उम्मीद की किरण

रेखा हजारिका, लखीमपुर (आसाम)

सब कुछ बदलता है,
समय जब रोगग्रस्त होता है,
समाज भी रोगमय हो जाता है।

दिलों में प्यार की कमी,
भेदभाव का विष बहता है,
शांति को चोट पहुँचती है,
अशांति का जय-जयकार होता है।

भूख की आग,
अमुक्त शरीर,
सूखे स्तन से
कैसे बुझेगी लाल की प्यास?

ना छत है ऊपर,
ना कोई आवरण।

बच्ची को कौन बचाए,
पीसास जश्न मनाए?

यह समय रोगग्रस्त है,
हवा भी विस्मित है,
लेकिन उम्मीद की किरण
अभी भी कहीं जलती है।

2 thoughts on “उम्मीद की किरण

    1. आदरणीय साथियों मुझे इस बात की खुशी है कि आप सभी लोग एक-दूसरे की रचनाओं को पढ़ते हैं और अपनी राय व्यक्त करते हैं. इसी तरह से वरिष्ठ साथी, नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहें और समय-समय पर मार्गदर्शन करते रहें. आप अपनी रचनाएं नियमित रूप से भेज कर सहयोग करते रहें.
      सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज

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