडा स्वरूप धारण करने वाली माँ के ध्यान से शोक, भय और अशुभता दूर होकर शुभ वरदान मिलता है। पंचम रूप में माँ स्कंदमाता के दर्शन से अद्भुत शांति और कृपा प्राप्त होती है।

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कनॉट प्लेस में रंग-बिरंगे पंखे बेचती एक छोटी लड़की, मासूम आंखों और श्रम से भरी हथेलियों के साथ

वो लड़की

‘वो लड़की’ कविता एक मासूम बच्ची के संघर्ष, श्रम और सपनों को बेहद संवेदनशीलता से चित्रित करती है। उसकी छोटी-सी दुनिया में छिपी बड़ी संभावनाएं और भावनाएं पाठक को गहराई से छू जाती हैं, और समाज की सच्चाई को उजागर करती हैं।

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अकेलेपन और प्रेम को दर्शाता थिएटर सीन”

नेपथ्य और रंगमंच

यह कविता जीवन को एक रंगमंच के रूप में प्रस्तुत करती है, जहां हर व्यक्ति एक किरदार निभा रहा है। कवयित्री स्वयं को मंच पर उपस्थित बताती है, जहां वह अपने भावों, पीड़ाओं और प्रेम को खुलकर जी रही है, जबकि उसका प्रिय नेपथ्य में रहकर अपने अस्तित्व को छिपाए हुए है।

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माँ विंध्यवासिनी की सुंदर प्रतिमा, लाल चुनरी और स्वर्ण आभूषणों से सजी हुई, नवरात्रि पूजा का दृश्य

विंध्यवासिनी माता

विंध्यवासिनी माता को समर्पित यह भक्ति कविता भक्तों की आस्था, श्रद्धा और समर्पण को दर्शाती है। इसमें माता के श्रृंगार, छप्पन भोग, नवरात्रि उत्सव और भक्तों की भावनाओं का सुंदर चित्रण किया गया है। यह कविता नवरात्रि के पावन अवसर पर पढ़ने योग्य एक उत्कृष्ट रचना है।

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मैदान से महाकाल तक…

गरिमामय एवं आत्मीय समारोह में 4 दशक से मैदानी पत्रकारिता के पर्याय बने वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा की प्रथम कृति ‘किस्से कलमगिरी के’ का लोकार्पण जाल सभागृह में आयोजित हुआ। समारोह के अतिथि जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजय शंकर मेहता, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता महा विद्यालय भोपाल के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी थे। अध्यक्षता राष्ट्र कवि संचालक सत्यनारायण सत्तन ने की। 

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कैसे हो आप? दिल को छू लेने वाली रोमांटिक हिंदी कविता

कैसे हो आप ?

कैसे हो आप?” एक स्नेह, उलझन और गहराई से भरी हिंदी कविता है। इसमें प्यार की मासूम कश्मकश, गुस्से में छिपा अपनापन और रिश्तों की मिठास को बेहद सरल और दिल को छू लेने वाले अंदाज़ में व्यक्त किया गया है।

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