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महाकाल मंदिर की संपत्ति पर सियासी हलचल

महाकाल मंदिर की संपत्ति पर सवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मांगा आय और जमीन का पूरा हिसाब

विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मांगा पूरा हिसाब

सुरेश परिहार, संपादक लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की संपत्ति और आय को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। उज्जैन उत्तर से विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने विधानसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से मंदिर की चल-अचल संपत्ति, आय, व्यय और दान व्यवस्था का विस्तृत विवरण मांगा है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने जवाब में कहा है कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। विधायक के इस कदम को राजनीतिक घेराबंदी की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल महाकाल मंदिर विधायक कालूहेड़ा के ही विधानसभा क्षेत्र में स्थित है। पिछले पांच वर्षों में मंदिर परिसर में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। श्री महाकाल लोक बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। वर्षभर में 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसके चलते दान, लड्डू प्रसादी की बिक्री और नकद आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। श्रद्धालु सोना-चांदी भी बड़ी मात्रा में अर्पित कर रहे हैं। मंदिर की वार्षिक आय 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

विधायक ने 26 फरवरी को धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा है कि मंदिर के नाम पर प्रदेश और प्रदेश के बाहर कितनी कृषि, व्यावसायिक और आवासीय भूमि दर्ज है। वर्तमान में कुल चल-अचल संपत्ति कितनी है और उनका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। संपत्तियों का भौतिक सत्यापन कब हुआ। क्या दानदाताओं को रसीद दी जाती है और यदि नहीं तो लेखा संधारण कैसे होता है। वित्त वर्ष 2024-25 में आय और मदवार व्यय का पूरा ब्यौरा क्या है। साथ ही क्या मंदिर की आय जिला रेडक्रॉस या कलेक्टर के माध्यम से खर्च की जाती है, इसका भी विवरण मांगा गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपने ही क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध मंदिर में अपेक्षित महत्व नहीं मिलने की पृष्ठभूमि में विधायक ने यह कदम उठाया है। हालांकि विधायक कालूहेड़ा का कहना है कि करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र इस मंदिर की आय और संपत्ति संबंधी पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है, इसलिए उन्होंने प्रश्न पूछा है।

अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली जानकारी में क्या तथ्य सामने आते हैं और मंदिर प्रबंधन इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

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